जोन अध्यक्ष सचिन मेघानी को हटाने की मांग, महापौर को सौंपा गया आवेदन।

रायपुर : सचिन मेघानी 6 साल पहले भी चुनाव हर चुके है वहीँ अब बीते निगम चुनाव में उन्होंने दूसरे वार्ड से बड़ी बढ़त ली है, अब सामने आया मामला है, जिसके अनुसार सचिन मेघानी के विरोध में भाजपा के पार्षदों ने अपना मोर्चा खोल दिया है। अब रायपुर नगर निगम के जोन-10 में भाजपा के भीतर सियासी टकराव खुलकर सामने आ गया है। जोन के 6 भाजपा पार्षद अपने ही जोन अध्यक्ष सचिन मेघानी को हटाने की मांग पर अड़े हुए हैं। पिछले 15 दिनों में पार्षदों ने महापौर मीनल चौबे से तीन बार मुलाकात कर लिखित शिकायत सौंपी गई है।

यह मामला अब केवल नगर निगम तक सीमित नहीं रहा है। बल्कि पार्षदों ने भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर, सभापति सूर्यकांत राठौड़, सांसद बृजमोहन अग्रवाल और स्थानीय विधायक के सामने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है’। इस मामले को लेकर बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर करीब 2 घंटे तक चर्चा हुई।

महिला पार्षदों सहित सभी पार्षदों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया तो वे जोन-10 कार्यालय में तालाबंदी कर धरने पर बैठेंगे। जिसके बाद सचिन मेघानी के लिये मुश्किलें खड़ी हो गई है।

MIC बैठक के बाद गरमाया मामला :

मेयर इन काउंसिल की बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में जब महापौर मीनल चौबे से इस विवाद को लेकर सवाल पूछा गया, तब उन्होंने स्वीकार किया कि पार्षदों की शिकायत मिली है। महापौर ने कहा कि सभी पक्षों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद आगे का निर्णय लिया जायेगा। इस मामले में पार्षदों का आरोप है कि जोन अध्यक्ष सचिन मेघानी दूसरे वार्डों के कार्यों में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं। इससे पार्षदों के बीच समन्वय प्रभावित हो रहा है और विकास कार्यों पर भी असर पड़ रहा है, जो जनहित के लिये अनुचित है। वहीँ सभी नेताओं को सौंपे गए पत्र में पार्षदों ने लिखा गया है कि जोन अध्यक्ष की कार्यशैली को लेकर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

‘सेटलमेंट’ के नाम पर परेशान करने का आरोप :

पार्षदों ने आरोप लगाया है कि जोन क्षेत्र में कुछ युवक निर्माणाधीन मकानों और दुकानों की तस्वीरें लेकर लोगों को जोन कार्यालय बुलाते हैं। आरोप है कि “सेटलमेंट” के नाम पर लोगों को परेशान किया जाता है। पार्षदों का कहना है कि छोटे और गरीब मकान मालिक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। जोन अध्यक्ष पर अवैध कब्जों और निर्माण मामलों में हस्तक्षेप के आरोप भी लगाए गए हैं। पार्षदों ने बोरियाकला स्थित गजराज तालाब के पास बने एक कथित अवैध अस्पताल का मामला उठाया है। इसमें उनका आरोप है कि निगम की कार्यवाही शुरू होने के बाद विरोध के चलते टीम को लौटना पड़ा।

‘सेटलमेंट’ के नाम पर परेशान करने का आरोप :

पार्षदों ने आरोप लगाया कि जोन क्षेत्र में कुछ युवक निर्माणाधीन मकानों और दुकानों की तस्वीरें लेकर लोगों को जोन कार्यालय बुलाते हैं। आरोप है कि “सेटलमेंट” के नाम पर लोगों को परेशान किया जाता है। पार्षदों का कहना है कि छोटे और गरीब मकान मालिक भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। जिसको लेकर अब स्थानीय पार्षदों में काफी रोष बढ़ता जा रहा है।

सचिन मेघानी बोले – गलतफहमी है, अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही जारी रहेगी :

आरोपों पर जोन अध्यक्ष सचिन मेघानी ने कहा है कि वे संगठन का दायित्व निभा रहे हैं और उनकी प्राथमिकता निगम क्षेत्र में अवैध निर्माण रोकना है। उन्होंने कहा कि निर्माण होने के बाद लोगों को परेशानी होती है, इसलिए शिकायत मिलने पर कार्यवाही के लिए भेजा जाता है। जिसको लेकर सचिन मेघानी ने कहा, “मेरे वार्ड की भी शिकायतें आती हैं। जिन्होंने शिकायत की है, उन्हें शायद कोई गलतफहमी है। हम सभी एक हैं। आगे सिर्फ अवैध निर्माण ही नहीं, बल्कि टीएनसी के प्रोजेक्ट्स पर भी फोकस रहेगा।”

BJP संगठन के लिए चुनौती बना विवाद :

जोन-10 का यह विवाद अब भाजपा संगठन के लिए भी चुनौती बनता दिख रहा है। मामला सिर्फ निगम प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर स्थानीय स्तर पर बढ़ते असंतोष और शक्ति संतुलन की लड़ाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। वहीँ सचिन मेघानी को हटाने पर सिन्धी समाज ने भी आन्दोलन की चेतावनी दी है। आरोप है कि सचिन को राजनैतिक साजिश के तहत हटाये जाने की तैयारी है।