बेरूत (लेबनान) : वैश्विक स्थितियां इस समय ऐसी बन रही है जो किसी भी समय विश्वयुद्ध की तरफ मुड़ सकती है। वहीँ फिर से इसराईल ने लेबनान पर एक नये तरह का हमला किया है। दुनिया ने मंगलवार को भविष्य में लड़े जाने वाले युद्ध का एक नया तरीका देखा, जब लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्ला से जुड़े सदस्यों के 1000 से ज्यादा पेजरों में एक साथ धमाके हुए। इनमें 16 लोगों की मौत हो गई और लगभग 2750 लोग घायल हो गए। घायलों में 200 से अधिक की हालत गंभीर है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। मृतकों में हिजबुल्ला के दो लड़ाके और सांसद अली अम्मार का बेटा भी शामिल हैं। इस हमले से दुनिया यह सोचकर सहम उठी कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों का इस्तेमाल बम की तरह किया जा सकता है। ऐसा इसलिये है क्यूंकि आजकल हर डिवाइस में लिथियम आयन बैटरी का प्रयोग होता है। इसके बारे में ज्यादा जानकारी हम आपको आगे देंगे।
घायलों में अधिकांश हिजबुल्लाह के लड़ाके हैं, जो इजरायल के हमले से बचने के लिए आज भी मोबाईल फोन की जगह पेजर का प्रयोग करते हैं। अल हदाथ टीवी ने बताया है कि हमले में हिजबुल्लाह के 500 से ज्यादा सदस्यों ने अपनी आंख गंवाई है। हमले में घायल ईरान के राजदूत मोजतबा अमानी की भी एक आंख चली गई है। विस्फोट दोपहर लगभग 3:30 बजे बेरूत के दक्षिणी इलाके दहियाह और पूर्वी बेका घाटी में शुरू हुए। इसे हिजबुल्लाह का गढ़ माना जाता है। जिन पेजर में विस्फोट हुए हैं, हिजबुल्लाह ने उन्हें हाल ही में मंगवाया था। रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि एक नष्ट हुए पेजर की तस्वीर में ऐसा स्टिकर दिखाई दिया है जो गोल्ड अपोलो के पेजर के अनुरूप था। लेबनान के वरिष्ठ सुरक्षा सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि हिजबुल्लाह ने ताइवान स्थित गोल्ड अपोलो से 5000 पेजर मंगवाए थे। हिजबुल्लाह को भरोसा था कि सेलफोन के मुकाबले पुरानी तकनीक वाले ये पेजर संचार के दौरान इजरायली ट्रैकिंग सिस्टम की पकड़ में नहीं आएंगे। लेकिन इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद के जासूस हिजबुल्लाह की सप्लाई चेन में घुस चुके थे।
मोसाद के हाथों में पहुंचे पेजर :
मामले को लेकर सामने आया है कि हिजबुल्लाह तक सप्लाई से पहले ये पेजर मोसाद के हाथों में पहुंच गए थे। लेबनान में हिजबुल्लाह के पास भेजे जाने से पहले इजरायली जासूसों ने इन पेजर के अंदर छोटे विस्फोटक प्लांट कर दिए। मंगलवार को बाहर से कमांड भेजकर एक साथ पेजरों में ब्लास्ट कर दिया गया। ऐसा मालूम होता है कि हिजबुल्लाह ने हाल ही में मंगाए पेजर को देश से बाहर भी अपने लड़ाकों को पहुंचाए थे। सीरिया से भी पेजर के विस्फोट की खबरें आई हैं। सीरिया में हिजबुल्लाह के लड़ाके मौजूद हैं। इन बातों में कितनी सच्चाई है कह पाना मुश्किल है, लेकिन दावे ऐसे ही किये जा रहे है।
गोल्ड अपोलो के संस्थापक सू चिंग-कुआंग ने 18 सितम्बर को संवाददाताओं को बताया कि कंपनी ने वो पेजर नहीं बनाए हैं, जिनका विस्फोटों में इस्तेमाल किया गया है। कुआंग ने बुधवार को न्यू ताइपे में संवाददाताओं से कहा, ‘यह उत्पाद हमारा नहीं था। इसमें सिर्फ हमारा ब्रांड था।’ कंपनी ने इन सबसे किनारा कर लिया है।
क्या होता है पेजर?
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पेजर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जिसे मैसेज भेजने रिसिव करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। 1990 के दशक में कारोबारी, डॉक्टर और अन्य प्रोफेशनल्स के बीच पेजर का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता था। क्योंकि उस वक्त मोबाइल फोन इतने ज्यादा पॉपुलर नहीं हुए थे।
कब और किसने किया पेजर का अविष्कार?
