रायपुर : भारतीय रेलवे में यात्रा करने वाले अधिकतर लोग मध्यवर्गीय और गरीब तबके के होते है, ट्रेनों में विभाग ने स्लीपर कोच कम करके एसी के कोच बढ़ा दिए है, जिससे यात्री महंगाई की मार तो झेल ही रहे है अब उन पर दोहरी मार रेलवे ने लगा दी है। रेलवे के सिस्टम से अब हजारों यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। यदि रेलवे काउंटरों से लिया रिजर्वेशन टिकट वेटिंग है, तब भी रेलवे स्लीपर कोच में आपको सफर नहीं करने देगा, बल्कि सीधे जुर्माना वसूलेगा। क्योंकि कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को कोई दिक्कत न हो, इस बात पर रेलवे प्रशासन अब खास ध्यान दे रही है। इसलिए अब केवल दो ही रास्ता है – पहला या तो रिजर्वेशन चार्ट जारी होते ही टिकट कैंसिल कराएं या जनरल कोच में सफर करने के लिए तैयार रहें। वही गरीबरथ वाली ट्रेनों में यात्रा ही नहीं की जा सकती है, यह पुराना नियम है, अब यात्री इधर भी फंस रहे है। जबकि यात्री पूरा किराया दे ही रहा है और ऊपर से वेटिंग टिकटें भी विभाग ज्यादा ही जारी कर रहा है।
ऐसा सिस्टम रेलवे प्रशासन ने हर एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों में लागू कर दिया है। परंतु रेलवे प्रशासन ट्रेनों में जितनी बर्थ, उतना रिजर्वेशन टिकट जारी करने के सिस्टम में पूरी तरह से फेल है। इसलिए यात्रियों को सबसे अधिक परेशान झेलनी पड़ रही है। क्योंकि एक-एक ट्रेनों में डेढ़ सौ से दो सौ तक वेटिंग रिजर्वेशन टिकट जारी किया जाता है और उसमें से मुश्किल से ही 20 से 25 टिकट कॅन्फर्म होते हैं, वो भी तब जब कोई दूसरा यात्री अपना टिकट कैंसिल कराता है। ऐसे में जरूरी काम होने पर अभी तक जैसे-तैसे किसी न किसी तरह से जहां जगह मिलती थी, वहां यात्री अपना सफर पूरा कर लेते थे। परंतु अब रेलवे इस पर सख्ती से रोक लगा रहा है। यह यात्रियों के साथ अन्याय करने वाला व्यवहार है, जबकि वेटिंग वाले यात्री भी पूरा पैसा दे ही रहे है।
रेलवे के जुर्माना वसूली सिस्टम से सबसे अधिक परेशान स्लीपर कोच वाले यात्री होंगे। क्योंकि ट्रेनों के एसी कोचों में वैसे भी वेटिंग टिकट वाले यात्री नहीं घुसते हैं। चूंकि जनरल कोच में पैर रखने तक की जगह नहीं होती है, इसलिए रिजर्वेशन टिकट वेटिंग में लेकर कम से कम स्लीपर कोच में सफर करना अधिक सहूलियत समझते हैं। अब इस पर भी रोक लगाने में सख्ती बरती जा रही है। अफसरों का तर्क है कि रेलवे के रिजर्वेशन काउंटरों से लिया गया वेटिंग टिकट जनरल टिकट के बराबर ही है। इसलिए ट्रेन का टीटीई चेकिंग के दौरान या तो जुर्माना वसूलेगा या फिर जनरल कोच में ही सफर करना होगा, जबकि जनरल कोच भी आधे से कम कर दिये गये है।
त्योहारी सीजन में डेढ़ से दो सौ तक वेटिंग टिकट जारी :
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रायपुर स्टेशन से गुजरने वाली ऐसी कोई ट्रेन नहीं है, जिसमें वेटिंग सूची नहीं होती, राजधानी से अहर रूट के लिये ट्रेनें चलती है। त्योहारी सीजन में तो रेलवे के रिजर्वेशन काउंटरों से डेढ़ सौ से दो सौ तक वेटिंग टिकट जारी किए जाते हैं। इस पर रोक लगाने के बजाय रेलवे जुर्माना वसूली पर ही ज्यादा जोर लगा रहा है। तर्क दिया जा रह है कि वेटिंग रिजर्वेशन टिकट वाले जनरल कोच में ही सफर कर सकते हैं। क्योंकि टिकट चेकिंग का सिस्टम अब ऑनलाइन हो गया है। माचिस मीडिया लगातार रेलवे यात्रियों की समस्याओं को प्राथमिकता दे रहा है, रेलवे सिर्फ कमाई बढ़ाने में लगा हुआ है, उसे यात्रियों को सिर्फ लोलीपोप ही थामना है, ट्रेनें लगातार फुल चल रही है, रेलवे की नीतियाँ लगातार यात्रियों को चौतरफा मुसीबत में डाल रही है, पूरा रेलवे विभाग यात्री सुविधा के नाम पर फेल साबित हो रहा है।
कोच की संख्या बढ़ाने में भी रेलवे हांफ रहा :
दूसरी तरफ ट्रेनों में यात्रियों की आवाजाही लगातार बढ़ी है, फिर भी नई ट्रेनें चलाने या फिर जो ट्रेनें चल रही हैं, उनमें कोच की संख्या बढ़ाने में रेलवे प्रशासन हांफ रहा है। ऐसे में हजारों यात्रियों को दोहरी मार पड़ रही है। न तो जनरल कोच में बैठने की जगह मिलती है न ही ट्रेनों में कोचों की संख्या बढ़ाने की स्थिति में रेलवे है, जनरल कोच तो विभाग बंद करने की तैयारी में था, लेकिन यात्रियों की नाराजगी भारी पड़ गई। अफसरों का कहना है कि अधिकांश ट्रेनें पूरे कोच के साथ चल रही हैं, उसमें अधिक कोच नहीं लगा सकते।
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रायपुर रेलवे के सीनियर डीसीएम अवधेश कुमार त्रिवेदी ने बताया – वेटिंग रिजर्वेशन टिकट पर केवल जनरल कोच में ही सफर कर सकते हैं। स्लीपर कोच में जुर्माना लगेगा। क्योंकि कंफर्म टिकट वाले यात्रियों को परेशानी की शिकायतें मिलने पर ऐसा तरीका अपनाया गया है। जितनी बर्थ, उतना रिजर्वेशन टिकट सिस्टम पर रेलवे का काम चल रहा है।



