इस्लामाबाद (पाकिस्तान) : पाकिस्तान के हालात बद से बदतर हो चुके है, अब उसका संभलना मुश्किल हो चुका है, अब वहां खाने का सामान नहीं है और ना ही जरूरत की चीजें। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर एक बार फिर अशांति और हिंसा की चपेट में आ गया है। पाकिस्तान सरकार के फैसलों के खिलाफ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आये हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई है। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों तथा गोलीबारी में अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताये जा रहे हैं। हालात को देखते हुए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने 9 जून को पूरे पीओके में बंद का आह्वान किया है। वहीँ इससे हालात सुधरने वाले नहीं है।
चुनावी आरक्षण विवाद को बताया विरोध की बड़ी वजह :
इसकी मुख्य वजह आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। विवाद उस समय बढ़ गया जब विधानसभा की 45 सीटों में से 12 सीटें पाकिस्तान में रह रहे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया। JAAC और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अधिकांश लोग स्थानीय निवासी नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान सरकार इस व्यवस्था के जरिए पीओके की राजनीतिक स्वायत्तता को कमजोर कर क्षेत्र पर अपना नियंत्रण मजबूत करना चाहती है। जबकि मामले के अनुसार आरक्षण विवाद के अलावा क्षेत्र की बिगड़ती आर्थिक स्थिति भी लोगों के गुस्से का बड़ा कारण बन गई है। स्थानीय नागरिक पाकिस्तान सरकार पर प्रशासनिक विफलता, बेरोजगारी, महंगाई और विकास कार्यों की अनदेखी के आरोप लगा रहे हैं। यही वजह है कि विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं।
अस्पताल के बाहर शुरू हुई हिंसक झड़प :
रिपोर्टों के अनुसार तनाव उस समय बढ़ गया जब JAAC के नेता अपने एक कार्यकर्ता का शव लेने के लिए रावलकोट अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि सुरक्षा बलों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच टकराव शुरू हो गया। देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई और कई इलाकों में झड़पें फैल गईं।
गोलीबारी में पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी मारे गये :
सोमवार को हुई हिंसा में प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिस अधिकारी और एक नागरिक की मौत हो गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें छह प्रदर्शनकारियों के मारे जाने की पुष्टि की गई। स्थानीय प्रशासन के अनुसार कई अन्य लोग भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इससे पहले रविवार को हुई झड़पों में 23 पुलिसकर्मी और लगभग 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए थे, जबकि 30 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बढ़ती हिंसा को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान सरकार ने सेना और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी हैं। सरकार ने 5 जून को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध भी लगा दिया था। हालांकि संगठन ने साफ कहा है कि वह अपने अधिकारों के लिए आंदोलन जारी रखेगा।
इंटरनेट और मोबाईल सेवायें बंद :
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई क्षेत्रों में मोबाईल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी हैं। संचार सेवाएं बंद होने से आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को जल्द से जल्द क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी है।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी चिंता :
पीओके में लगातार बिगड़ते हालात पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा सलाह जारी करते हुए उन्हें प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने को कहा है। दोनों देशों ने चेतावनी दी है कि इलाके में संचार सेवाएं बाधित हैं और सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। इस हिंसा के बीच पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यदि राजनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
पाकिस्तान लाख कोशिशों के बावजूद PoK के लोगों की आवाज को दबा नहीं पा रहा है। केवल रावलकोट, मुजफ्फराबाद में ही प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं। लोगों पर हो रहे दमन चक्र की गूंज सात समंदर पार भी गूंज रही है। इंग्लैंड के ब्रेडफोर्ड में पाकिस्तान कंसुलेट के बाहर PoK के लोग बैनर पोस्टर को लेकर जुट गए और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। यही नहीं ब्रिटेन के 30 सांसदों ने PoK के लोगों पर हो रहे ज्यादतियों और जुल्मों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है।
भारत सरकार ने क्या कहा?
पीओके में जारी पाकिस्तानी बर्बरता पर भारत का बयान भी सामने आया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा- “इस संदर्भ में, हम पाकिस्तान की ओर से फर्जी खबरों और वीडियो का एक सिलसिला लगातार देख रहे हैं। यह अपनी विफलताओं को छिपाने और अपने मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने का पाकिस्तान का एक हताशा-पूर्ण प्रयास है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भीषण पुलिस बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके दुष्कर्मों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा।”



