राजधानी में चोरी-छिपे रहता था बांग्लादेशी परिवार, पुलिस कि गिरफ्त में आने के बाद हुआ ये खुलासा….।

रायपुर : 10 फरवरी को राजधानी में एटीएस की टीम ने बड़ी कार्यवाही करते हुए तीन बंग्लादेशियों को गिरफ्तार किया था। तीनों लंबे समय से रायपुर में रह रहे थे, ये लोग छत्तीसगढ़ छोड़कर मुंबई चले गए थे, वहां से वे लोग इराक जाने के फिराक में थे। तीनों बंग्लादेशी नागरिकों की पहचान मोहम्मद इस्माइल, शेख अकबर और शेख साजन के रूप में हुई थी। एटीएस ने तीनों को गिरफ्तार किया था, वहीँ तीनों के पास छत्तीसगढ़ का आधार कार्ड, पासपोर्ट भी मिले हैं। आरोपियों के पास से एक नकली मार्कशीट भी मिली, इस पूरे फर्जी दस्तावेजों में क्षेत्रिय पार्षद का नाम भी आ चुका है, जिससे ATS पूछताछ भी कर चुकी है।

इस मामले में खुलासा हुआ था कि तीनों भाई रायपुर में अवैध रूप से रह रहे थे और यहां से तीनों इराक के बगदाद भाग रहे थे, लेकिन एटीएस ने दबोच लिया गया। तीनों ने रायपुर से ही सभी फर्जी दस्तावेज बनवाए थे। शुरुआती जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी फर्जी दस्तावेज बनवाकर 26 जनवरी 2025 को बगदाद जाने के लिए हावड़ा मुंबई मेल ट्रेन से मुंबई पहुंचे थे।पुलिस और ATS को इसकी भनक लग गई। एटीएस और रायपुर पुलिस तीनों का पीछा करते हुए मुंबई पहुंची थी वहीँ इनको पकड़ने के बाद खुलासा हुआ था कि ये लोग आतंकवादी बनने जा रहे थे।

वहीँ अब एक नये मामले में खुलासा हुआ है फर्जी दस्तावेज के जरिए रह रहा बांग्लादेशी परिवार अंडा ठेला लगाकर जीवन यापन करता था। जानकारी के अनुसार, टिकरापारा थाना पुलिस ने बांग्लादेशी मोहम्मद दिलावर खान और उसकी पत्नी परवीन बेगम को बच्चों के साथ गिरफ्तार किया गया है। धर्मनगर क्षेत्र में किराए का मकान लेकर रहा रहा बांग्लादेशी परिवार मूलत: मुख्तारपुर, थाना मुंशीगंज, बांग्लादेश के मूल निवासी है। लिस ने मो. दिलावर नामक व्यक्ति, उसकी पत्नी परवीन बेगम समेत नाबालिग बच्चे को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी दस्तावेजों के सहारे लंबे समय से रायपुर में रह रहे थे।

दूसरे देश का मोबाइल नंबर मिला :

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पूछताछ की तो उन्होंने अपना जन्म तिथि 15 अप्रैल 1975 बताया। जन्मतिथि से संबंधित दस्तावेज की मांग करने पर आरोपी ने कक्षा आठवीं का मार्कशीट पुलिस को दिखाया गया। जिसमें साल 2009 और 2010 का उल्लेख है। वहीँ आठवीं कक्षा के जन्म तिथि में 15 अप्रैल 1975 अंकित है, जिससे स्पष्ट है की मार्कशीट फर्जी है। वहीँ मोहम्मद दिलावर का मोबाइल फोन है, जिसमें एयरटेल कंपनी का सिम मिला है जिसको चेक करने पर एक मोबाईल नंबर पर बातचीत होती है जो बांग्लादेश का मोबाईल नंबर है। यह उसकी बड़ी बहन का नंबर है, जिससे वह लगातार बात करता था।

कई संदिग्ध फोन नंबर मिले :

इस मामले में आरोपी के कब्जे से मिले मोबाईल फोन में बांग्लादेश के कई अन्य नंबर भी अलग-अलग नाम से सेव करके रखे गए हैं। आरोपी 15 साल पहले भारत बांग्लादेश का बॉर्डर बनगांव के रास्ते अकेले भारत आया था। भारत आने के बाद रायपुर में रहने लगा। वह लगभग 2 साल के बाद अपनी पत्नी परवीन बेगम और 1 वर्षीय पुत्री को भी भारत लाया था। आरोपी ने अंडा ठेला लगाकर ग्राहकों के माध्यम से पासपोर्ट और दूसरे दस्तावेज तैयार करवाए थे। इस तरह वह भारत का नागरिक बन गया।  पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह भारत से बांग्लादेश चार बार आना-जाना भी किया है।

बांग्लादेशी परिवार का राजधानी रायपुर में मिलने से पहले ही उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा प्रदेश के प्रत्येक जिले में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करने के लिए एक स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के गठन की घोषणा कर चुके हैं, इसके साथ पुलिस को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

भिलाई से भी महिलाएं गिरफ्तार :

दुर्ग जिला पुलिस ने पिछले कुछ दिनों में भिलाई व उसके आस-पास के क्षेत्र से कई बंग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। ये लोग यहां फर्जी दस्तावेज बनाकर और नाम बदलकर कई सालों से रह रहे थे। इनमें महिलाएं भी शामिल हैं। जिसके बाद पुलिस ने शहरी इलाकों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी छानबीन कर रही है। ऐसे ही कई जगहों से अवैध बांग्लादेशी गिरफ्त में आ रहे है।