राकेश डेंगवानी/रायपुर : छूट्टी का दिन आता है, लोगों का समय नहीं कटता ऐसे में कहाँ जायें, ये बड़ा सवाल खड़ा होता है, छत्तीसगढ़ की प्रकृति सर्दियों के मौसम में सबसे बेहतर होती है। यहाँ हरी-भरी हरियाली, झरने और जंगल बहुत खूबसूरत लगते हैं। अगर आप जनवरी की छुट्टियों में परिवार या दोस्तों के साथ सप्ताह के अंत में कहीं घूमने की योजना बना रहे हैं, तो धमतरी में गंगरेल बाँध और रायपुर के पास घटारानी सबसे अच्छे विकल्प हो सकते हैं। ये जगहें न सिर्फ प्राकृतिक खूबसूरती से भरी हुई हैं, बल्कि वॉटर स्पोर्ट्स, पिकनिक और फोटोग्राफी के लिए भी बहुत अच्छी हैं। यहां आपको हरी-भरी हरियाली, झरने, वॉटर स्पोर्ट्स, पिकनिक और फोटोग्राफी के मौके मिलेंगे। आप घूमने-फिरने, खाने-पीने के साथ-साथ खूब मस्ती भी कर सकते हैं। यहाँ पिकनिक मनाना आपके लिये बहुत बेहतर हो सकता है।
जतमई-घटारानी, गरियाबंद :
राजधानी से लगभग 85 किलोमीटर दूर जतमई मंदिर गरियाबंद जिले के दक्षिणी हिस्से में मौजूद एक बड़ी धार्मिक जगह है। यह मंदिर हिंदू देवी दुर्गा के एक रूप, जतमई माता को समर्पित है। यह एक धार्मिक और टूरिस्ट जगह के तौर पर प्रसिद्द है। मंदिर के बहुत पास एक झरना बहता है। जंगलों से घिरे मंदिर और बहते सफेद पानी का नज़ारा मन और आंखों को बहुत अच्छा लगता है। यह राजधानी के लोगों के बीच खासी लोकप्रिय जगह है।
डोंगरगढ़ माँ बमलेश्वरी मंदिर :
छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा प्रसिद्द मंदिर है माँ बमलेश्वरी का जो राजधानी रायपुर से 110 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह डोंगरगढ़ का माँ बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के धर्म नगरी राजनांदगांव जिले में स्थित एक प्रसिद्ध शक्तिपीठ है, जो राजनांदगांव से 35 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़ियों में स्थित है, यह 1,600 फीट ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। यह 2,200 साल से अधिक पुराना मंदिर राजा वीरसेन द्वारा स्थापित माना जाता है। यहाँ नवरात्रि के दौरान यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मुख्य मंदिर (बड़ी बम्लेश्वरी) के अलावा, नीचे एक और मंदिर (छोटी बम्लेश्वरी) भी है, जहाँ दर्शन के लिए रोपवे (केबल कार) की भी सुविधा उपलब्ध है। नीचे जो छोटी बमलेश्वरी माता का मन्दिर बना हुआ है, वहां भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दर्शन कर चुके है।
गंगरेल बांध, धमतरी :
राजधानी से 75 किलोमीटर दूर धमतरी के गंगरेल डैम को टूरिज्म के लिए बहुत खूबसूरती से विकसित किया गया है। इसमें एक सुंदर गार्डन है। आगंतुकों को यहाँ समुद्र किनारे का अनुभव देने के लिए, लगभग एक किलोमीटर तक फैला एक आर्टिफिशियल बीच बनाया गया है। यह एक ऐसी जगह है जहाँ परिवार और दोस्त बाहर का मज़ा ले सकते हैं। यहाँ बेहतर गार्डन और अंगार मोती माता का मंदिर भी है।
ओना-कोना, बालोद :
यहां कई एडवेंचर एक्टिविटीज़ उपलब्ध हैं, जिनमें कमांडो नेट, रोप लाइनिंग, ज़िप लाइनिंग, वॉटर साइकलिंग, कयाक, पैरासेलिंग और ऑक्टेन शामिल हैं। बोटिंग के ऑप्शन 50 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक हैं। यह मंदिर अभी बन रहा है, लेकिन सोशल मीडिया फोटो शूट के लिए यह एक खूबसूरत जगह है। छत्तीसगढ़ के एक कोने में स्थित यह शानदार मंदिर NH-30 जगदलपुर रोड पर बालोद जिले से लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूर है। इसे गंगरेल का आखिरी पॉइंट भी माना जाता है। यहाँ आप बेहतर तरीके से पिकनिक का आनंद ले सकते है।
