बिलासपुर रेल हादसे की वजह आई सामने, मौत का आंकड़ा 11 तक पहुंचा, इस साल की छठी बड़ी दुर्घटना।

रायपुर : छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के पास गेवरा से बिलासपुर जंक्शन को जोड़ने वाली एक लोकल ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई, जिसमें 11 यात्रियों की मौत हो गई और कम से कम 20 घायल हो गए, इस घटना से राज्य वासियों को सिहरा दिया। यह दुर्घटना मंगलवार शाम करीब 4 बजे हुई और प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार यह सिग्नल उल्लंघन के कारण हुई। इस गंभीर टक्कर में मेमू (मेनलाइन इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) ट्रेन का इंजन और एक कोच मालगाड़ी के आखिरी डिब्बे की छत पर चढ़ गया था। इस दुर्घटना के बाद कई यात्री काफी देर तक मलबे में फंसे रहे, जब तक कि बचाव दल मौके पर नहीं पहुंच गए। यह इस साल रेल क्रॉसिंग को छोड़कर छठी घातक रेल दुर्घटना है। इस घटना में मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर ने कूद कर अपनी जान बचाई।

सिग्नल पर ध्यान ना करने से हुआ हादसा :

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (एसईसीआर) ने एक प्रारंभिक बयान में संकेत दिया है कि लोको पायलट ने स्वचालित सिग्नल को नजरअंदाज कर दिया होगा, जिससे यह घातक दुर्घटना हुई है। एसईसीआर ने कहा, ‘प्रारंभिक मूल्यांकन के आधार पर, मेमू ट्रेन द्वारा खतरे पर सिग्नल पार करना ही इस दुर्घटना का कारण प्रतीत होता है। दुर्घटना के सटीक कारण का पता लगाने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए रेलवे सुरक्षा आयुक्त द्वारा एक विस्तृत जांच की जायेगी।’ कोरबा-बिलासपुर मेमू लोकल हादसे में मौत बनकर तेज गति से आ रही मेमू लोकल को देख मालगाड़ी के ट्रेन मैनेजर शैलेश चंद्रा को सामने साक्षात यमराज नजर आया. बताया जा रहा है, कि तेज रफ्तार से आ रहे मेमू लोकल को मालगाड़ी के गार्ड शैलेश चंद्रा ने देख लिया। इसके बाद वह गाड़ी से कूद कर दूर भाग गया जिससे उसकी जान बच गई है।

मृतकों को 10 लाख का मुआवजा :

दुर्घटना स्थल पर तत्काल राहत ट्रेन और चिकित्सा दल बिलासपुर से भेजे गए। रेलवे ने प्रत्येक मृतक यात्री के परिवार के लिए 10 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों के लिए 5 लाख रुपये और मामूली चोटों वाले यात्रियों के लिए 1 लाख रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की गई है। बिलासपुर के जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल ने पुष्टि की कि घायलों का इलाज छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज और आसपास के निजी अस्पतालों में किया जा रहा है। रेलवे और स्थानीय प्रशासन की टीम ने रेल हादसे के बाद लगभग 10 घंटे तक रेस्क्यू अभियान चलाया, जो बुधवार तड़के तक चला। मंगलवार देर रात तक हैवी क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बोगी को हटा लिया गया। रात 3 बजे तक शवों को बाहर निकालने का काम चला। जिसके बाद मुंबई-हावड़ा रेल लाइन पर यातायात बहाल कर दिया गया है।

इस घटना में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एक्स पर शोक व्यक्त किया है और पीड़ितों और उनके परिवारों को पूर्ण राज्य समर्थन का आश्वासन दिया है। उन्होंने लिखा, ‘रेलवे और प्रशासन की टीमें राहत और बचाव कार्यों में लगी हुई हैं। घायलों के इलाज के लिए सभी आवश्यक संसाधन और चिकित्सा सहायता सुनिश्चित की जा रही है।’ अधिकारियों ने परिवारों को अपडेट प्राप्त करने के लिए कई हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं : 7777857335, 7869953330, 8085956528, 9752485600, 8294730162। बिलासपुर रेल हादसे में गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी के बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा प्रिया चंद्रा की मौत हो गई। वह सक्ती जिले के बहेराडीह की रहने वाली थी और बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा थी। दुर्घटनाग्रस्त कोच से प्रिया की बॉडी निकाली गई।