राकेश डेंगवानी/रायपुर : प्रति वर्ष नवरात्री के पश्चात् सेवा पथ द्वारा माता की आराधना स्वरुप नौ कन्याओं के विवाह का आयोजन सामाजिक स्तर पर किया जाता है, इसमें देवी माता के नौ रूप जाने जाते है, पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कूष्मांडा, पांचवी स्कंध माता, छठी कात्यायिनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नौवीं सिद्धिदात्री। ये मां दुर्गा के नौ रुप हैं। इन नौ रूपों की पूजा नवरात्री में की जाती है, एक कथा के अनुसार, माता भगवती देवी दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर के साथ नौ दिन तक युद्ध किया था, उसके बाद नवमी की रात्रि को उसका वध किया था। उस समय से देवी माता को ‘महिषासुरमर्दिनी’ के नाम से भी जाना जाता है। तभी से मां दुर्गा की शक्ति को समर्पित नवरात्रि का व्रत करते हुए इनके 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। इसी से प्रेरणा लेकर रायपुर की सामाजिक संस्था “सेवा पथ” ने प्रतिवर्ष नौ कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनके विवाह का जिम्मा विगत 5 वर्षों से उठाया है, जिसका प्रतिवर्ष भव्य आयोजन संस्था द्वारा किया जाता है।
सादगी और कम खर्च में पिता अपनी बेटियों को करते है विदा :
जहाँ एक बेटी का पिता होना समाज में गर्व करने वाली बात है, वहीं वर्तमान कुरीतियों के कारण एक पिता पर कर्ज लेकर बेटियों का विवाह करना एक अभिशाप भी बनता जा रहा है। बेटी के विवाह में भव्य आयोजन करने के आडंबर और एक दूसरे से अधिक दहेज देने की होड़ का अनुसरण करते – करते मध्यम वर्गीय पिता अपनी बेटी की शादी तो धूमधाम से कर लेता है, उसके बाद वो पूरी जिन्दगी मेहनत करके उस शादी का कर्ज चुकाते-चुकाते बुढ़ा हो जाता है। यानी कि एक बेटी के पिता का फर्ज निभा पाना बहुत ही कष्टदायक है। वहीँ एक विवाह को करने के लिये मध्यमवर्ग लगभग 10 – 15 लाख का खर्चा भी उठाता है। वहीँ जब नौ कन्याओं का विवाह एक स्थान पर होता है और उसका खर्च समाज के वरिष्ठों द्वारा वहन किया जाता है, तो माता-पिता को बड़ी राहत मिलती है। ऐसे में प्रतिवर्ष सेवा पथ का यह कार्य बेहद ही प्रशंसनीय है।
विवाह में होने वाली सभी रस्में निभाई जायेंगी :
महामृत्युंजय मन्त्र, इसकी उत्पत्ति की कथा और महत्व के साथ , पूर्ण सुनना आवश्यक है: https://www.youtube.com/watch?v=L0RW9wbV1fA
नौकन्या विवाह का प्रमुख कार्यक्रम 10 नवम्बर 2024 रविवार को रखा गया है, जिसमें दिनांक 9 नवंबर शनिवार
को बहराणा साहेब की पूजा की जायेगी, तथा अगले दिन 10 नवम्बर को सुबह से ही वैवाहिक कार्यक्रम शुरु हो जायेंगे, जिसमें रामसत, मुकुट बंधन, दूल्हों की बारात, कन्याओं की बारात, जानी वासा, लेडिस संगीत (लाडे), माता स्वरूपी कन्याओं की आरती, वेदी – फेरे (नौ पंडितों द्वारा विधि विधान से विवाह संपन्न करायेंगे) उसके बाद रात को विशाल मंच पर 9 वर-वधुओं का संगीतमय रिसेप्शन रहेगा। यह सम्पूर्ण कार्यक्रम राजधानी रायपुर के अग्रसेन धाम में आयोजित किया जा रहा है, जो कि बड़े ही भव्य स्वरूप में होगा, इसमें राज्यभर के सैकड़ों अथितियों सहित कई वरिष्ठ जन और समाजसेवी भी शामिल होंगे। इस आयोजन को संपन्न करने के लिये समाज के लोगों ने दिल खोलकर सहयोग दिया है।
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कार्यक्रम के आयोजनकर्ताओं में रायपुर सहित आसपास के क्षेत्रों की कई सामाजिक संस्थाओं के लोग अपनी सेवायें देंगे, साथ ही इसका प्रमुख संचालन सेवापथ संस्था के लोगों द्वारा किया जायेगा। जिसमें संस्था प्रमुख पहलाज खेमानी, संजय लालवानी, संस्था के अन्य सदस्य एवम् महिला टीम का योगदान महत्वपूर्ण रहेगा।



