धमतरी : जिले के प्रसिद्ध गंगरेल बांध के मनोरम तट पर बसे ग्राम ओन्हाकोना में सप्ताहांत के दौरान पर्यटकों और श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। प्राकृतिक सौंदर्य, घने वनों और अथाह जलराशि से घिरे इस क्षेत्र में दूर-दराज के जनपदों सहित पड़ोसी राज्यों से पहुंचे सैलानियों ने फुर्सत के पल बिताए। एक ओर जहां त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के तीन पवित्र पिंडों पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की, वहीं दूसरी ओर गंगरेल के विशाल जल क्षेत्र में साहसिक मोटर बोटिंग का लुत्फ उठाया। युवाओं और परिवारों ने अपने मोबाईल कैमरों से इस मनोरम दृश्य को कैद कर अपनी यात्रा को यादगार बनाया।
विस्थापन से आत्मनिर्भरता तक: बांध किनारे बसे ओन्हाकोना का ऐतिहासिक सफर :
धमतरी जिला मुख्यालय से लगभग 26 किलोमीटर की दूरी पर बस्तर मार्ग से करीब 5 किलोमीटर सघन वन क्षेत्र के भीतर ओन्हाकोना गांव स्थित है। गंगरेल बांध के अंतिम छोर पर बसा यह गांव कभी मुख्य डूब क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था। बांध निर्माण के समय अपने मूल घरों से विस्थापित हुए ग्रामीणों को तटवर्ती क्षेत्र में पुनर्वासित किया गया था। वर्तमान में यहां के ग्रामीण अपनी आजीविका चलाने के लिए पारंपरिक कृषि के साथ-साथ मत्स्यपालन और मत्स्याखेट पर निर्भर हैं।
हालाँकि, पर्यटन की अपार संभावनाओं के बावजूद बुनियादी ढांचे की कमी अब भी बनी हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गांव तक पहुंचने वाला संपर्क मार्ग आज भी कच्चा और पथरीला है। बरसात के मौसम में कीचड़ और गड्ढों के कारण आवागमन पूरी तरह ठप्प हो जाता है, जिससे ग्रामीणों के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों की मांग है कि सड़क पक्की करने की दिशा में शासन स्तर पर ठोस कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, ताकि सालभर इस पर्यटन स्थल तक पहुंच सुगम बनाई जा सके।
सुरक्षा मानकों के साथ 100 रुपये में बोटिंग का रोमांच :
ओन्हाकोना के शांत जल क्षेत्र में सैलानियों के लिए जलक्रीड़ा का विशेष आकर्षण उपलब्ध है। स्थानीय ग्राम समिति की देखरेख में बांध के किनारे लगभग 15 आधुनिक मोटर बोट्स का संचालन किया जा रहा है।
- किफायती दर: समिति द्वारा प्रति व्यक्ति मात्र 100 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
- सख्त सुरक्षा नियम: जलक्रीड़ा के दौरान किसी भी अनहोनी से बचने के लिए प्रत्येक पर्यटक को अनिवार्य रूप से लाइफ जैकेट पहनाई जाती है; सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने अथवा लाइफ जैकेट पहनने से इंकार करने पर किसी भी व्यक्ति को बोट में बैठने की अनुमति नहीं दी जाती।
- संचालन समय: बोट संचालक केशव मंडावी एवं श्रवण चालकी ने जानकारी दी कि बोटिंग का संचालन प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 से 6 बजे तक किया जाता है। रविवार और शासकीय अवकाश के दिनों में यहां पर्यटकों की भारी आवक दर्ज की जाती है।
गांव में प्रवेश की व्यवस्था को सुव्यवस्थित रखने के लिए ग्राम विकास समिति ने मुख्य मार्ग पर बैरियर स्थापित किया है, जहां दोपहिया वाहनों से 10 रुपये तथा चारपहिया वाहनों से 20 रुपये विकास शुल्क लिया जाता है। भविष्य में व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए शुल्क भुगतान को ऑनलाईन माध्यम से भी जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।
आस्था का प्रमुख केंद्र बना त्र्यंबकेश्वर मंदिर : अंतर्राज्यीय पर्यटकों का बढ़ता रुझान :
ओन्हाकोना स्थित त्र्यंबकेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण धमतरी नगर के धर्मप्रेमी तीरथ राज फूटान द्वारा कराया गया है। इस भव्य देवालय की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित भगवान भोलेनाथ के तीन अलौकिक पिंड हैं, जिनकी पूजा-अर्चना के लिए वर्षभर श्रद्धालु पहुंचते हैं।
चारों तरफ फैली हरियाली, शांत वातावरण और गंगरेल जलाशय के नीले जल का विहंगम दृश्य इस स्थल को एक आदर्श आध्यात्मिक एवं पर्यटन गंतव्य बनाता है। स्थानीय पर्यटकों के साथ-साथ अब अंतर्राज्यीय स्तर पर भी इस धार्मिक क्षेत्र की ख्याति तेजी से फैल रही है। प्रशासन यदि सड़क निर्माण और घाट विकास की दिशा में त्वरित कदम उठाता है, तो आने वाले समय में इसे राज्य के प्रमुख इको-टूरिज्म सर्किट के रूप में नई पहचान प्राप्त होगी और स्थानीय युवाओं के रोजगार के नए अवसरों में निरंतर वृद्धि दर्ज की जायेगी।



