दुर्ग/भिलाई : जिले से एक इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ जिला अस्पताल में इलाज के दौरान एक 20 साल की युवती की मौत हो गई है। परिजनों के मुताबिक युवती के शरीर में खून की भारी कमी थी, इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने उसे एक यूनिट ब्लड तक नहीं दिया, जिसके लिये माँ गिड़गिड़ाती। समय पर खून न मिलने के कारण उसकी जान चली गई। युवती के परिजन ब्लड बैंक भी गये थे। लेकिन वहां कार्यरत स्टाफ ने खून देने के लिए पर्ची और एक ब्लड डोनर लाने को कहा था, लेकिन परेशान परिजनों को रक्त नहीं मिल पाया।
सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी युवती :
अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, युवती सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी और उसका इलाज चल रहा था। उसका ब्लड ग्रुप ओ-पॉजिटिव था और हीमोग्लोबिन घटकर करीब पांच ग्राम रह गया था। इस मामले में डॉक्टरों का यह भी मानना है कि अगर रिश्तेदारों के पास डोनर नहीं था, तो भी अस्पताल के स्टॉक से उसे कम से कम एक या दो यूनिट ब्लड दिया जा सकता था, जबकि ऐसा नहीं किया गया। इसके साथ ही आपको बता दें कि रक्त का एक माह तक प्रयोग नहीं होता तो उसे नालियों में बहा दिया जाता है, क्यूंकि एक माह बाद रक्त प्रयोग नहीं किया जा सकता, जबकि ओ पॉजिटिव एक सर्व सुलभ रक्त समूह है, जिसकी उपलब्धता बहुतायत में होती है।
रक्तदाता न होने पर नहीं मिला खून :
इस मामले में प्राप्त जानकारी के मुताबिक युवती का नाम दीपिका गाड़ा है, जो मरोदा भिलाई की रहने वाली थी। दीपिका कई दिनों से बीमार थी। उसके हाथ-पैर, कमर और पूरे शरीर में दर्द की शिकायत थी। तबीयत बिगड़ने पर शनिवार रात करीब 11 बजे उसे एम्बुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर में खून की मात्रा काफी कम है और तुरंत ब्लड चढ़ाने की जरूरत है। परिवार का आरोप है कि अस्पताल की ओर से तीन यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने के लिए कहा गया था। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे तुरंत रक्तडाता नहीं जुटा सके। उन्होंने अस्पताल स्टाफ और ब्लड बैंक से कम से कम एक यूनिट ब्लड देने की मांग की, ताकि इलाज शुरू हो सके, लेकिन उन्हें खून नहीं दिया गया, जिससे युवती की दुखद मौत हो गई।
मां गिड़गिड़ाती रही :
सोमवार शाम इलाज के दौरान दीपिका ने दम तोड़ दिया। रिश्तेदारों ने अस्पताल मैनेजमेंट पर लापरवाही का आरोप लगाया है। दीपिका की मां ने बताया कि डॉक्टरों ने कहा था कि उसकी ब्लड रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन का स्तर करीब पांच ग्राम था। उन्होंने कई बार अस्पताल स्टाफ से निवेदन किया था कि कम से कम एक यूनिट खून चढ़ा दिया जाये, बाकी की व्यवस्था वे बाद में कर लेंगे, लेकिन उनकी कोई मदद नहीं की गई, सभी संवेदनहीनता दिखाई।
सिविल सर्जन ने जताई एस्पिरेशन की आशंका :
इसके साथ ही सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने बताया कि युवती सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी और उसका इलाज चल रहा था। उन्होंने बताया कि दीपिका का ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव था और उसका हीमोग्लोबिन स्तर करीब पांच ग्राम था।
सीएस का कहना है कि मौत का कारण केवल खून की कमी होना जरूरी नहीं है। उन्होंने बताया कि आईसीयू के डॉक्टरों ने उन्हें आशंका जताई है कि युवती को एस्पिरेशन की समस्या भी हो सकती है। यानी खाना या कोई अन्य पदार्थ सांस की नली के रास्ते फेफड़ों में पहुंच गया हो, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत हुई हो। युवती की मौत सिकल सेल एनीमिया, एस्पिरेशन या किसी अन्य चिकित्सकीय कारण से भी हो सकती है। कारण का खुलासा पोस्टमार्टम के बाद ही हो पायेगा। सीएस ने बताया कि मामले की जांच के लिये टीम बनाई गई है l जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्यवाही की जायेगी।
जबकि मृतका की माँ गमगीन है, उसकी बेटी की मौत का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही है, ऐसे में उसे न्याय कौन देगा? ये बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। रक्त समूहों में ओ पॉजिटिव रक्त बड़ी ही आसानी से मिल जाता है, ऐसे में रक्त ना मिलने से यह मामला मानवता के खिलाफ है।



