फिर भड़का धर्मांतरण विवाद, ग्रामीणों ने धर्मांतरित लोगों के घरों में की तोड़फोड़, मामले में फिर खड़ा हुआ बवाल।

कांकेर : जिले में धर्मांतरण को लेकर लगातार तनाव और हिंसा की घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है, मिशनरियों द्वारा लालच और बीमारी ठीक करने के नाम पर जबरन करवाया गया धर्मान्तरण अब आदिवासियों के बीच में ही विवाद खड़ा कर रहा है, मूल आदिवासी और धर्मान्तरित आदिवासी अब आपस में ही लड़ने लगे है। वहीँ अब फिर से कांकेर जिले से लगभग 30 किलोमीटर दूर पुसागांव क्षेत्र में धर्मांतरित लोगों के घरों में ग्रामीणों ने तोड़फोड़ की गई है। इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एतिहातन गांव में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों ने लगभग 10 घरों में प्रवेश कर लाठी-डंडों से तोड़फोड़ की है। मामले में स्थानीय लोगों का आरोप है कि ये कार्यवाही उन धर्मांतरित परिवारों के खिलाफ की गई है, जिन्होंने अपने मूल धर्म में लौटने से इंकार कर दिया था और अन्य लोगों को भी इसाई धर्म अपनाने के लिये प्रेरित कर रहे थे। ग्रामीणों ने पहले इन परिवारों के साथ बैठक की और उन्हें अपने मूल धर्म में लौटने के लिए कहा था, लेकिन जब यह प्रयास असफल रहा, तो उन्होंने घरों में तोड़फोड़ कर दी।

इस घटना के बाद से गांव में तनाव व्याप्त हो गया है। वहीँ इस मामले में ग्रामीणों और धर्मांतरित परिवारों के बीच न केवल शब्दों का विवाद हुआ बल्कि हिंसक घटनाओं का डर भी बढ़ गया है, जिससे अब धर्मान्तरित परिवार दहशत के साय में जीने को मजबूर है। इस दौरान कई घरों में हुए नुकसान का वीडियो सामने आया, जिसने स्थानीय माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

इस घटना के बाद सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है। स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरी सतर्कता बरती जा रही है। इस घटना के साथ ही कांकेर जिले में धर्मांतरण को लेकर उपजे विवाद ने क्षेत्र में सामाजिक तनाव को और बढ़ा दिया है। पिछले कुछ हफ्तों में बड़े तेवड़ा और आमाबेड़ा गांव में हुई हिंसक झड़पों के बाद अब पुसागांव की घटना ने प्रशासन के लिए चुनौती और बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों को शांत करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बाद आमाबेड़ा जाने वाले रास्तों को बंद कर दिया गया है।