पुरन्दर प्रमोटर्स एवं डेवलपर्स, बिल्डर और बेटे पर दर्ज हुई 420 की FIR, सामने आया ये मामला….।

रायपुर : राजधानी रायपुर में करोड़ों की जमीन के फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह मामला है पुरन्दर प्रमोटर एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के संचालक मुकेश अग्रवाल और उसके पिता सुरेश अग्रवाल के खिलाफ जमीन हड़पने और धोखाधड़ी करने के आरोप में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है। यह मामला आजाद चौक थाना क्षेत्र का है। आजाद चौक पुलिस ने पुरन्दर प्रमोटर्स एवं डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के पाम वलाजियो प्रोजेक्ट के बिल्डर पिता-पुत्र मुकेश अग्रवाल व सुरेश अग्रवाल एवं अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में धारा 420, 34 के तहत केस दर्ज किया है। इस मामले में चौबे कॉलोनी निवासी प्रकाश की ओर से की गई शिकायत पर एफआईआर की गई है। यह मामला रिपोर्टकर्ता एवं उनके परिचित की जमीन को फर्जी विक्रय विलेख तैयार करके अपना बताते हुए आरोपियों द्वारा अपने प्रोजेक्ट के बदले नगर निगम में बंधक रख दिए जाने का है।

रिपोर्ट के मुताबिक पुरन्दर प्रमोटर्स एवं डेवलपर्स के डायरेक्टर मुकेश अग्रवाल, सुरेश अग्रवाल एवं अन्य द्वारा सड्डू स्थित प्रार्थी की 60 हजार वर्गफीट जमीन को अक्टूबर 2017 में जॉइंट वेंचर के माध्यम से डेवलप करने तथा बदले में मकान, फ्लैट, रकम बतौर प्रतिफल देने सहमति बनी थी। उक्त जमीन नगर निगम रायपुर में अंतरण किया जाना था। आठ जून 2018 को मुकेश अग्रवाल की कंपनी व रिपोर्टकर्ता के मध्य इकरारनामा हुआ था। इसके बाद नवंबर 2017 से 26-09-2019 तक अलग-अलग किस्तों में 2 करोड़ 70 लाख 64,220 रुपए दिए गए थे। इस एफआईआर में जानकारी दी गई है कि 2021 तक उक्त भूमि पर किसी प्रकार का कोई भी कार्य नहीं किया गया। जिस वजह से हम दोनों सहमत होकर प्राप्त रकम 11 मई 2021 को मुकेश अग्रवाल को वापस किया गया है। रिपोर्ट है कि रकम लौटा देने और समझौता निरस्त हो जाने के बाद भी पीड़ित की भूमि को आरोपियों ने नगर निगम रायपुर में पाम वलाजियो प्रोजेक्ट के एवज में ईडब्ल्यूएस में बंधक हेतु दे दिया गया। वहीँ नगर निगम कार्यालय में उक्त भूमि को 16 सितंबर 2022 को विक्रय विलेख निष्पादित किया जाना बताया गया है। जिसमें आरोपियों ने पीड़ित की भूमि को अपना बताया है। जबकि आरोपियों के साथ उक्त भूमि को लेकर किसी प्रकार का विक्रय विलेख तैयार नहीं किया गया हैं।

इस प्रस्ताव के तहत 08 जून 2018 को एक इकरारनामा साइन हुआ और लगभग 2,70,64,220 करोड़ रुपये की राशि अग्रवाल पक्ष को अलग-अलग किश्तों में दी गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि न तो कोई वैध विक्रय विलेख हुआ और न ही उन्होंने कोई सहमति दी, फिर भी 25 जुलाई 2022 और 16 सितंबर 2022 को नगर निगम कार्यालय में फर्जी विक्रय विलेख प्रस्तुत कर जमीन का दुरुपयोग किया गया। साथ ही शिकायत में हस्ताक्षर की कूटरचना और धोखाधड़ी का भी आरोप लगाया गया है।

साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि मुकेश अग्रवाल आदतन जमीन के धोखाधड़ी का अपराधी है। ग्राम रींवा, तहसील मंदिर हसौद, जिला रायपुर में कई किसानों से उनकी जमीन की धोखाधड़ी की है, जिसमें कुछ लोगों ने प्रताड़ित होकर आत्महत्या तक कर ली थी। इसके अतिरिक्त अन्य जमीनों के मामलों में भी मुकेश अग्रवाल द्वारा छल, कपट, धोखाधड़ी और कूटरचना के आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं, जहां मुकेश अग्रवाल की जमानत सभी न्यायालयों से खारिज हो चुकी है और आरोपी मुकेश अग्रवाल फरार चल रहा है। फ़िलहाल, मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज कर जांच में जुट गई है।