नई दिल्ली : किसी भी देश की जनसंख्या एक सामान्य ज्ञान है, ऐसे में वोटरों की संख्या के बारे कोई नहीं जानता है, वहीँ वोटरों की संख्या ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिसके मतदान से आपके देश का भविष्य तय होता है, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां हर साल कहीं न कहीं चुनाव का आयोजन हमेशा होता ही रहता है। भारत में कुल 4,000 से ज़्यादा शहर और कस्बे हैं, भारत में लगभग 250,000 ग्राम पंचायतें मौजूद हैं। ऐसे में सिर्फ राज्यों के चुनाव को ही ले लिया जाये तो प्रतिवर्ष औसतन 7 राज्यों के चुनाव होते है। भारत में हर साल 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। बता दें कि भारत की आजादी के बाद साल 1950 में इसी दिन भारत के निर्वाचन आयोग की स्थापना हुई थी। अब मतदाता दिवस से पहले चुनाव आयोग ने भारत में कुल मतदाताओं के आंकडें जारी किये है। आइए जानते हैं भारत में वोटर्स से जुड़ी कुछ अहम जानकारियों को।
कितने हैं कुल मतदाता?
वर्तमान में भारत की कुल आबादी लगभग 146 करोड़ है, भारतीय निर्वाचन आयोग ने राष्ट्रीय मतदाता दिवस से पहले एक बयान जारी करते हुए बताया है कि भारत में मतदाताओं की संख्या अब 99.1 करोड़ हो गई है। चुनाव आयोग ने ये भी बताया है कि देश में मतदाता सूची युवा और लैंगिक तौर पर संतुलित दिख रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक, भारत में 18-29 आयु वर्ग के 21.7 करोड़ युवा मतदाता हैं। वहीं, देश में मतदाताओं का लैंगिक अनुपात 2024 में 948 से छह अंक बढ़कर 2025 में 954 हो गया है। वहीँ यह आंकड़ा काफी बड़ा है।
जल्द ही 1 अरब होंगे वोटर्स :
वर्तमान में नये संसद भवन में लोकसभा कक्ष में 888 सीटें और राज्यसभा कक्ष में 384 है, पुराने संसद भवन में राज्यसभा कक्ष में 250 सदस्यों और लोकसभा कक्षा में 550 सदस्यों के ही बैठने के इंतजाम था, इस आधार पर आने वाले समय में लोकसभा की सीटें जो कि वर्तमान में 543 है, वह लगभग 750 हो सकती है, हाल ही में चुनाव आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए शेड्यूल जारी किया था। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने जानकारी दी थी कि भारत में जल्द ही एक अरब से ज्यादा मतदाता हो जाएंगे जो कि एक नया रिकॉर्ड बन जाएगा। आपको बता दें कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव का आयोजन 5 फरवरी को किया जाना है। 70 सीटोें पर होने वाले इस चुनाव का रिजल्ट 8 फरवरी को घोषित होंगे।
लोकसभा में सीटें होने का यह है नियम :
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हमारे देश में 25 लाख से ज्यादा की आबादी पर एक लोकसभा सांसद है। ये दुनिया में सबसे ज्यादा है। संविधान अधिकतम दस लाख की आबादी पर एक सांसद की बात कहता है। साथ ही कहता है कि सांसदों की संख्या 550 से ज्यादा नहीं हो सकती। इसी आबादी के हिसाब से राज्यों में सीटों की संख्या बढ़ाने या घटाने की बात भी हमारे संविधान में कही गई है। इसके हिसाब से 1971 तक देश और अलग-अलग राज्यों में सीटों की संख्या भी घटी-बढ़ी। लेकिन, पिछले 50 साल से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसका नतीजा ये हुआ कि आज यूपी में 30 लाख लोगों पर एक सांसद है तो तमिलनाडु में करीब 20 लाख लोगों पर।
अगर देश में 550 सीटों की शर्त को खत्म कर दें और हर 10 लाख की आबादी पर एक सांसद वाले नियम के हिसाब से सीटें बांटी जाएं तो अकेले यूपी में सीटों की संख्या 238 हो जाएगी। इस स्थिति में देश में कुल 1375 सीटें होगीं। यहां, एक बात और बता दें कि जिन राज्यों में 6 लाख से कम की आबादी है वहां 10 लाख पर एक सीट वाला नियम लागू नहीं होगा। ऐसे राज्यों में एक सांसद तो रहेगा ही रहेगा। ये हम नहीं संविधान कहता है।



