रायपुर : अजीत कुकरेजा और कुलदीप जुनेजा के विवाद के बारे में बात करने से पहले परदे के पीछे की कहानी समझना जरुरी है, जो कि तय हो ऐसा कहा नहीं जा सकता फिर भी समझना जरुरी है, उत्तर विधानसभा को सिन्धी बहुल क्षेत्र माना जाता है, जबकि ऐसा नहीं है, यहाँ प्रत्याशी का भाग्य तय करने वाले मतदाता अधिकतर झुग्गी बस्ती के है, वहीँ सिन्धी बहुल की महत्ता को देखते हुये जुनेजा की सोच यह हो सकती है कि अगर अजीत कुकरेजा को टिकट मिल जाता है तो उन्हें फिर वहां से हटाना मुश्किल होगा क्यूंकि उन्हें सिन्धी समाज का समर्थन मिल जायेगा और कांग्रेस का मुस्लिम वोट बैंक भी उन्हीं के पक्ष में होगा, शायद यही सोचकर उन्होंने विधानसभा चुनाव में अजीत कुकरेजा को छोड़कर किसी को भी टिकट देने की बात कही थी, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ हो, हालाँकि अब इधर छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बार फिर से बवाल मच गया है। दरअसल मंगलवार को नगरीय निकाय चुनाव के लिए पोटिंग खत्म होते ही प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अनुशासनहीनता के चलते पार्टी से निकाले गए डेढ़ दर्जन कांग्रेसियों का निष्कासन रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है। जिनका निष्कासन रद्द किया गयार उनमें रायपुर उत्तर क्षेत्र से नगर निगम के पूर्व एमआईसी मेंबर अजीत कुकरेजा का नाम भी शामिल है। बस इसी नाम को लेकर पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने नाराजगी जताई है।
उल्लेखनीय है कि, एआईसीसी ने छत्तीसगढ़ के प्रदेश प्रभारी के अनुमोदन से विभिन्न जिलों के जिन लोगों का निष्कासन रद्द किया गया है, उनमें रायपुर जिले से सागर दुल्हानी, दिवाकर साहू बिलासपुर से जसबीर गुब्बर, महासमुंद से विश्वजीत बेहरा, कांकेर से क्रांति नाग, बस्तर से बोमडा मंडावी, दंतेवाड़ा से मनोज मालवीय और नरेंद्र सुराना, बालोद से तुकाराम साहू, हलधर साहू, नूतन किशोर साहू, तुलेश साहू, सोहन साहू, खोमन सिन्हा, संध्या निषाद, प्रताप चंद्र साहू और रिखीराम साहू शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने ऐसे नेताओं के वापसी के लिए आवेदन लिया था, जो विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान विद्रोह कर चुनाव मैदान में उतरे थे। आपको बता दें की निर्दलीय चुनाव लड़कर अजीत कुकरेजा ने इतिहास रच दिया था उन्हें 23,000 लगभग वोट मिले थे, जो कि उनकी निर्दलीय रूप से खड़ा ना होने के कारण कुलदीप जुनेजा को मिल सकते थे, जो कि नहीं मिले और इसका लाभ भाजपा को मिल गया।
पैसा खुदा से कम नहीं : जुनेजा
वहीँ अब कुकरेजा की वापस को लेकर जुनेजा नाराज हो गये है, जिसको लेकर बवाल मच गया है। पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा ने कुकरेजा की वापसी पर नाराजगी जताई है। जुनेजा ने कहा है कि, पैसा खुदा तो नहीं, पर खुदा की कसम खुदा से कम भी नहीं। उन्होंने कहा कि, जो पैसे लेकर टिकट और पार्टी में आने की बात कहते थे वे वापस कैसे आ गए। मैंने कहा था, जो लोग पैसे लेकर टिकट देते हैं उसकी जांच हो। श्री जुनेजा ने कहा कि, मैं सिर्फ यही कह सकता हूं कि, पैसा खुदा से कम नहीं। वहीँ अब अगले चुनाव में यह तय माना जा रहा है कि उत्तर विधानसभा से अगली बार कुकरेजा को ही टिकट मिलना तय है, ऐसे में कुलदीप जुनेजा के लिये मुश्किल भरी बात हो जायेगी।
मेरे खिलाफ कहने को जुनेजा के पास कुछ नहीं : कुकरेजा
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उधर कांग्रेस में वापसी के बाद अजीत कुकरेजा ने कहा है कि, हम लगातार टिकट मांग रहे थे, नहीं मिली तो चुनाव लड़ना पड़ा। मैं हमेशा विचारधारा से बंधा रहा हूं, फिर से कांग्रेस में वापसी हुई है। मेरी पार्टी में क्या भूमिका होगी यह वरिष्ठ नेता तय करेंगे। उन्होंने कहा कि, मैंने लोकसभा, निकाय चुनाव में भी पार्टी के पक्ष में काम किया है। वहीं पूर्व विधायक कुलदीप जुनेजा के आरोपों पर अजीत कुकरेजा ने कहा कि, मेरे खिलाफ उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए बार-बार वे पैसे लेकर टिकट खरीदने की बात कहते हैं। जबकि चार बार स्वयं वे चुनाव लड़ चुके हैं। मैं सभी नेताओं से मिलूंगा, जुनेजा जी वरिष्ठ हैं, उनसे भी मिलूंगा। वहीँ इस तरह से अजीत कुकरेजा की जुनेजा से कोई नाराजगी जाहिर नहीं हो रही है। इससे बस यही है कि जुनेजा को अपनी जमीन खिसकने का डर है। विवाद के नाम पर मामले में कुछ भी नहीं है।



