रायपुर : ईडी ने 200 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है, जिसमें गोवा में 110 करोड़ का रिसॉर्ट, भाठागांव में 30 करोड़ की संपत्ति खरीदी गी थी, जिसके नगद का लेनदेन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल ने किया था। मामले में आगे जानकारी मिली है कि छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3200 करोड़ रुपए के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय(ईडी) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही की है। जांच एजेंसी ने शराब सिंडिकेट से जुड़े रसूखदारों की 200 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं।
अब इस कार्यवाही की सबसे बड़ी मछली बना है नॉर्थ गोवा का आलीशान ‘होटल वेस्टिन’, जिसे घोटाले की काली कमाई से करीब 110 करोड़ रुपए में खरीदा गया था। इसके अलावा भाठागांव की एक कॉलोनी ढेबर सिटी में 30 करोड़ की प्रॉपर्टी समेत अन्य संपत्तियां शामिल हैं। ईडी का दावा है कि शराब घोटाले के पैसों को इन संपत्तियों में निवेश किया गया था। यह निवेश सीधे न करके परिचितों के माध्यम से किया गयाइस नई कार्यवाही को मिलाकर ईडी अब तक इस महाघोटाले में 1000 करोड़ रुपए से अधिक की जायदाद कुर्क कर चुकी है।
ईडी ने कोर्ट में अपना छठा पूरक परिवाद भी पेश कर दिया है। इसमें भिलाई के रसूखदार शराब कारोबारियों समेत 4 नए चेहरों को आरोपी बनाया गया है। एजेंसी अब तक 89 लोगों को इस मामले में आरोपी बना चुकी है। इसमें आगे भी कार्यवाही जारी है।
घोटाले का पैसा गोवा, दिल्ली, मुंबई में निवेश :
ईडी ने शराब घोटाले में छठा पूरक परिवाद पेश किया है। इसमें भिलाई के कारोबारी विजय भाटिया, टी. भुवनेश्वर राव, प्रोबीर शर्मा और निखिल चंद्राकर को आरोपी बनाया गया है। दावा है कि इनका काम एक बड़े नेता का पैसा निवेश करना था। प्रोबीर शर्मा और भुवनेश्वर राव कारोबारी के करीबी थे। इनके पास घोटाले का पैसा आता था, जिसे अलग-अलग कंपनियों के नाम पर निवेश किया जाता था। विजय भाटिया ने एक कंपनी के जरिए मुनाफा कमाया, जबकि निखिल चंद्राकर को सिंडिकेट से जुड़ा करीबी बताया गया है। ऐसे में कई आरोपी अब सामने आ चुके है।
कमीशनखोरी के लिए बनाई तीन कंपनियां :
शराब में कमीशनखोरी के लिए भिलाई के कारोबारी ने ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर कंपनी खोली। इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50-60 प्रतिशत सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया जाता था। इन कंपनियों से जुड़ी 51 करोड़ रुपए की प्रॉपर्टी कुर्क की गई है। इस मामले में एजेंसियों ने पांच पूरक चार्जशीट दायर की हैं। उनमें बताया गया है कि किस तरह सिंडीकेट ने अपने मंसूबों को अंजाम दिया है। इसमें शुरुआत में 2164 करोड़ रूपये का घोटाला सामने आया था, जो अब 3200 करोड़ रूपये तक पहुंच गया है।
ऐसे हुआ है 3200 करोड़ का घोटाला :
- डिस्टलरी से डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर अवैध शराब सीधे दुकानों में छोड़ी गया। इसका पैसा शासन के खाते में जमा नहीं हुआ।
- डिस्टलरी की वैध शराब की हर पेटी में 75 से लेकर 150 रुपए तक कमीशन तय फिक्स था।
- बॉटलिंग से ट्रांसपोर्टिंग तक अलग से कमीशन था।
- सिंडीकेट ने शराब की सप्लाई के लिए नई पॉलिसी लाई। निजी कंपनियों को काम दिया। उन्हें 10% कमीशन दिया। इसमें 101.20 करोड़ रुपए का ओवरटाइम, 54 करोड़ का हॉलीडे पे, 12 करोड़ का बोनस और 15 करोड़ का सर्विस चार्ज घोटाला किया गया।
शेल कंपनी और सोसायटी में निवेश :
ईडी के अनुसार 2019 से 2023 के बीच शराब घोटाले को अंजाम देने के लिए अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अरुणपति त्रिपाठी ने सिंडिकेट बनाया था। इसमें दुबई भागा वांटेड विकास अग्रवाल ग्राउंड लेवल का फाइनेंशियल मैनेजर था। वह हर जिले से पैसा वसूलकर सीधे ढेबर तक पहुंचाता था। इन पैसों को ढेबर सिटी होम्स, शाइनिंग स्टार बिल्डकॉन, मूनलाइट रियल एस्टेट, स्वर्ण इंफ्राबिल्ड व जय गुरुदेव इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया गया। यहां 30 करोड़ से अधिक के प्लॉट खरीदे गये। अब ईडी सभी संपत्तियों को लगातार अटैच करने काम कर रही है।



