बिलासपुर : हमेशा सवाल उठता है क्या डॉक्टरों की लापरवाही की कोई सजा नहीं है, या रसूखदार होने के कारण ऊँचे अपने कृत्य से बाख जाने का अधिकार बीते छः माह पूर्व राजधानी में भारती खेमानी नाम की महिला की रेड एम्बुलेंस और अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से जान चली गई थी जिसमें गृहमंत्री द्वारा कार्यवाही और जांच की बात कहने के बाद भी अस्पताल अथवा रेड एम्बुलेंस पर कोई कार्यवाही नहीं हो पाई है। वहीँ अब इस मामले में भी बड़ी लापरवाही सामने आई है, सिम्स में पेट दर्ज की समस्या के कारण भर्ती महिला को इंजेक्शन लगाते ही उसका गर्भपात हो गया। परिजनों ने डॉक्टरों और स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए काफी हंगामा किया है।
आरोप है कि किसी कविता नाम की महिला की जगह दूसरी महिला को इंजेक्शन लगा दिया गया। इधर डॉक्टरों ने महिला का सही इलाज और उसकी जान बचाने की बात कही है। फिलहाल सिम्स प्रबंधन ने महिला के परिजन को जांच का आश्वासन दिया है। वहीँ इस लापरवाही से महिला के लिये आजीवन दुःख वाली बात खड़ी हो गई है, मामला है कोटा क्षेत्र के करगीकला गांव में रहने वाली गिरजा साहू (24) पांच महीने की गर्भवती थी। पेट दर्द के कारण परिजन उसे सिम्स लेकर आए थे। यहां पर उसे भर्ती कर इंजेक्शन दिया गया। इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद ही उसे ब्लीडिंग शुरू हो गई। इसके कारण उसका गर्भपात हो गया।
पीड़िता ने लगाया लापरवाही का आरोप :
पीड़ित गिरजा ने आरोप लगाया है कि वार्ड में कविता नाम की महिला भर्ती थी। वह आठ माह की गर्भवती थी। उसके बच्चे की पेट में मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने उसे इंजेक्शन लगाने कहा था। इधर स्टाफ कविता की जगह गिरजा को बुलाकर ले गई। उसे दूसरी महिला की जगह पर इंजेक्शन लगा दिया गया। जब डॉक्टरों को इस लापरवाही की जानकारी हुई उन्होंने स्टाफ को फटकार भी लगाई। वहीँ इस लापरवाही से एक माँ का गर्भपात हो गया, जिससे पीड़िता और परिजन काफी गमगीन है।
एचओडी ने कहा – नहीं हुई गलती, महिला की बचाई जान :
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इस पूरे मामले में स्त्री रोग विभाग की एचओडी डा संगीता जोगी ने किसी तरह की लापरवाही से इन्कार किया है। उन्होंने बताया कि महिला की जांच रिपोर्ट के बाद उपचार किया गया है। अगर उसे सही समय पर इलाज नहीं मिलता तो उसकी मौत भी हो सकती थी। उन्होंने पूरे मामले की जांच भी कराने का आश्वासन दिया है। लेकिन परिजन इससे संतुष्ट नहीं है।



