रायपुर : आंबेडकर अस्पताल में 5 घंटे चली जटिल सर्जरी, डॉक्टरों ने बचाई गंभीर प्रसूता की जान।

रायपुर : राजधानी रायपुर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय के डॉक्टरों ने गंभीर प्रसूति जटिलता से जूझ रही एक 32 वर्षीय महिला को सुरक्षित बचा लिया। गर्भस्थ शिशु की मृत्यु और अत्यधिक रक्तस्राव के चलते महिला की जान पर गहरा संकट बना हुआ था। इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की महिला चिकित्सकों की टीम ने लगभग पांच घंटे तक जटिल सर्जरी की। मरीज को 10 यूनिट रक्त व रक्त घटक चढ़ाए गए और दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर गहन उपचार दिया गया। चिकित्सकों के अथक प्रयासों से महिला पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने परिवार के पास लौट गई है।

प्रसव के दौरान फट गई थी बच्चेदानी और मूत्राशय :

जानकारी के अनुसार, 32 वर्षीय महिला अपनी चौथी गर्भावस्था में थी। समय पूरा होने पर जब प्रसव पीड़ा शुरू हुई, तब परिजन उसे पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और फिर नजदीकी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इसी दौरान प्रसव के प्रयास में महिला की बच्चेदानी और मूत्राशय बुरी तरह फट गये। पेट के भीतर ही गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई और अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया। मरीज की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तत्काल आंबेडकर अस्पताल लाया गया।

5 घंटे चली आपातकालीन सर्जरी, निकालनी पड़ी बच्चेदानी :

मरीज की जान बचाने के लिये अस्पताल में तत्काल आपातकालीन सर्जरी की तैयारी की गई। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ज्योति जायसवाल के नेतृत्व में डॉ. नीलम सिंह, डॉ. अर्पणा वर्मा और डॉ. नीति गोसाई की टीम ने इस मैराथन सर्जरी को अंजाम दिया। गर्भाशय गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका था, जिसके चलते जान बचाने के लिये बच्चेदानी को निकालना पड़ा। सर्जरी विभाग की डॉ. प्राची के सहयोग से क्षतिग्रस्त मूत्राशय की मरम्मत की गई। निश्चेतना विभाग की डॉ. अमृता की टीम ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

10 यूनिट रक्त चढ़ाया, 48 घंटे वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद मिली नई जिंदगी :

सर्जरी के बाद मरीज को क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) में भर्ती कर वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। यहां डॉ. ओपी सुंदरानी की टीम की देखरेख में दो दिनों तक गहन चिकित्सा दी गई। अत्यधिक रक्त बह जाने के कारण मरीज को 10 यूनिट रक्त एवं रक्त घटक चढ़ाए गए। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग, निश्चेतना, क्रिटिकल केयर, सर्जरी, ब्लड बैंक और नर्सिंग स्टाफ के निरंतर समन्वय व सामूहिक प्रयासों से मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और वह पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने घर लौट गई।