छत्तीसगढ़ी सिनेमा का बुरा हाल, लगातार असफल होती फ़िल्में, सामने आती है ये दिक्कतें….।

रायपुर : आमतौर पर आज जहाँ बड़े बजट की फ़िल्में भी असफल हो रही है, वहां छत्तीसगढ़ी सिनेमा को लेकर क्या कहें? ऐसा हाल तो हल छोटे बजट की फिल्म के साथ भी होता है। लेकिन राज्य में मुख्यतः छत्तीसगढ़ी सिनेमा की ही बात करना बेहतर होगा। राजधानी के क्षेत्रिय सिनेमा में इन दिनों कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है। एक तरह से असफल फिल्मों का लगातार दौर शुरू हो गया है। इसकी शुरुआत 26 जुलाई को रिलीज हुई फिल्म मोर बाई हाई फाई से शुरू हुई। बड़े चेहरे के बावजूद फिल्म असफल साबित हुई। तबसे अब तक 7 फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर असफल रहीं है। अब यह सिलसिला कब तक चलेगा यह देखने वाली बात होगी। आने वाले दिनों में नामी चेहरे भी दिखाई देंगे। वहीँ जानकारों की मानें तो कुछ फिल्में वाकई कमजोर बनी थी लेकिन कुछ को रणनीति का शिकार होना पड़ा। भारतीय सिनेमा की भी कई फ़िल्में लगातार असफल हो रही है।

ये सभी छत्तीसगढ़ी फिल्में हुईं असफल :

फिल्म रिलीज डेट : मोर बाई हाई फाई 26 जुलाई, का इही ल कईथे मया 15 अगस्त, जवानी जिंदाबाद 23 अगस्त, संघर्ष एक जंग 30 अगस्त, ए ददा रे 30 अगस्त, तहि मोर आशिकी 6 सितम्बर, आखिरी फैसला 13 सितम्बर ।

नहीं मिल पाते शो :

व्यापारिक जानकार लोगों की मानें तो मल्टीप्लेक्स में उन्हीं फिल्मों को शो मिलते हैं जिसकी रिपोर्ट अच्छी बताई जाती है। छोटी-मोटी फिल्मों को एकाध शो मिल जाए तो वही बहुत है। कई छोटे बजट की फिल्मों को भी शो नहीं मिल पाते। बॉलीवुड फिल्मों की रिलीज के दबाव के चलते भी स्क्रीन नहीं मिल पाती है। कहीं-कहीं तो ऑनलाइन टिकट प्लेटफॉर्म से फिल्म का नाम हटाने की शिकायतें भी मिलती हैं। मल्टीप्लेक्स पर भी जानबूझकर शो रद्द किए जाने के आरोप मेकर्स की तरफ से लगाए जाते रहे हैं।

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डिस्ट्रीब्यूटर और एग्जीबिटर लकी रंगशाही कहते हैं, कोई भी फिल्म अगले सप्ताह तक तभी चल पाती है जब वह होल्डओवर को क्रॉस करे। होल्डओवर यानी कलेक्शन की निश्चित राशि जो एग्रीमेंट में दर्ज होती है। जैसे किसी फिल्म के लिए होल्डओवर अमाउंट दो लाख रुपए है। अगर हफ्तेभर का कलेक्शन इससे कम रहा तो फिल्म उतार दी जाती है। थियेटर संचालक इसी आधार पर शो को तय करते है।