‘सर तन से जुदा’ के नारे पर भड़के हाईकोर्ट ने रेहान की जमानत याचिका पर लगाई फटकार और दी नसीहत।

बरेली (उ.प्र.) : देशभर में सर तन से जुदा नारों को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई है। मामला है उत्तर प्रदेश के बरेली में 6 सितंबर को I Love Muhammad अभियान के तहत मौलाना तौकीर रज़ा ने प्रदर्शन का आह्वान किया था। इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और मुस्लिम समाज में हिंसक झड़प हो गई थी, वहीँ इस मामले में दर्जनों मुस्लिम युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने हिंसा के बाद ताबड़तोड़ कार्यवाही की थी और लगभग 81 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था, जिसके बाद बरेली हिंसा में गिरफ्तार हुये आरोपी रेहान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दायर करके रिहाई की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने रिहा करने से इंकार कर दिया है। बरेली हिंसा को लेकर काफी बवाल हुआ था।

वहीँ अब बरेली हिंसा के आरोपियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका मिला है। यहाँ हाईकोर्ट ने बवाल के आरोपी रेहान की याचिका को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले पर बड़ी टिप्पणी की है। दरअसल बरेली में I Love Muhammad अभियान के तहत हुए प्रदर्शन में कथित तौर पर “गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा सर तन से जुदा” जैसे नारे लगाए गए थे।

इस नारे पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह नारा भारत की संप्रभुता को चुनौती देने वाला है। हाईकोर्ट ने कहा यह कानून के अधिकार के साथ ही भारत की अखंडता के लिए भी चुनौती है, क्योंकि यह नारा हथियारबंद विद्रोह के लिए लोगों को उकसाता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि यह नारा संविधान के साथ-साथ इस्लाम के शिक्षाओं के भी खिलाफ है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले पर मौलाना साजिद रशीदी ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जो लोग सर तन से जुदा करने की बात करते हैं यह नारा हिंदुस्तान में नफरत फैलाने के लिए है। उन्होंने आगे कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है यह देश संविधान से चलता है शरिया से नहीं चलता है, इसलिए जहां पर शरियत का कानून नाफीस ना हो संविधान और कानून से देश चलता हो वहां इस तरह के नारे लगाना बिल्कुल गलत हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि यह भी सोचना चाहिए कि इस देश के अंदर ईशनिंदा कानून है उसकी मांग की जाए कि जो भी इस तरह की हरकत करें जो भी नबी की शान में गुस्ताखी करें उसको कानून के मुताबिक सजा दी जाये।