बेंगलूरू (कर्नाटक) : हर व्यक्ति को आईटीआर फाइल करना चाहिये, इसमें खर्च के नाम पर कुछ भी नहीं है, आप स्वयं भी इसे कर सकते है। आमतौर पर 31 जुलाई तक आईटीआर फाइल करने का समय रहता है। वहीँ कई बार इसे आगे भी बढ़ा दिया जाता है। आयकर रिटर्न (आईटीआर) फाइलिंग का सीज़न चल रहा है और करदाताओं के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि उनके लिए कौन सा ITR फॉर्म भरना सही रहेगा। चाहे आप नौकरीपेशा व्यक्ति हों, फ्रीलांसर, व्यापारी या फिर पेंशनभोगी – हर कैटेगरी के लिए अलग-अलग फॉर्म तय हैं। ऐसे में सही फॉर्म का चयन करना न सिर्फ आपकी कर प्रक्रिया को आसान बनाता है, बल्कि भविष्य की परेशानी से भी बचाता है। इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि ITR-1 से लेकर ITR-7 तक, किसे कौन सा फॉर्म भरना चाहिए।
किसके लिए कौन सा फॉर्म है सही :
ITR-1 (सहज)
इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट की ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक ITR-1 (सहज) फॉर्म उन व्यक्तियों के लिए है जो भारत में निवासी (रहने वाले) हैं (लेकिन सामान्यतः निवासी नहीं के अंतर्गत नहीं है आते), जिनकी कुल आय ₹50 लाख तक है और जिनकी आय के स्रोत निम्नलिखित हैं:
- वेतन/पेंशन
- एक मकान संपत्ति से आय
- अन्य स्रोत (जैसे ब्याज आदि)
- धारा 112A के तहत दीर्घकालिक पूंजी लाभ, अधिकतम ₹1.25 लाख तक
ITR-2 :
यह फॉर्म उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUFs) के लिए है जिनकी आय में व्यवसाय या पेशे से प्राप्त लाभ और हानि शामिल नहीं है।
ITR-3 :
यह फॉर्म उन व्यक्तियों और HUFs के लिए है जिनकी आय में व्यवसाय या पेशे से प्राप्त लाभ और हानि शामिल होती है।
ITR-4 (सुगम) :
यह फॉर्म उन व्यक्तियों, HUFs और फर्मों (LLP को छोड़कर) के लिए है जो भारत में निवासी हैं, जिनकी कुल आय ₹50 लाख तक है और जिनकी आय निम्नलिखित श्रेणियों के अंतर्गत आती है।
- व्यवसाय या पेशा जिसकी गणना धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत की गई हो
- साथ ही धारा 112A के तहत दीर्घकालिक पूंजी लाभ भी हो
ITR-5 :
यह फॉर्म उन इकाइयों के लिए है जो निम्नलिखित में शामिल नहीं हैं।
- व्यक्ति (Individual)
- HUF
- कंपनी
- वे व्यक्ति जो ITR-7 फाइल करते हैं
ITR-6 :
यह फॉर्म कंपनियों के लिए है जो धारा 11 के तहत छूट का दावा नहीं कर रही हैं (जैसे धर्मार्थ संस्थाएं)।
ITR-7
यह फॉर्म उन व्यक्तियों या कंपनियों के लिए है जो धारा 139(4A), 139(4B), 139(4C) या 139(4D) के तहत आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए अनिवार्य हैं। इसमें मुख्य रूप से धार्मिक/धर्मार्थ संस्थान, राजनीतिक दल, ट्रस्ट आदि शामिल होते हैं।
ITR-U
यह फॉर्म उन व्यक्तियों के लिए है जो किसी पूर्व निर्धारण वर्ष (असेसमेंट ईयर) की समाप्ति के 48 महीनों के भीतर अपनी आय को अपडेट करना चाहते हैं।



