स्कूल बैग से हथियार निकालने का वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप, सामने आई चौंकाने वाली जानकारी।

अलीगढ़ (उ.प्र.) : उत्तर प्रदेश के जनपद अलीगढ़ से सामने आये एक सनसनीखेज मामले ने शैक्षणिक परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था और छात्र अनुशासन को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। क्वार्सी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्रतिष्ठित नेशनल इंटर कॉलेज के दो छात्रों का एक बेहद चौंकाने वाला वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया मंचों पर तेजी से प्रसारित हुआ। इस वीडियो फुटेज में स्कूल की वर्दी पहने दो छात्र अपनी पढ़ाई की किताबों के बीच स्कूल बैग से अवैध देशी तमंचे (कट्टे) और जिंदा कारतूस निकालकर बेखौफ अंदाज में उनका प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। शिक्षा के मंदिर में इस प्रकार घातक हथियारों की मौजूदगी का दृश्य सामने आते ही अभिभावकों, शिक्षकों और आम नागरिकों में तीव्र आक्रोश और भय का माहौल व्याप्त हो गया। वायरल वीडियो का तत्काल संज्ञान लेते हुए स्थानीय पुलिस तंत्र सक्रिय हुआ और मामले की तह तक पहुँचने के लिये विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी गई।

स्कूल बैग से निकले अवैध असलहे : सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्य देख सहम गये लोग :

प्रसारित वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कक्षा अथवा परिसर के भीतर बैठे छात्र अपने बस्ते की चेन खोलते हैं और उसमें से अत्यंत सहजता के साथ अवैध कट्टा और कारतूस बाहर निकालते हैं। इसके पश्चात वे कैमरे के सामने इन हथियारों को लहराते हुए अपनी धौंस दिखाने का प्रयास करते हैं। जैसे ही यह वीडियो मोबाईल फोन के माध्यम से विभिन्न ऑनलाईन समूहों, व्हाट्सएप और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर वायरल हुआ, देखते ही देखते हड़कंप मच गया।

स्थानीय नागरिकों और अभिभावक संघों ने स्कूल परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा जांच पर गंभीर सवाल खड़े किये हैं। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का कहना है कि जिस बस्ते में कलम, कापियां और भविष्य संवारने वाली किताबें होनी चाहिये, वहां जानलेवा हथियारों का पाया जाना समाज और शिक्षण संस्थानों दोनों के लिये खतरे की घंटी है। इस घटनाक्रम की संवेदनशीलता को देखते हुए साईबर सेल और क्वार्सी थाना पुलिस ने तुरंत साक्ष्य संकलन की प्रक्रिया आरंभ की ताकि वीडियो की सत्यता और इसके मूल स्रोत की पुष्टि की जा सके।

डीएसपी सर्वम सिंह का बयान : घटना वर्तमान की नहीं, दो वर्ष पूर्व छात्रों पर हो चुकी है अनुशासनात्मक कार्यवाही :

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सर्वम सिंह ने स्वयं कमान संभाली और नेशनल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य व प्रबंधन से संपर्क स्थापित कर पूरे प्रकरण का विस्तृत ब्योरा तलब किया। आधिकारिक छानबीन के उपरांत डीएसपी सर्वम सिंह ने इस बात का विधिवत खुलासा किया कि इंटरनेट पर प्रसारित हो रहा यह वीडियो वर्तमान समय का नहीं है, बल्कि यह घटनाक्रम लगभग दो वर्ष पुराना है।

पुलिस उपाधीक्षक ने स्पष्ट किया कि जब यह वाकया दो वर्ष पूर्व घटित हुआ था, तब कॉलेज प्रशासन ने इसे अनुशासनहीनता और संस्थान की मर्यादा के विरुद्ध घोर आचरण मानते हुए त्वरित कदम उठाया था। उस समय विद्यालय प्रबंधन ने दोनों आरोपी छात्रों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से कॉलेज से निष्कासित कर दिया था। इस प्रकार पुलिस ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर वर्तमान का बताकर फैलाये जा रहे इस वीडियो की पृष्ठभूमि पुरानी है और किसी भी नागरिक को अकारण भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।

