आपूर्ति सामान्य होने के बाद भी नए घरेलू गैस कनेक्शन पर रोक बरकरार, एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर उपभोक्ता।

बलौदाबाजार : पश्चिम एशिया में शुरू हुए युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिसके बाद सरकार ने कई स्तरों पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। अब स्थिति में सुधार आने और गैस आपूर्ति धीरे-धीरे सामान्य होने के बावजूद नए घरेलू गैस कनेक्शन पर लगी रोक नहीं हटाई गई है। आपूर्ति सामान्य होने के बाद भी नए कनेक्शन बंद रहने से उन परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जिन्हें नए सिरे से रसोई गैस कनेक्शन की जरूरत है।

जिले भर में एचपी, इंडेन सहित विभिन्न पेट्रोलियम कंपनियों की करीब 50 छोटी-बड़ी गैस एजेंसियां संचालित हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नए कनेक्शन की उम्मीद लेकर उपभोक्ता लगातार इन एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कंपनियों या प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा है।

पोर्टल बंद, एजेंसियों में रजिस्टरों में दर्ज हो रहे आवेदन

नया घर बसाने वाले, संयुक्त परिवार से अलग होने वाले, नए मकानों में शिफ्ट हुए लोगों और बाहर से आकर किराए पर रहने वाले परिवारों के सामने खाना पकाने का गहरा संकट खड़ा हो गया है।

  • वर्तमान में नए घरेलू एलपीजी कनेक्शन के लिए आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल बंद है।
  • पोर्टल बंद होने के कारण गैस एजेंसियां केवल रजिस्टर में नाम-पते दर्ज कर औपचारिकता निभा रही हैं।
  • एजेंसियों में लंबित आवेदनों की कतार लगातार लंबी होती जा रही है, लेकिन प्रक्रिया कब से दोबारा शुरू होगी, इसे लेकर एजेंसी संचालक भी असमंजस में हैं।

कमर्शियल सिलेंडर का विकल्प, लेकिन आम बजट से बाहर

घरेलू कनेक्शन न मिलने की स्थिति में उपभोक्ताओं के सामने 10 किलो के गैर-सब्सिडी या कमर्शियल सिलेंडर का विकल्प रखा जा रहा है, लेकिन इसकी कीमतें आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं:

  • 10 किलो कमर्शियल सिलेंडर: रिफिलिंग खर्च लगभग ₹1,700
  • 5 किलो सिलेंडर: रिफिलिंग खर्च लगभग ₹850
  • 19 किलो भारी कमर्शियल सिलेंडर: रिफिलिंग खर्च लगभग ₹3,000

दैनिक घरेलू इस्तेमाल के लिए इन सिलेंडरों का उपयोग करना मध्यम और श्रमिक वर्ग के परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ रहा है।

पाइपलाइन नेटवर्क सीमित, एलपीजी ही एकमात्र सहारा

जिले में पाइपलाइन प्राकृतिक गैस (PNG) नेटवर्क का विस्तार अभी बेहद सीमित है और अधिकांश ग्रामीण व उपनगरीय इलाके इससे अछूते हैं। नतीजतन, अधिकांश आबादी पूरी तरह पारंपरिक एलपीजी सिलेंडरों पर ही आश्रित है।

जब गैस आपूर्ति की स्थिति सामान्य हो चुकी है, तो सरकार और संबंधित तेल कंपनियों को नए घरेलू कनेक्शन जारी करने पर लगी रोक तुरंत हटानी चाहिए। स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी न होने से उपभोक्ता एजेंसी से लेकर विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने को विवश हैं।