पेजर का अविष्कार साल 1921 में ए एल ग्रॉस की ओर से किया गया था। हालांकि, पेजर का इस्तेमाल 1950 के बाद से शुरू हुआ। इसे पहली बार न्यूयॉर्क सिटी क्षेत्र के चिकित्सकों के लिए शुरू किया गया था। 1980 का दशक आते-आते इसे दुनियाभर में व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किया जाने लगा। आपको बता दें कि पेजर का अविष्कार करने वाले ए एल ग्रॉस भी यहूदी ही थे। उन्होंने वॉकी-टॉकी और कोर्डलेस टेलिफोन का भी अविष्कार किया था। पूरी दुनिया की तकनीक के पीछे अधिकतर यहूदी ही मिलेंगे।
पेजर रेडियो फ्रीक्वेंसी की मदद से अपना काम करता है। इसमें इंटरनेट या कॉलिंग या फिर मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। एक पेजर डिवाइस मैसेज भेजता है और दूसरा उसे रिसिव करता है। मुख्य रूप से बात करें तो पेजर तीन तरह के हैं।
- वन वे पेजर: इस तरह के पेजर से केवल मैसेज को रिसिव किया जा सकता है।
- टू वे पेजर: इस तरह के पेजर से मैसेज भेजा और रिसिव दोनों ही काम किया जा सकता है।
- वॉयस पेजर: इस पेजर में लोग अपनी आवाज भी रिकॉर्ड कर सकते हैं।
पेजर से हिजबुल्लाह क्या करता था?
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हिजबुल्लाह को शक था कि उसके कम्युनिकेशन नेटवर्क के कुछ लोगों को इजरायल ने खरीद लिया है। इसी के बाद इस संगठन में इंटरनल कम्युनिकेशन के लिए मोबाइल को बैन कर दिया गया था। किसी भी काम के लिए हिजबुल्लाह के मेंबर पेजर से कम्युनिकेट करते थे, वो लोग मोबाईल का प्रयोग नहीं करते थे।
बड़ा सवाल – क्या पेजर हैक हो सकता है?
हिजबुल्लाह को शक है कि इजरायल ने किसी मालवेयर की मदद से उनके पेजर में ब्लास्ट करवाए हैं। तो अब सवाल ये उठता है कि क्या पेजर को हैक किया जा सकता है? अगर संवेदनशील जानकारी साझा करने की बात की जाए तो पेजर को फुल प्रूफ नहीं माना जा सकता। अगर पेजर के रेडियो सिग्नल को इंटरसेप्ट कर लिया जाए तो इसे आसानी से हैक किया जा सकता है। पेजर में कोई भी एन्क्रिप्शन नहीं होता जो कि इसे और कमजोर बनाता है। वहीँ आज की तकनीकों के आधार पर कुछ भी संभव हो सकता है।
आपके लिये क्या है हानियाँ ?
1. साइबर नेटवर्क के इस्तेमाल से ब्लास्ट की आशंका। 2. सप्लाई चेन में सेंध लगाकर विस्फोटक का इस्तेमाल। 3.सेल्फ डिस्ट्रक्ट उपकरणों को ट्रैक कर धमाके। वैसे आमतौर पर प्रथम दृष्टया ऐसा करना आसान काम नहीं है, सॉफ्टवेर हैकिंग के जरिये, मोबाईल में ऐसी एप इंस्टाल की जा सकती है, जो कि बैटरी की पॉवर ज्यादा खींचे और लिथियम बैटरी, गर्म होकर फट जाये।
वहीँ पहले भी कई मोबाईल फटने की खबरें सामने आई है, जिसमें जिसमें चार्जिंग पर बात करते समय अथवा मोबाईल के गर्म होने पर बैटरी का फटना , वहीँ ओला इलेक्ट्रिक बाइक फटने से बड़ी घटनायें हुई है, ये सभी लिथियम बैटरी के गर्म होकर फटने के कारण होता है, ऐसा ही यह मामला भी हो सकता है। वहीँ अगर आपकी कोई इलेक्ट्रोनिक डिवाइस 3 साल से ज्यादा पुरानी हो तो उसे समय रहते बदल दें, जहाँ मोबाईल में नेटवर्क कम पकड़ता हो अथवा मोबाईलम गर्म हो रही हो तो फ्लाइट मोड़ कर दें। तकनीकी तौर पर भारत में सबसे ज्यादा चीन के मोबाइल प्रयोग होते है, जो कि ऐसे समय में काफी हानिकारक हो सकते है।
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