मुकद्दमा और वैधानिक पहलुओं की पड़ताल : पुराने वीडियो के आधार पर भी पुलिस कर रही जांच :

यद्यपि यह वीडियो दो साल पुराना सिद्ध हो चुका है, किंतु कानून के जानकारों और पुलिस प्रशासन के लिये यह प्रश्न अभी भी अनुत्तरित है कि आखिर उन नाबालिग छात्रों तक ये अवैध हथियार और कारतूस किस माध्यम से पहुंचे थे। पुलिस इस बात से कतई इंकार नहीं कर रही है कि सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह एक अत्यंत संगीन विषय है।

अधिकारियों के अनुसार, मामले में निम्नलिखित बिंदुओं पर सघन जांच की जा रही है :

  • अवैध असलहों का स्रोत: नाबालिग छात्रों को तमंचे और कारतूस उपलब्ध कराने वाले असामाजिक तत्वों की पहचान सुनिश्चित की जायेगी।
  • पूर्व की कानूनी स्थिति: उस समय क्या इस गंभीर कृत्य के संबंध में पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत या मुकद्दमा दर्ज कराया गया था अथवा नहीं, इसके अभिलेख खंगाले जा रहे हैं।
  • सोशल मीडिया पर पुनः प्रसार का उद्देश्य: दो साल पुराने वीडियो को वर्तमान समय में सुनियोजित तरीके से वायरल करके शांति व्यवस्था को प्रभावित करने अथवा भय उत्पन्न करने की मंशा की भी साईबर टीम द्वारा जांच की जायेगी।
  • आगामी कानूनी कार्यवाही: यदि पूर्व में आर्म्स एक्ट के तहत कोई विधिक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी, तो वर्तमान साक्ष्यों के आधार पर सुसंगत धाराओं में अग्रिम कानूनी कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।

शैक्षणिक परिसरों में सुरक्षा तंत्र मजबूत करने और निगरानी नियम बनाये रखने का आह्वान :

इस घटना के पुनः प्रकाश में आने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग भी सतर्क हो गया है। जानकारों का मानना है कि केवल निष्कासन ही ऐसे मामलों का अंतिम समाधान नहीं हो सकता, बल्कि छात्रों के मानसिक भटकाव को रोकने के लिये सतत निगरानी और परामर्श तंत्र विकसित किया जाना अनिवार्य है।

विशेषज्ञों और प्रशासनिक अधिकारियों ने सुझाव दिये हैं कि:

  1. विद्यालयों में औचक बैग निरीक्षण की व्यवस्था लागू की जानी चाहिये ताकि किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक सामग्री परिसर के भीतर न जा सके।
  2. शिक्षण संस्थानों में मुख्य प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और क्लोज सर्किट कैमरों (सीसीटीवी) की निरंतर निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ की जायेगी।
  3. छात्रों में बढ़ते अपराध बोध, आक्रामकता और हथियारों के प्रति आकर्षण को समाप्त करने के लिये विशेष मनोवैज्ञानिक परामर्श सत्र आयोजित किये जायेंगे।
  4. अभिभावक भी अपने बच्चों की दैनिक गतिविधियों, उनके मित्र मंडली और उनके मोबाईल उपयोग पर पैनी नजर बनाये रखें ताकि वे किसी आपराधिक गिरोह अथवा गलत संगत का शिकार न बन सकें।

पुलिस प्रशासन ने आम जनमानस से भी अपील की है कि बिना पुष्टि के किसी भी पुराने अथवा भ्रामक वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित न करें। मामले से जुड़े सभी वैधानिक साक्ष्यों की जांच पूरी होने के उपरांत ही आगे की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी और दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार उचित कार्यवाही की जायेगी।