9.7 टन जब्त नकली पनीर किया गया नष्ट, फिर बेख़ौफ़ बेचा जा रहा सफ़ेद जहर, सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़।

रायपुर : बढ़ती जनसँख्या के साथ खाद्य पदार्थों की मांग की पूर्ति कहाँ से होगी? यह एक सामान्य सवाल है, ऐसे में जहाँ हर चीज की कमी है, तो वहां कुछ मुनाफाखोर बाजार में नकली उत्पादों को उपलब्ध करवा रहे है, जो सेहत के लिए काफी हानिकारक है। वहीँ लगातार कार्यवाही के बाद भी खाद्य सुरक्षा को खुलेआम चुनौती देते हुए जिले में नकली पनीर और खोवा का गोरखधंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। कार्यवाही, जब्ती और केस दर्ज होने के बावजूद आरोपी बेखौफ हैं और लगातार नकली खाद्य पदार्थ बेच रहे है। हैरानी की बात यह है कि जिन जगहों से पहले नकली पनीर पकड़ा गया, वहीं दोबारा फैक्ट्री चलती मिली है। यह हालात प्रशासनिक सख्ती की हकीकत उजागर कर रहे हैं। वहीँ सवाल उठता है कि क्या इसमें अधिकारियों की भी मिलीभगत है?

खाद्य एवं औषधि प्रशासन के मुताबिक वर्ष 2025 में मिलावटी पनीर, खोवा और मिठाई बेचने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया है। इस दौरान 35 स्थानों से पनीर के नमूने लिए गये है, जिनमें बड़ी मात्रा में अमानक और एनालाग पनीर पाया गया है। बीते वर्ष राजधानी में सैकड़ों टन नकली पनीर पकड़ा गया है, वहीँ लगातार छापामार कार्यवाही में 9,700 किलो नकली पनीर, पनीर और खोवा जब्त कर नष्ट किया गया है, जबकि पिछली बार भाटागांव में पकड़ा गया पनीर कालीबाड़ी में रखा गया था, जिसको बाद में लौटाने की जानकारी भी सामने आई थी, यह खबर विश्वस्त सूत्रों से मिली थी। वहीँ 10 मामलों को कोर्ट में पेश किया गया है, लेकिन फैसला लंबित होने का फायदा उठाकर आरोपी फिर से सक्रिय हो गए हैं और अपने कार्यों को अंजाम दे रहे है।

भाठागांव में फिर बेनकाब फैक्ट्री :

वहीँ बुधवार को खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने वार्ड-64 भाठागांव स्थित केएलपी डेयरी एवं मिल्क प्रोडक्ट पर छापा मारा। यहां आउटर क्षेत्र में गोदाम बनाकर बड़े पैमाने पर नकली पनीर बनाया जा रहा था। टीम ने मौके से 1,700 किलो नकली पनीर जब्त किया है, जिसकी बाजार कीमत करीब 4.76 लाख रुपये बताई जा रही है। लूज पनीर का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। अफसरों का कहना है कि लैब रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों पर कड़ी कार्यवाही की जायेगी। इसके साथ ही आपको बता दें की बड़ी-बड़ी रेस्तरां में नकली पनीर से ही खाद्य पदार्थ बनाये जा रहे है।

कागजों में सख्ती, जमीन पर ढिलाई :

इधर लगातार कार्यवाही के दावों के बावजूद फैक्ट्री सील होने के बाद भी दोबारा चालू हो जा रही है। बता दें कि पनीर के सभी प्रकरणों को एडीएम कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। मिलावट माफिया को आपत्ति करने का मौका देकर सैंपल की पुन: जांच कराई जा रही है। वहीँ विश्वस्त सूत्रों ने बताया है कि इसमें किसी किसी मामले में अधिकारियों की सांठगाँठ भी होती है, जिसके कारण ये बेख़ौफ़ रहते है। राजधानी के टिकरापारा में भी नकली पनीर की फैक्ट्री लम्बे समय से चल रही है, फिर भी वहां अब तक कार्यवाही नहीं हुई है।

जनता से अपील :

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि खाद्य पदार्थ से जुड़ी किसी भी तरह की शिकायत या संदिग्ध गतिविधि की सूचना खाद्य विभाग को दें, ताकि नकली खाद्य सामग्री पर तुरंत कार्यवाही की जा सके। स्पष्ट है कि नकली पनीर का यह धंधा केवल कानून नहीं, आमजन की सेहत पर सीधा हमला है।

इन फैक्ट्रियों में हुई कार्रवाई, कारोबार चालू :

एसजे डेयरी निमोरा से 4,450 किलो पनीर जब्त।
काशी एग्रो फूड बिरगांव से 500 किलो एनालाग पनीर बरामद।
विवान फूड प्रोफेसर कालोनी से 500 किलो पनीर जब्त किया गया।
दित्य डेयरी से 300 किलो पनीर अमानक पाया गया।
गोपी डेयरी एंड स्वीट्स, बोरियाखुर्द, 900 किलो खोवा, कलाकंद और बर्फी जब्त।
बंसल डेयरी भाठागांव 500 किलो स्किम्ड मिल्क से बना नकली पनीर बनाने की पुष्टि हुई थी।

अधिकारियों का क्या कहना :

विनोद कुमार गुप्ता, अभिहित अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग का कहना है कि “उक्त प्रकरणों से संबंधित 10 प्रकरण न्यायालय में प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जो वर्तमान में विचाराधीन हैं। आगे भी कार्यवाही जारी रहेगी।”