शिमर्स क्लब का मालिक नीतिन मोटवानी उर्फ चीकू गिरफ्तार, लक्जरी क्लब की आड़ में चल रहा था ऐसा काम….।

रायपुर : राजधानी रायपुर में महादेव सट्टा एप के अवैध साम्राज्य के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कानूनी चोट की है। रायपुर पुलिस की एंटी क्राइम एंड साईबर यूनिट (ACCU) ने शनिवार को एक गोपनीय और रणनीतिक ऑपरेशन के तहत महादेव सट्टा एप के मुख्य प्रमोटर रवि उप्पल के खास सहयोगी नितिन मोटवानी उर्फ चीकू को धर दबोचा। आरोपी लंबे समय से कानून की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी शहर में लक्जरी क्लब की आड़ में करोड़ों रुपये के काले धन को सफेद करने और ऑनलाईन सट्टेबाजी के नेटवर्क का विस्तार करने में लगा हुआ था।

दुबई सिंडिकेट से सीधे तार और दिल्ली ब्रांच का मालिकाना हक :

केंद्रीय जांच एजेंसियों तथा राज्य पुलिस की संयुक्त पड़ताल में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ था कि नितिन मोटवानी और उसके सहयोगी सन्नी पृथवानी के पास महादेव एप के साथ-साथ ‘अन्ना रेड्डी’ सट्टा एप की पूरी दिल्ली ब्रांच का मालिकाना हक था। यह सिंडिकेट छत्तीसगढ़, दिल्ली और देश के कई प्रमुख क्षेत्र में अपना नेटवर्क फैला चुका था। जांच अधिकारियों के अनुसार, नितिन सीधे तौर पर महादेव एप के प्रमोटरों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के संपर्क में था और दुबई में बैठे सिंडिकेट से आने वाले डिजिटल निर्देशों के आधार पर काम करता था। इस अवैध धंधे में भारी मुनाफे को सुरक्षित करने और नेटवर्क को विस्तार देने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और हाई-एंड मोबाईल फोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा था। इस पूरे खेल से होने वाली अवैध काली कमाई को पुनः सट्टेबाजी के तंत्र को फैलाने में झोंक दिया जाता था, ताकि पूरे देश में इस नेटवर्क का संचालन निर्बाध गति से चलता रहे।

‘शिमर्स क्लब’ का सच : रवि उप्पल के काले धन का निवेश :

पड़ताल के दौरान एक और अहम पहलू सामने आया है, जो राजधानी के विधानसभा रोड स्थित चर्चित ‘शिमर्स क्लब’ से जुड़ा है। नितिन मोटवानी पूर्व में इसी क्लब का संचालन करता था, जिसे वर्तमान में किसी दूसरे व्यक्ति को किराए पर दे दिया गया है। पुलिस सूत्रों और खुफिया इनपुट के अनुसार, नितिन केवल नाममात्र का संचालक था, जबकि इस क्लब का असली वित्तीय मालिक महादेव एप का मुख्य प्रमोटर रवि उप्पल ही है। ऑनलाईन सट्टेबाजी से अर्जित की गई बेहिसाब दौलत को इस क्लब में निवेश किया गया था। पुलिस अब इस क्लब के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और बेनामी संपत्तियों के पूरे दस्तावेज खंगाल रही है। इसके तार कई बड़े रसूखदारों से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की कठोर मुकद्दमा प्रक्रिया और जब्ती की कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

तीन वर्ष पुराना आपराधिक इतिहास और लुकआउट सर्कुलर :

नितिन मोटवानी का आपराधिक रिकॉर्ड पुराना है। पंडरी थाना पुलिस ने तीन वर्ष पूर्व अगस्त के महीने में नितिन को बड़े पैमाने पर सट्टा संचालित करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालांकि, न्यायालय से जमानत मिलते ही आरोपी शातिराना अंदाज में देश छोड़कर सीधे दुबई भाग निकला। आरोपी के फरार होते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद रायपुर पुलिस ने उसके खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लुकआउट सर्कुलर (LOC) नोटिस जारी करवाने के लिए केंद्रीय विदेश मंत्रालय को औपचारिक पत्र भेजा था, जिससे उसकी हर विदेशी आवाजाही को ठप्प किया जा सके।

गोवा का ठिकाना, पुलिस की सोची-समझी अनदेखी और नाटकीय गिरफ्तारी :

हाल ही में संपन्न आईपीएल क्रिकेट मैचों के दौरान पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली थी कि आरोपी नितिन मोटवानी अपने घर में मौजूद है। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस टीम उसे गिरफ्तार करने पहुंची, लेकिन भनक लगते ही आरोपी पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। फरारी के दौरान उसने गोवा को अपना नया सुरक्षित ठिकाना बनाया। पुलिस को तकनीकी इनपुट के जरिए नितिन के गोवा से रायपुर निरंतर आवाजाही करने की पुख्ता जानकारी मिली।

इस बार साईबर विंग और क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ने के लिए एक विशेष मनोवैज्ञानिक चक्रव्यूह तैयार किया। पुलिस ने जानबूझकर उसकी गतिविधियों की अनदेखी करना शुरू कर दिया, जिससे आरोपी के मन में यह भरोसा बैठ गया कि पुलिस अब उसके विरुद्ध किसी तरह की नई कार्यवाही नहीं करेगी और मामला पूरी तरह ठंडा पड़ चुका है। पुलिस की इस रणनीति का नतीजा यह हुआ कि आरोपी पूरी तरह बेफिक्र हो गया।

बताया जा रहा है कि चार दिन पूर्व वह निश्चिंत होकर गोवा से रायपुर स्थित अपने घर लौटा था। जैसे ही क्राइम ब्रांच टीम को उसके घर में मौजूद होने की सटीक जानकारी मिली, टीम के सदस्य बिना किसी सायरन या आधिकारिक पुलिस वाहन के, अपनी निजी गाड़ियों में सवार होकर मौके पर पहुंचे। उन्होंने घर की चारों तरफ से मजबूत घेराबंदी की और नितिन को नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान उसने शुरू में संलिप्तता से इंकार करने की कोशिश की, किंतु तकनीकी साक्ष्यों के आगे उसकी एक न चली।

सिंडिकेट के अन्य सहयोगियों पर भी कसेगा शिकंजा :

गिरफ्तारी के उपरांत पुलिस आरोपी से उसके वित्तीय लेन-देन, विदेशी संपर्कों और बेनामी संपत्तियों के संबंध में गहन पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर से जुड़े अन्य सहयोगियों के नामों का पर्दाफाश भी बहुत जल्द सार्वजनिक किया जायेगा। आरोपी के खिलाफ पूर्व में दर्ज मुकद्दमा फाइलों को फिर से खोलते हुए नए साक्ष्यों को जोड़ा जा रहा है, जिससे इस अंतर्राज्यीय रैकेट की पूरी कमर तोड़ दी जाये। कानून के जानकारों का मानना है कि इस बार आरोपी के खिलाफ इतनी पुख्ता चार्जशीट तैयार की जायेगी कि अदालत से उसे किसी भी सूरत में राहत नहीं मिल सकेगी। इस पूरे सिंडिकेट से जुड़े अन्य फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए कई विशेष दल अन्य राज्यों के लिए भी रवाना किए जायेंगे।