छ.ग. में लगातार घोटाले सामने आ रहे है, छ.ग. में ED ने लगातार अधिकारीयों, व्यापारियों और नेताओं पर छापे मारे है , जिसमें शराब आबकारी घोटाला 2000 करोड़ रुपये का , गौठान के नाम पर पोल खुली, 1300 करोड़ का घोटाले का भाजपा ने लगाया आरोप, गोबर खरीदी में गड़बड़ी, 1000 करोड़ का PDS घोटाले को लेकर भाजपा – कांग्रेस आमने-सामने हो चूकी है। आम आदमी छोटे – छोटे सरकारी कामों में रिश्वत देने को मजबूर हो चूका है, रमन राज में बिजली विभाग के लोगों का चाय पानी बंद हो गया था, अब वो जारी है, जैसे – जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, घोटाले भी खुलते जा रहे है, ED के छापे लगातार जारी है।
महासमुंद : छग प्रदेश राइस मिलर्स एसो. के कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर ने एफसीआई छग के बड़े अफसरों पर प्रदेश भर के राइस मिलरों से वर्ष 2021-2022 में 67.13 करोड़ और चालू वर्ष में अब तक 85.85 करोड़ रूपयों की अवैध उगाही करने का आरोप लगाते हुये इसकी शिकायत उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से की है। तथ्यों के साथ शिकायत करते हुए उन्होंने तत्संबंध में शपथ पत्र देकर केंद्रीय एजेंसी से जांच कराकर एफसीआई के भ्रष्टाचारी अफसरों के गिरोह के सभी सदस्यों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। श्री चंद्राकर ने नवभारत को बताया कि आज कल में जांच के लिए केंद्र से टीम आ रही है।
केंद्रीय मंत्री को भेजे मेल में अवैध उमाही में शामिल उच्च पदस्थ अफसरों के नामों का उल्लेख करते हुए बताया कि धमतरी जिले के राइस मिलरों से एरिया मैनेजर, धमतरी के क्यूसी मैनेजर ने प्रदेश के बड़े अफसरों की जानकारी में करोड़ों रूपये पिछले और इस वर्ष अब तक वसूले। उन्होंने कहा कि इस बाबत वहाँ के राइस मिलरों से वे केंद्रीय एजेंसी के समक्ष बयान करा सकते हैं। उन्होंने शिकायत में. कहा कि वर्तमान में एफसीआई में 29 मी. टन के चावल के 1 लाट को एक्सेप्ट करने के एवज में 7500 प्रति लॉट रिश्वत ली जा रही है। जो कि पूर्व के वर्षों में 6000/- लॉट के हिसाब से ली जाती थी। इस वर्ष 1500 रु. प्रति लॉट की राशि बढ़ाई गई।
छत्तीसगढ़ के एफसीआई के प्रदेश के सारे जिलों में संदेश भेजकर या मिलर्स की मीटिंग लेकर बताया गया कि बड़े अधिकारियों द्वारा बताया गया है कि इस आ वर्ष ऊपर के केंद्रीय ऑफिसर, मंत्री को च अतिरिक्त पैसा भेजने का दबाव बताकर ए बड़ी मात्रा में अवैध अतिरिक्त राशि वसूली प्र गई है। वर्ष 2021-22 में छत्तीसगढ़ एफसीआई द्वारा 3244615 मी. टन चावल लिया गया। छत्तीसगढ़ एफसीआई के अधिकारियों के संगठित गिरोह द्वारा 6000 रु. प्रति 29 मी. टन के लॉट के हिसाब से 67.13 करोड़ रुपये की अवैध उगाही की गई है। व वर्ष 2022-23 में आज दिनांक तक 3319342 मी. टन चावल छत्तीसगढ़ में एफसीआई द्वारा एक्सेप्ट किया गया है। उस पर 7500 रु. प्रति मी. टन के लॉट के हिसाब से 85.85 करोड़ रूपयों की अवैध उगाही आलरेडी की जा चुकी है व यह वसूली अभी भी जारी है।
इन भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा राइस मिलर्स को धमकी दी जाती है कि अगर 1 उन अधिकारियों की कोई शिकायत 1 करेगा तो उस राइस मिलर्स के लॉट्स को बार-बार रिजेक्ट किया जाएगा और जो शिकायतकर्ता राइस मिलर है उसे ब्लैक लिस्ट में डाला जाएगा। इसी कारण राइस मिलर्स शिकायत करने से डर जाते हैं और इनकी प्रताड़ना का शिकार होते जाते हैं। इस अवैध वसूली में शामिल अधिकारियों के नाम, पदनाम भी उन्होंने पत्र में लिखे हैं। यह भी लिखा कि उपरोक्त राशि इन सबके बीच में बंटती है। इसके अतिरिक्त प्रदेश के राइस मिलर्स का 21-22, 22-23 का करोड़ों रूपए एफआरके का भुगतान भ्रष्ट सिस्टम के कारण कुछ ना कुछ अड़ंगा जान-बूझकर दिल में कमी निकाल कर मिलर्स को परेशान करके बिल को रोककर 2 प्रतिशत राशि की एडवांस वसूली के बाद ही बिल ओके न किया जाता है। इसी तरह एफसीआई के परिवहन बिल में एवरेज ३६ राशि, रु. एफआरके निर्माताओं से प्रतिशत व राइस मिलर के एफआरके के बिल को पास करने हेतु 2 प्रतिशत की अवैध वसूली की जा रही है। यह भी लिखा कि एक बड़ा अधिकारी 12 साल से रायपुर कार्यालय में बैठा है। एफसीआई के डिपो हेड संजय शर्मा से जब संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले से अनभिज्ञता जाहिर की।
