नई दिल्ली : वक्फ बोर्ड में संशोधन के लिये JPC बनाई गई थी, वक्फ को लेकर हुई बैठक अब खत्म हो गई है। वक्फ जेपीसी ने बिल को 11 के मुकाबले 14 वोट से स्वीकार कर लिया है। विपक्षी सदस्यों को आज शाम 4 बजे तक अपना असहमति नोट देने के लिए कहा गया है। वक्फ संशोधन विधेयक पर विचार कर रही संसद की संयुक्त समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बुधवार को कहा समिति ने मसौदा रिपोर्ट और संशोधित विधेयक को बहुमत से स्वीकार कर लिया। विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों को विनियमित और प्रबंधित करने से जुड़े मुद्दों और चुनौतियों का समाधान करने के लिए वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन करना है।
विपक्षी सांसदों ने 44 बदलाव किए थे पेश :
विपक्षी सांसदों ने 44 बदलाव पेश किए थे जिन्हें खारिज कर दिया गया था और इस कारण राजनीतिक दलों में हंगामा मच गया था। सोमवार को, देश भर में वक्फ बोर्डों के प्रशासन के तरीके में सुधार लाने के लिए लाए गए वक्फ संशोधन विधेयक को जेपीसी ने 16:10 सदस्यों (एनडीए के 16 और विपक्षी दलों के 10) के अंतर से मंजूरी दी थी। जानकारी के अनुसार, वक्फ विधेयक में कुल 66 संशोधन प्रस्तावित किए गए थे, जिनमें सत्तारूढ़ भाजपा सांसदों द्वारा 23 और विपक्षी सदस्यों द्वारा 44 संशोधन शामिल थे। जिन पर विचार किया जा रहा था।
जेपीसी के अध्यक्ष और भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि यह संसदीय पैनल की अंतिम बैठक थी और बहुमत के आधार पर कुल 14 संशोधनों को मंजूरी दी गई है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा था, “पिछले छह महीनों के विचार-विमर्श में, हमने कई संशोधनों पर चर्चा की. सभी संशोधन पर मतदान हुआ और सदस्यों ने अपना फैसला सुनाया है, जिसमें 16 ने इसके पक्ष में मतदान किया जबकि 14 ने संशोधनों का विरोध किया।”
विपक्ष ने समिति के अध्यक्ष पर लगाया आरोप :
विपक्ष ने समिति के अध्यक्ष पर पक्षपात और सत्तारूढ़ पार्टी के प्रति झुकाव का आरोप लगाया था। विपक्ष ने यह भी दावा किया कि राष्ट्रीय राजधानी में विधानसभा चुनाव से पहले वक्फ के प्रक्रिया में जल्दबाजी की जा रही है। सोमवार को जेपीसी में शामिल 11 विपक्षी सांसदों ने अध्यक्ष जगदंबिका पाल के ‘निरंकुश’ व्यवहार और एनडीए सदस्यों द्वारा प्रस्तावित 14 संशोधनों को स्वीकार करने में उनकी जल्दबाजी पर निशाना साधा था। एक संयुक्त बयान में, विपक्षी सांसदों ने कहा, “समिति विचार-विमर्श के अंतिम चरण में पहुंच गई है। हम विपक्ष के सदस्य जेपीसी की कार्यवाही के संचालन और उसमें शामिल नियमों और प्रक्रियाओं पर अपना विरोध दर्ज कराते हैं।” इस तरह बिल के विरोध में विपक्षियों ने अपनी असहमति जताई है।
ओवैसी का बयान आया सामने :
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इस मामले में अससुद्दीन ओवैसी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, ‘आज तो ड्राफ्ट रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया है। 14 वोट इसके पक्ष में थे और 11 वोट विपक्ष में थे। कल रात में 650 पेज के ऊपर रिपोर्ट दी गई, कैसे किसी को हम इतनी जल्दी पढ़कर देंगे। हम हमारी पार्टी की तरफ से असहमति नोट दे रहे हैं और हमारा मानना है कि मोदी सरकार जो अमेंडमेंट लेकर आई है वह प्रॉपर्टी को बचाने के लिए नहीं है बल्कि बर्बाद करने के लिए है। वक्फ मुसलमानों के लिए इबादत है, उसे छीना जाना चाहते हैं।’
अससुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘हमारा मानना है कि मोदी सरकार वक्फ प्रॉपर्टी को मुसलमानों से छीनना चाहती है। सरकार के पास बहुमत है तो उन्होंने इस अमेंडमेंट को पास करवा लिया। अब ये संसद में जाएगा लेकिन हम संसद में लड़ाई लड़ेंगे। जरूरत पड़ेगी तो हम बाहर भी इसका विरोध करेंगे।’
इससे पहले वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 पर चर्चा कर रही संसद की संयुक्त समिति (JPC) ने सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सदस्यों द्वारा प्रस्तावित सभी संशोधनों को सोमवार को स्वीकार कर लिया था और विपक्षी सदस्यों के संशोधन प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। समिति के अध्यक्ष जगदम्बिका पाल ने बैठक के बाद बताया था कि समिति द्वारा स्वीकार किए गए संशोधनों से कानून बेहतर और प्रभावी होगा। हालांकि, विपक्षी सांसदों ने बैठक की कार्यवाही की निंदा की और पाल पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ‘पलटने’ का आरोप लगाया था, उस समय भी काफी बवाल हुआ था।



