आरंग : सरकार किसी की भी हो, सत्ताधारी दल के नेताओं के संरक्षण में अवैध कार्य बेख़ौफ़ तरीके से होते है, इसका ताजा मामला सामने आया है, इन दिनों कुरूद में रेत का अवैध कारोबार चरम पर है। सत्ता और पद के नशे में चूर स्थानीय जनप्रतिनिधि न केवल महानदी का सीना चीरकर प्राकृतिक संपदा की चोरी कर रहे हैं, बल्कि इस काले कारनामे को उजागर करने वाले लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी पत्रकारों पर भी हमला करने से नहीं चूक रहे हैं।
बीते दिनों रेत के अवैध भंडारण की सूचना पर कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों के साथ ग्राम पंचायत कुरूद के पंच जितेंद्र कुमार नारंगे ने शराब के नशे में धुत्त होकर अभद्र व्यवहार किया है। पंच ने पत्रकार का मोबाईल छीनने का प्रयास किया और उन्हें डराया-धमकाया। हद तो तब हो गई जब पत्रकारों ने वहां से निकलने की कोशिश की तो इन दबंगों ने अपने बोलेरो वाहन से उनका पीछा कर उन्हें डराने और बड़ी दुर्घटना को अंजाम देने की कोशिश की। पत्रकारों को इन्होंने हानि पहुँचाने का भरसक प्रयास किया।
प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठते सवाल :
वहीँ ग्राम पंचायत कुरूद में महानदी से ट्रैक्टरों के जरिए दिन-रात रेत निकालकर डंप की जा रही है, जिसे बाद में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। हैरानी की बात यह है कि खनिज विभाग की कुंभकर्णी नींद और निष्क्रियता के चलते रेत माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। खनिज विभाग की सुस्ती को देखते हुए राजस्व विभाग भी उचित कार्यवाही करने से अपने हाथ पीछे खींच रहा है। प्रशासन की इसी ढील का फायदा उठाकर जनप्रतिनिधि खुलेआम शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। वहीँ इस घालमेल में खनिज विभाग की मिलीभगत का भी अंदेशा जताया गया है। हालाँकि इन बातों से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।
शासन-प्रशासन को आईना दिखा रहे रेत माफिया और जनप्रतिनिधि :
यह घटना न केवल शासन के ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर सवाल खड़ा करती है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कुरूद में कानून का डर खत्म हो चुका है। यदि समय रहते इन दबंग जनप्रतिनिधियों और रेत माफियाओं पर नकेल नहीं कसी गई तो यह क्षेत्र न केवल पर्यावरण की दृष्टि से बल्कि कानून-व्यवस्था के लिहाज से भी हाथ से निकल जायेगा। वहीँ अधिकांश अवैध कार्यों में नेताओं का बैक सपोर्ट जरुर पाया गया है।



