चार साहिबजादों की वीरतापूर्ण शहादत की याद में, पुष्प वर्षा कर गोंडपारा गुरुद्वारा से शहीदी मार्च निकाली गई।

विजय दुसेजा/बिलासपुर : चार साहिबज़ादे शब्द का प्रयोग सिखों के दशम गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के चार सुपुत्रों – साहिबज़ादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, ज़ोरावर सिंह, व फतेह सिंह को सामूहिक रूप से संबोधित करने हेतु किया जाता है। दिसंबर की 21 से 27 तारीख, ये वो सप्ताह होता है जिस पर पूरा सिख समुदाय और पूरा देश गर्व से भर जाता है और पूरे सप्ताह को बलिदानी सप्ताह के तौर पर मनाने की परंपरा चली आ रही है। ये सप्ताह उन 4 साहिबजादों को समर्पित किया गया है जिन्होंने सिख धर्म की रक्षा के लिए खुद की जान तक कुर्बान कर दिया पर बर्बर मुगलों के सामने वे झुके नहीं और न तो उन्होंने अपना धर्म बदला। ये सप्ताह सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह के साहिबज़ादे बाबा अजीत सिंह जी, बाबा  जुझार सिंह जी, बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह की याद में बिताया जाता है। ये पूरा सप्ताह उनको समर्पित किया जाता रहा है।

जूते की इक ठोकर से हम ताज तख्त ठुकरा सकते हैं।
दीवारों में चुनवा कर खुद को रोम-रोम मुस्कुरा सकते हैं।

दिसंबर माह का आखिरी सप्ताह भारत वर्ष के इतिहास मैं श्री गुरु गोविंद सिंह जी के पूरे परिवार की शहादत के लिए जाना जाता है, विशेष तौर पर उनके चार साहिबजादो के लासानी इतिहास के लिए, जिन्होंने देश, धर्म, समाज व सिद्धांतों की रक्षा के लिए वीरता पूर्वक शहादत दी। चार साहिबजादो की वीरतापूर्वक शहादत को याद करने के लिए गोडपारा गुरुद्वारा से शहीदी मार्च निकाली गई। शहीदी मार्च का पुष्प वर्षा कर श्री गुरु गोविंद सिंह के महान सपूतों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। गोलबाजार चौक के पास समाजसेवी चंचल सलूजा ,केशव बाजपेई ,तारेद्र उसराठे, अमित दुबे राकेश सेलरका, कृष्ण मुरारी दुबे महावीर ठाकुर ,रिक्की दुबे, पम्मी शराफ ,शैंकी गुप्ता ,आदि लोगों शामिल हुए।

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