केन्द्रीय मंत्री भी दिल्ली की बैठक में शामिल हो चूके है :
केंद्रीय मंत्री को भेजे मेल में श्री चंद्राकर ने बताया कि दिल्ली में उनके (मंत्री) द्वारा 20 फरवरी को आहूत बैठक में छग के राइस मिलर्स के प्रतिनिधि के रूप में वे शामिल हुए थे। बैठक में सचिव, खाद्य और सार्वजनिक वितरण भारत सरकार व सीएमडी एफसीआई के साथ-साथ पूरे देश के राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे। आपने एफसीआई की कार्य प्रणाली को सुगम, पूर्ण पारदर्शी व भ्रष्टाचार से पूर्ण रूप से मुक्त कराने का आव्हान के साथ-साथ संकल्प भी दोहराया था। हमें भरोसा भी दिया था कि अगर एफसीआई की कार्यप्रणाली को पारदर्शी व भ्रष्टाचार से मुक्त कराने में कोई अधिकारी बाधक बनता है या आपके संस्थान को आर्थिक नुकसान पहुंचाता है तो आप मुझसे डायरेक्ट संपर्क कर सकते हैं। व आप हमारी हर संभव मदद व सुरक्षा करेंगे। आपकी एफसीआई को भ्रष्टाचार से मुक्त कराने की प्रबल इच्छाशक्ति से प्रभावित होकर में छत्तीसगढ़ एफसीआई में वर्षों से जारी भ्रष्टाचार के संबंध में सत्य व तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध करवा रहा हूं।
शपथ पत्र देकर घोटाले के खिलाफ केन्द्रीय जांच एजेंसियों से की मांग :
कुरुद निवासी श्री चंद्राकर ने शपथ पत्र में लिखा है कि सत्य व निष्ठा से देशहित व एफसीआई की कार्यप्रणाली। को पूर्ण पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त कराने हेतु उन्होंने उपरोक्त कथन किया है। उपरोक्त जानकारी/ तथ्य यदि गलत पाए गए तो मैं परिणाम/ दंड भुगताने का अधिकारी होऊंगा। श्री चंद्राकर ने केंद्रीय एजेंसी को इन अधिकारियों के विरूद्ध जांच तथा एफआईआर शीघ्र कराने हेतु निर्देश देने का अनुरोध किया है। यह शपथ पत्र माचिस मीडिया के पास उपलब्ध है।
सक्ती FCI गोदाम में भी गड़बड़ी के आरोप :
सक्ती : नागरिक आपूर्ति निगम यह नाम तो सब ने सुना है और इसमें होने वाले भ्रष्टाचार से छत्तीसगढ़ की जनता पूर्व से वाकिफ हैं। वहीं अब सक्ती में भी नान और एफसीआई में भारी भ्रष्टाचार होने की बात कही जा रही है। भारतीय खाद्य निगम के डिपो मैं इन दिनों राइस मिलरों को काफी परेशान किया जा रहा है। साथ ही चावल के प्रत्येक लाट में 7600 रुपए की दस्तूरी ली जा रही है। ज्ञात हो कि राज्य सरकार द्वारा किसानों से समर्थन मूल्य में धान की खरीदी की जाती है। जिसे धान उपार्जन केंद्र से सीधे राइस मिलरों को कुटाई हेतु भेजा जाता है। वहीं धान कुटाई पश्चात जिलों द्वारा राज्य सरकार की संस्था नागरिक आपूर्ति निगम एव भी देत हाएफा 1. केंद्र सरकार की संस्था भारतीय खाद्य निगम को भेजा जाता है। वहीं शासन द्वारा निर्धारित मापदंड के अनुसार धान को उसना भी किया जाता है। उसके बाद उसकी कुटाई होती है। जब मिलरों को मिले धान का शासन के नियमानुसार अरवा और उसना चांवल की कुटाई हो R जाती है तब उसे नान और एफसीआई भेजा जाता है। जहां क्वालिटी चेक हेतु इंस्पेक्टर और गोदाम मैनेजर होते हैं और जांच उपरांत चांवल के लाट को जमा कराया जाता है। यहां यह जानकारी मिली है कि एफसीआई के कुछ अधिकारियों द्वारा मिलरों को परेशान करने की नीयत से उच्च कोटि के चावल होने के बाद भी प्रति लाट 7600 रुपए की मांग की जाती है साथ ही प्रत्येक लाट के हिसाब से जो इस दस्तूरी को देने से मना करता है। उसे परेशान किया जा रहा है। कुछ राइस मिलरों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि एफसीआई के अधिकारी लगातार दबाव बनाते हैं और पैसा नहीं दोगे तो तुम्हारे राइस मिल को सील करा देंगे कि धमकी भी देते है, FCI के कुछ अधिकारीयों द्वारा 9 – 10 हजार की रिश्वत की मांग भी आ रही है।



