कुरुद का छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर : राज्य गठन से चार साल पहले स्थापित हुआ था क्षेत्रीय स्वाभिमान का यह पावन धाम।

कुरुद (धमतरी) : छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक अस्मिता, मातृशक्ति, लोक-परंपरा और क्षेत्रीय स्वाभिमान का अद्वितीय प्रतीक छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर कुरुद क्षेत्र में स्थित है। इस पावन देवालय का ऐतिहासिक महत्व इस तथ्य से उजागर होता है कि इसका इतिहास स्वतंत्र छत्तीसगढ़ राज्य के गठन से भी पुराना है। यद्यपि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को हुई थी, किंतु इससे चार वर्ष पूर्व ही वर्ष 1995-1996 में कुरुद की पावन धरा पर जन-जन की आराध्या छत्तीसगढ़ महतारी की दिव्य प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न हो चुकी थी। वर्तमान में यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, अपितु छत्तीसगढ़ के संघर्ष, आत्मगौरव, ऐतिहासिक पहचान और जनभावनाओं का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधारस्तंभ भी माना जायेगा।

राज्य गठन के संघर्षकाल में रखी गई थी मंदिर निर्माण की सुदृढ़ नींव :

अविभाजित मध्यप्रदेश के शासनकाल के दौरान जब पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की मांग जनआंदोलन का रूप ले रही थी और चारों ओर क्षेत्रीय अस्मिता को पुनर्स्थापित करने की चेतना जागृत हो रही थी, उसी ऐतिहासिक दौर में कुरुद नगर में छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर निर्माण की दूरदर्शी पहल हुई। वर्ष 1995 में तत्कालीन विधायक गुरुमुख सिंह होरा ने इस पुनीत कार्य के लिये दृढ़ संकल्प लिया था। प्रख्यात संत, ओजस्वी कवि एवं भागवताचार्य पवन दीवान के पावन सान्निध्य और प्रेरणा से इस संकल्प को मूर्त रूप दिया गया। वर्ष 1996 में भव्य मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ और वैदिक विधि-विधान से छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। इस प्रकार एक पृथक प्रशासनिक राज्य के अस्तित्व में आने से पहले ही कुरुद में क्षेत्रीय अस्मिता, स्वाभिमान और सांस्कृतिक स्वायत्तता का एक अविचल प्रतीक स्थापित कर दिया गया था, जिसने आगे चलकर पृथक राज्य आंदोलन में जनचेतना के संचार का कार्य भी किया।

धान की बाली और हंसिया : लोक-संस्कृति और श्रमसाधना का अद्भुत विग्रह :

कुरुद स्थित छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर में प्रतिष्ठित माता की प्रतिमा अपने अत्यंत विशिष्ट, सौम्य और सांस्कृतिक स्वरूप के लिये सर्वत्र पहचानी जाती है। पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिधानों और आभूषणों से अलंकृत माता के विग्रह के एक हाथ में पकी हुई धान की सुनहरी बाली और दूसरे हाथ में किसानी का औजार हसिया सुशोभित है। माता के दिव्य मस्तक पर मुकुट, भव्य छत्र, कमर में पारंपरिक करधन, चरणों में बजती पायल तथा कलाइयों में लोक-आभूषणों की चूड़ियां इस प्रतिमा के अलौकिक सौंदर्य को अनुपम बनाये रखती हैं।

यह प्रतिमा केवल एक धार्मिक विग्रह नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि प्रधान संस्कृति, ‘धान का कटोरा’ कहलाने वाले इस अंचल के मेहनतकश किसानों और सादगीपूर्ण ग्रामीण जीवन का सजीव दर्शन है। जब खेतों में नई फसल पकती है, तब उस समय नई धान की बालियों से माता का विशेष शृंगार भी किया जाता है। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों, सार्वजनिक स्थलों और सांस्कृतिक आयोजनों में स्थापित की जाने वाली छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमाओं के मानक स्वरूप की मूल प्रेरणा भी इसी कुरुद मंदिर से ग्रहण की गई बताई जाती है।

नियमित संध्या महाआरती, मनोकामना ज्योति और मड़ई-मेला की पावन परंपरा :

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित महेश शर्मा और प्रबंधक सेवक राम के अनुसार, मंदिर में नित्य पूजा-अर्चना के साथ-साथ प्रतिदिन सायं 7 बजे भव्य महाआरती संपन्न की जाती है, जिसमें सम्मिलित होने के लिये नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मुख्य मंदिर परिसर के भीतर ही शक्ति स्वरूपा महाकाली की दिव्य प्रतिमा भी स्थापित है, जहाँ भक्तगण श्रद्धापूर्वक अपनी आस्था के पुष्प अर्पित करते हैं।

वर्षभर चलने वाले धार्मिक आयोजनों में चैत्र और क्वांर (शारदीय) नवरात्रि का त्यौहार यहाँ विशेष उल्लास के साथ मनाया जाता है। इन पावन अवसरों पर श्रद्धालुओं द्वारा मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किये जाते हैं। नवरात्रि के पावन दिनों में यहाँ वृहद धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ पारंपरिक मेला-मड़ई का भी भव्य आयोजन होता है। इस सांस्कृतिक समागम में दूर-दराज के क्षेत्रों से दर्शनार्थी पहुंचते हैं, जिससे समूचा क्षेत्र माता के जयकारों और लोक-उत्सव के रंगों से सराबोर हो जाता है।

राज्योत्सव पर जनसेवकों और स्वच्छता मित्रों का संगम : सुख-समृद्धि की कामना

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस (राज्योत्सव) के पावन अवसर पर कुरुद स्थित महतारी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और वंदना का गरिमामय कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर, विधायक प्रतिनिधि भानु चंद्राकर, मुख्य नगर पालिका अधिकारी महेंद्र गुप्ता सहित नगर के स्वच्छता मित्रों ने मंदिर प्रांगण में उपस्थित होकर माता के दर्शन किये और समस्त प्रदेशवासियों के लिये सुख, शांति और समृद्धि की मंगल कामना की।

इस पावन अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर ने कहा कि कुरुद का यह ऐतिहासिक मंदिर समूचे प्रदेश की अस्मिता, माटी की महक और स्वाभिमान का केंद्र बिंदु है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्य स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली अवसर पर पूरे नगर को स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर बनाये रखने वाले कर्मठ स्वच्छता मित्रों सहित महतारी के दरबार में शीश नवाना अत्यंत गर्व और आत्मसंतोष का विषय है। मंदिर समिति और उपस्थित प्रबुद्धजनों ने भी इस अवसर पर प्रदेश की निरंतर प्रगति और लोक-कल्याण के लिये प्रार्थना की।