रायपुर : राजधानी में जानवरों के इलाज से जुड़ा एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां मात्र 2 किलो की एक बिल्ली ने 10 सेमी लंबा पेन निगल लिया। इलाज के लिए यहां-वहां भटकने के बाद बिल्ली के मालिक अंततः अवंति विहार स्थित चिकित्सालय पहुंचे। जिसके बाद बिल्ली की एंडोस्कोपी की गई। बिल्ली के मुंह से कैमरा अंदर की ओर डाला गया। फिर ग्रिप बनाकर पेन को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हादसे के तीन बाद बिल्ली को राहत मिल सकी। इस दौरान किसी तरह लिक्विट भोजन के जरिए उसे जीवित रखा गया। चिकित्सकों के अनुसार, अब बिल्ली की हालत स्थिर है। बिल्ली का डब्ल्यूबीसी अर्थात व्हाइट ब्लड सेल्स अत्यंत कम हो चुका है। इसे बनाए रखने के लिए उसे नियमित इंजेक्शन दिया जा रहा है।
अस्पताल ने फीस की राशि कैंसर पीड़ितों के लिए दी :
उसके जल्द पूरी तरह रिकवर होने की उम्मीद है। बिल्ली नर है और उसकी आयु मात्र 6 माह है। चिकित्सकों ने कहा, यह एक बहुत ही जटिल केस था, क्योंकि बिल्ली बहुत छोटी, थी और पेन का साइज बहुत बड़ा था। सटीक तरीके से कोशिश के बाद एंडोस्कोपी की मदद से निकाला गया। विशेष बात यह है कि जैन पर्व के उपलक्ष्य में अस्पताल प्रबंधन ने फीस की पूरी राशि कैंसर पीड़ितों के लिए काम करने वाले संस्था को मरीज द्वारा ही प्रदान करवाई।
रोड किनारे मिला था ‘तामा’ :
बिल्ली के मालिक मयंक त्रिपाठी ने बताया, यह बिल्ली अभनपुर में रोड किनारे लावारिस मिली थी। यह अपनी मां को खो चुकी थी। ऐसे में इसे वे अपने घर ले आए। उन्होंने इसका नाम ‘तामा’ रखा। यह एक जापानीज शब्द है, जिसका एक अर्थ मोती भी होता है। अभनपुर निवासी मयंक के अनुसार, बिल्ली ने उनके सामने ही खेलते हुए अचानक आधा पेन मुंह के अंदर डाल दिया। जब ने उसे निकालने के लिए गए तो उसने डर के कारण त्वरित प्रतिक्रिया में पूरा पेन ही निगल लिया।
एक्स-रे में दिखा सिर्फ ढक्कन :
चिकित्सक डॉ. पद्म जैन ने बताया, सिर्फ 2 किलो वजन की एक छोटी-सी बिल्ली द्वारा पूरा 10 सेंटीमीटर लंबा पेन निगल लेना हमारे लिए भी अविश्वसनीय था। हमने सबसे पहले इसका एक्स-रे किया। एक्स-रे में खाने की नली में एक मैटेलिक ऑब्जेक्ट अर्थात धातु दिखाई दे रहा था। पहली नजर में ऐसा लग रहा था कि शायद यह पेन का सिर्फ सामने वाला हिस्सा अर्थात ढक्कन है। इसलिए हमने निर्णय लिया कि, इसे एंडोस्कोपी के माध्यम से निकालने का प्रयास किया जाएगा।लेकिन जब हमने एंडोस्कोपी की, तो हम खुद भी आश्चर्यचकित रह गए। हमने इसे एंडोस्कोपी के माध्यम से ग्रिप बनाकर निकाला। इसके साथ ही टीम ने ऑपरेशन की भी पूरी तैयारी की थी। यदि किसी कारणवश एंडोस्कोपी सफल नहीं होती तो टीम ऑपरेशन करती, लेकिन बिल्ली की उम्र और वजन को देखते हुए इस विकल्प को बैकअप के रूप में रखा गया।