चिल्फी घाटी, भोरमदेव :
छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश का बॉर्डर क्षेत्र है, यहाँ चिल्फी घाटी और भोरमदेव छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में मौजूद दो खास टूरिस्ट जगहें हैं, जिनकी आपस की दूरी 11 किलोमीटर है। चिल्फी वैली अपनी कुदरती खूबसूरती और हरे-भरे नज़ारों के लिए जानी जाती है, जबकि भोरमदेव मंदिर अपने ऐतिहासिक और आर्कियोलॉजिकल महत्व के लिए मशहूर है। यह वैली कवर्धा जिले में मैकल पहाड़ों की रेंज में है। बारिश के मौसम में इस वैली से गाड़ी चलाना एक पॉपुलर अनुभव है। इस रास्ते पर रानी-धारा झरने देखे जा सकते हैं। यह राजधानी रायपुर से 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
बारनवापारा, बलौदाबाजार :
यहां की हरियाली और हरे-भरे जंगल वाले इलाके से होकर ड्राइव करना मन को सुकून देगा। हालांकि यहां एक वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी है, लेकिन मानसून में यह बंद रहता है। फिर भी, आप यहां की कुदरती हरियाली और शांत माहौल का मज़ा ले सकते हैं। इस इलाके में कुछ रिसॉर्ट हैं जहां आप एक रात रुक सकते हैं। रायपुर लौटते समय खिड़की से जंगली जानवरों को भी देख सकते हैं। मैनपाट में झरनों और कई दूसरी खूबसूरत जगहों के साथ-साथ ताऊ की फसल भी लोगों को अपनी ओर खींचती है। तिब्बती समुदाय के कैंप भी देखने लायक हैं। सात अलग-अलग तिब्बती कैंपों में शांति के झंडे हवा में लहराते हैं, जो एक खास शांति देते हैं। बौद्ध मठ और मंदिर भी हमेशा घूमने के लिए खुले रहते हैं। यह राजधानी से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
मैनपाट सरगुजा :
मैनपाट में यहां भी घूम सकते हैं – उल्टा पानी : यहां ग्रेविटी का नियम फेल होता दिखता है। सड़क पर मैग्नेटिक असर की वजह से चार पहिया वाहन और पानी ढलान से नीचे लुढ़कने के बजाय ऊपर की ओर जाने लगते हैं।
दलदल : छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, हर तरह के लोग दलदल में कूदते-खेलते हैं। यहां की धरती हिलती है। धरती झूले की तरह हिलने लगती है। घने साल के जंगलों के बीच यह दलदल मैनपाट के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इसके अलावा, टाइगर पॉइंट, फिश पॉइंट, परपतिया, तिब्बती मठ मंदिर, तिब्बती कैंप, मेहता पॉइंट, टांगीनाथ मंदिर मुख्य टूरिस्ट सेंटर हैं। सड़क से मैनपाट पहुंचने के लिए गाड़ियों को इसी घाटी से होकर गुजरना पड़ता है।
चित्रकोट जलप्रपात :
इस झरने का आकार घोड़े की नाल जैसा है। यहां इंद्रावती नदी का पानी करीब 90 फीट की ऊंचाई से गिरता है। बारिश के मौसम में 7 से ज़्यादा धाराएं नीचे गिरती हैं। सर्दियों और गर्मियों में 2 से 3 धाराएं नीचे गिरती हैं। इस झरने के नीचे, चट्टानों के बीच एक छोटी सी गुफा में एक शिवलिंग है। यहाँ साल भर झरने से गिरने वाले पानी से शिवलिंग का अभिषेक होता है। कहा जाता है कि यहां नाव वाले भोलेनाथ की पूजा करते हैं। हालांकि, बारिश के मौसम में शिवलिंग तक नहीं पहुंचा जा सकता। गर्मियों और सर्दियों में नाव वाले टूरिस्ट के कहने पर ही उन्हें शिवलिंग के दर्शन कराते हैं। यह राजधानी से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।



