भाजपा के साथ मिलकर लड़ा था चुनाव, अब राज ठाकरे के साथ मिलकर महापौर बनायेंगे एकनाथ शिंदे, भाजपा को मिला बड़ा झटका?

मुंबई (महाराष्ट्र) : यह खबर खासकर उन लोगों के लिए है जो राजनीति में रूचि रखते है और नेता बनने की सोचते है। राजनीति चाहे देश की हो या विश्व की हर समय कोई दोस्त नहीं होता और हर समय कोई दुश्मन नहीं होता। वहीँ अब जहाँ मुंबई के महापौर को लेकर भले ही देशभर में चर्चा चल रही हो, लेकिन कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना द्वारा एकनाथ शिंदे की शिवसेना पार्टी को समर्थन देकर पूरा समीकरण बदल दिया है। यहाँ राज ठाकरे के इस कदम से शिवसेना (UBT) और MNS के बीच भले ही असहजता बढ़ी हो, लेकिन दोनों पार्टियों के रिश्ते नहीं टूटे हैं। 

KDMC का बदला समीकरण :

अब राज ठाकरे की पार्टी MNS और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के गठबंधन से कल्याण-डोंबिवली नगर निगम का समीकरण पूरी तरह से बदल गया है। इस नगर निगम में 122 सीटें हैं, जिनमें से शिंदे गुट ने 53, भाजपा ने 50, वहीँ उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 11 और राज ठाकरे की पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की है। यहाँ भाजपा और शिंदे गुट ने मिलकर चुनाव लड़ा था, जो अब भाजपा के लिए बड़ा झटका साबित हो गया। 

शिंदे गुट का बनेगा महापौर :

लॉटरी के अनुसार यहां पर महापौर अनुसूचित जनजाति (ST) का बनेगा। वहीं भाजपा के पास कोई भी एसटी पार्षद नहीं है, ऐसे में अब शिंदे गुट का महापौर बनने की संभावना चल रही है। इस मामले में सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम चुनाव से पहले ही शुरू हो गया था। नामांकन से पहले भाजपा ने एमएनएस के कई संभावित उम्मीदवारों को अपने पाले में कर लिया था, जिससे राज ठाकरे की पार्टी कई वार्डों में उम्मीदवार तक खड़े नहीं कर पा रही थी।

उधर, भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सीट बंटवारे में कई शिवसेना के नेताओं को टिकट नहीं मिला। ऐसे नेताओं को एमएनएस ने अपने उम्मीदवार के रूप में उतार दिया था। वहीँ चुनाव प्रचार के दौरान शिवसेना (शिंदे गुट) ने इन उम्मीदवारों को कार्यकर्ताओं और संगठनात्मक समर्थन दिया, जिसका सीधा असर नतीजों पर पड़ा।

नतीजों के बाद बदला समीकरण :

चुनाव के बाद एमएनएस के पांच में से चार पार्षद शिवसेना के संपर्क में आ गए थे, जबकि भाजपा भी उन्हें तोड़ने की कोशिश में थी। शिवसेना नेता राजेश कदम के मुताबिक, इनमें से तीन पार्षद पहले शिवसेना में रह चुके थे और वापस लौटना चाहते थे। एक अन्य पार्षद को भी भाजपा के खिलाफ चुनाव में शिवसेना का समर्थन मिला था, जिससे वह शिंदे गुट के करीब था, ऐसे में राजनैतिक गुणा भाग कब बदल गया ये भाजपा को समझ ही नहीं आया। अब महापौर कौन बनेगा? इसका इंतजार करना होगा।