अंबिकापुर/बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से लोक स्वास्थ्य तंत्र की संवेदनहीनता, चरम लापरवाही और मनमानी की एक अत्यंत व्यथित करने वाली घटना सामने आई है। राजपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम रेवतपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही एक गर्भवती महिला को ऐन वक्त पर बुनियादी चिकित्सकीय सहायता तक उपलब्ध नहीं हो सकी। अस्पताल के मुख्य द्वार से लेकर चिकित्सकों व कर्मचारियों के आवासों तक ताले लटके रहे, जिसके चलते असहनीय प्रसव पीड़ा से कराहती प्रसूता को अस्पताल के सामने सड़क पर खड़ी महतारी एक्सप्रेस (102) एम्बुलेंस में ही नवजात को जन्म देने के लिये विवश होना पड़ा।
चीख-पुकार के बीच बंद पड़े रहे अस्पताल के दरवाजे :
मंगलवार को विजयादशमी के त्यौहारी दिन, जब पूरा क्षेत्र पर्व के उल्लास में लीन था, तब एक ग्रामीण परिवार अपनी गर्भवती परिजन की जान बचाने के लिये दर-दर भटक रहा था। अंबिकापुर की ओर से आवागमन कर रहे कुछ राहगीरों ने देखा कि रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के ठीक सामने सड़क पर महतारी एक्सप्रेस (102) खड़ी है। वाहन के भीतर प्रसव पीड़ा से व्याकुल महिला दर्द से छटपटा रही थी। बेबस स्वजन उसे ढांढस बंधाने का प्रयास करते हुए अस्पताल का ताला खुलने की बाट जोह रहे थे। राहगीरों ने जब अस्पताल की ओर रुख किया, तो मुख्य द्वार पर बड़ा ताला जड़ा हुआ मिला। इतना ही नहीं, आपातकालीन सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिये अस्पताल परिसर में ही स्वास्थ्य कर्मचारियों के रहने के लिये बनाये गये शासकीय आवासों पर भी ताले लटके हुए थे। पूरा परिसर सुनसान पड़ा था और वहां एक भी स्वास्थ्य कर्मी या चिकित्सक मौजूद नहीं था।
17 कर्मियों का अमला, फिर भी एक परिचारक तक नहीं था मौजूद :
रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मुख्य मार्ग पर स्थित है और आसपास के समूचे ग्रामीण क्षेत्र की निर्धन आबादी उपचार के लिये इसी केंद्र पर निर्भर है। शासकीय अभिलेखों के अनुसार यहां एक एमबीबीएस सहित तीन चिकित्सक और कुल 17 स्वास्थ्य कर्मियों का अमला पदस्थ है। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के नाम पर शासन द्वारा प्रतिमाह लाखों रुपये का बजट व्यय किया जाता है, किंतु जमीनी हकीकत यह रही कि इतने बड़े स्टाफ के पदस्थापित होने के उपरांत भी संकट की घड़ी में अस्पताल वीरान पड़ा रहा। शासकीय आवासों में रहने के नाम पर भत्ते आहरित करने वाले कर्मियों का इस प्रकार गायब रहना व्यवस्था की घोर असंवेदनशीलता को उजागर करता है।
महतारी एक्सप्रेस ही बनी प्रसूति कक्ष, टला बड़ा हादसा :
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार प्रसूता निकटवर्ती गांव की ही निवासी है। प्रसव का समय अत्यंत निकट होने और महिला की गंभीर शारीरिक स्थिति को देखते हुए उसे किसी अन्य दूरस्थ चिकित्सालय अथवा जिला अस्पताल ले जाना संभव नहीं था। काफी देर तक चिकित्सालय के बाहर गुहार लगाने के उपरांत, जब कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई, तो स्वजनों की उपस्थिति में महतारी एक्सप्रेस के संकरे स्थान में ही महिला का प्रसव कराया गया। इस जोखिम भरे माहौल में जरा सी भी जटिलता उत्पन्न होने पर जच्चा और बच्चा दोनों की जान जोखिम में पड़ सकती थी। प्रसव संपन्न हो जाने के बाद भी अस्पताल का ताला नहीं खुला।
सूचना के एक घंटे बाद अंबिकापुर से पहुंची स्वास्थ्यकर्मी :
घटना की जानकारी मिलते ही गांव के स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अपने मोबाईल से खंड चिकित्सा अधिकारी, प्रभारी चिकित्सकों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से संपर्क साधा। सूचना दिये जाने के लगभग एक घंटे बाद अंबिकापुर से एक महिला स्वास्थ्य कर्मी मौके पर पहुंची। इसके बाद अस्पताल का ताला खोला जा सका और प्रसूता व नवजात शिशु को भीतर ले जाकर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया।
राहगीरों ने मोबाईल से वीडियो बनाकर किया अव्यवस्था को उजागर :
सड़क से गुजर रहे जागरूक राहगीरों ने इस पूरी घटना का अपने मोबाईल से वीडियो तैयार कर लिया। इस वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि किस प्रकार एम्बुलेंस के भीतर महिला प्रसव पीड़ा से तड़प रही है और ठीक पीछे अस्पताल के मुख्य द्वार व आवासीय भवनों पर ताले लटके हैं। यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो गया, जिसके बाद आम जनता और सामाजिक संगठनों में गहरा आक्रोश फैल गया।
नोटिस जारी, जांच उपरांत कड़ी विभागीय कार्यवाही की तैयारी :
मामला तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक हलके में खलबली मच गई है। राजपुर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. दीपक गुप्ता ने स्वीकार किया कि यह गंभीर मामला उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने बताया कि रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सक को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। जवाब मिलने के बाद गुण-दोष के आधार पर दोषियों के विरुद्ध विधिवत विभागीय कार्यवाही की जायेगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जायेगी।
मनमानी और अनुपस्थिति की पुरानी परिपाटी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि रेवतपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अव्यवस्था, अनुपस्थिति और मनमानी का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पूर्व भी कई बार सामान्य दिनों और त्यौहारी अवसरों पर अस्पताल बंद मिलने तथा चिकित्सकों के नदारद रहने की शिकायतें उच्च स्तर पर दर्ज कराई जा चुकी हैं, किंतु ठोस कार्यवाही के अभाव में व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस अमानवीय प्रकरण में मात्र कागजी औपचारिकता न निभायें, बल्कि दोषियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कदम उठाये जायें, ताकि भविष्य में किसी अन्य गरीब मरीज के जीवन के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ न किया जा सके।



