सुपरहिट फ़िल्में देने वाले शोमैन सुभाष घई की बिगड़ी तबियत, सामने आई ये जानकारी….।

मुंबई (महाराष्ट्र) : बढ़ती उम्र के साथ आदमी बीमार हो ही जाता है, वहीँ जब कोई बड़ी हस्ती हो तो लोग उसके साथ भी जुड़ाव महसूस करते है, ऐसे में वो उसका हाल-चाल भी जानना चाहते है, वहीँ भारत में फिल्म इंडस्ट्री के शोमैन मशहूर फिल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 79 वर्षीय को सांस संबंधी समस्याओं, कमजोरी और बार-बार चक्कर आने के बाद बुधवार को आईसीयू में ले जाया गया था। कल शाम 7 दिसंबर से उनको स्वास्थ्य सम्बन्धी दिक्कत हुई है, अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, घई वर्तमान में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विजय चौधरी, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन गोखले और पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. जलील पारकर सहित विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम की कड़ी निगरानी में हैं। अस्पताल के एक सूत्र ने बताया कि सुभाष घई की हालत में सुधार के लक्षण दिख रहे हैं। सूत्र ने बताया कि घई को एक दिन के भीतर आईसीयू से सामान्य वार्ड में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है।

मशहूर फ़िल्मकार है सुभाष घई? :

राम लखन (1989), खलनायक (1993), हीरो (1983), कर्ज़ (1980) जैसी फिल्में बनाने वाले सुभाष घई एक दिग्गज डायरेक्टर हैं। सुभाष घई को शोमैन के नाम से भी जाना जाता है। 1976 से सुभाष फिल्मों का निर्देशन कर रहे हैं। सुभाष ने 1976 में फिल्म कालीचरण (1976) से शुरुआत की थी, यह फिल्म उन्होंने बिना किसी पूर्व निर्देशन अनुभव के बनाई थी। एनएन सिप्पी के पास आने से पहले फिल्म को सात बार खारिज कर दिया गया था, जिन्होंने घई को मौका दिया था। इसके बाद उन्होंने दो साल बाद विश्वनाथ (1978) के साथ काम किया, लेकिन अपनी तीसरी फिल्म और पहली बार अपने मुक्ता आर्ट्स बैनर के तहत, कर्ज़ (1980) के साथ बड़ी सफलता हासिल की।

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ऋषि कपूर और टीना मुनीम की हिट जोड़ी के साथ, कर्ज़ ने सुभाष और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को एक साथ लाया। सुभाष घई अब तक बॉलीवुड में कई फिल्में डायरेक्ट कर चुके हैं। जिनमें से कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही हैं। वहीँ इन फिल्मों के बाद यादें, ताल, जैसी भी बेहतरीन फ़िल्में सुभाष घी ने बनाई, उनकी लगभग सभी फिल्मों में लक्ष्मीकान्त-प्यारेलाल का संगीत और आनंद बक्षी के गीत ही रहते थे। लक्ष्मीकांत शांताराम कुडालकार का 25 मई 1998 को निधन हुआ और उसके बाद से उनके जोड़ीदार प्यारेलाल शर्मा ने भी फिल्मों से दूरी बना ली थी, जिसके बाद सुभाष घई की फिल्मों में दूसरों को मौका मिला।