झीरम घाटी नक्सली हमले में जगदलपुर NIA कोर्ट ने सभी 10 दोषियों को सुनाई फांसी की सज़ा, 29 लोगों की हुई थी खौफनाक हत्या।

जगदलपुर : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने वर्ष 2013 के बहुचर्चित झीरम घाटी माओवादी हमले के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी 10 दोषियों को मृत्युदंड (फांसी) की सज़ा सुनाई है। करीब 13 साल चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने शनिवार को इन सभी आरोपियों को दोषी करार दिया था। इस हमले में वरिष्ठ कांग्रेस नेता विद्याचरण शुक्ल और बस्तर टाइगर के नाम से जाने जाने वाले महेंद्र कर्मा समेत 29 लोगों की जान गई थी।

फैसले के प्रमुख बिंदु :

  • दोषियों में महिलाएं भी: सज़ा पाने वाले 10 नक्सलियों में 2 महिला नक्सली भी शामिल हैं।
  • 101 गवाहों के बयान: अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए।
  • लंबी न्यायिक प्रक्रिया: विशेष अदालत ने 5 सितंबर 2026 को सभी 10 अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सज़ा की मात्रा पर फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया है।

किन धाराओं के तहत तय हुई सज़ा अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता (IPC), गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA), आर्म्स एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की कई गंभीर धाराओं में दोषी पाया:

  • IPC: धारा 121, 121(A), 122 (देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), 396 (डकैती के दौरान हत्या), 397, 120(B) (आपराधिक साजिश), 147, 148, 149, 341 और 427।
  • UAPA: धारा 16, 18, 20, 38, 39 और 40।
  • अन्य अधिनियम: आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 4 और 5।

क्या था झीरम घाटी हत्याकांड 25 मई 2013 को बस्तर ज़िले के दरभा स्थित झीरम घाटी (NH-221) में कांग्रेस की ‘परिवर्तन यात्रा’ का काफ़िला गुज़र रहा था। प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के हथियारबंद कैडरों ने सुनियोजित तरीके से बारूदी सुरंग (IED) विस्फोट किया और फिर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। हमले में 24 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल 35 से अधिक लोगों में से 3 ने बाद में दम तोड़ दिया था। इस हमले ने छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की तत्कालीन शीर्ष पंक्ति को लगभग खत्म कर दिया था। नक्सली मृतकों और घायलों से हथियार, वॉकी-टॉकी और मोबाइल फोन भी लूट ले गए थे।

NIA की जांच में साजिश का पर्दाफाश NIA ने अपनी जांच में 39 आरोपियों के ख़िलाफ़ वर्ष 2014 और 2015 में चार्जशीट और सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी। जांच में स्पष्ट हुआ कि माओवादियों ने अपने ‘टैक्टिकल काउंटर ऑफेंसिव कैंपेन’ (TCOC) के तहत स्थानीय कमेटियों के साथ मिलकर कांग्रेस नेताओं और सुरक्षाकर्मियों के सफाए की आपराधिक साजिश रची थी। 10 गिरफ्तार आरोपियों का ट्रायल पूरा होने के बाद उन्हें मृत्युदंड मिला, जबकि एक आरोपी की न्यायिक हिरासत में मौत हो चुकी है।