मकान मालिक और किरायेदार के लिए जरूरी किराया नामा, किरायेदार कर सकता है आपकी प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा, जानिये क्या हैं नियम?

व्यापार : आमदनी अट्ठनी और खर्चा रुपइया हो तो इंसान क्या करेगा? जाहिर है वह अपनी आमदनी बढ़ाने की कोशिश करेगा। यही वजह है कि देशभर के लोग प्रॉपर्टी में निवेश करते हैं और उसका पजेशन पाने के बाद उसे किराये पर चढ़ा देते हैं। घर का किराया एक स्थायी इनकम देता है, परंतु इससे जुड़े नियमों से अनजान लोग अपना नुकसान भी करवा बैठते हैं। कोई भी व्यापार इतना आसान नहीं होता है , और व्यापार में लागत और नुकसान की भरपाई के हिसाब से आय होना भी आवश्यक है।

यदि आप मकान किराए पर लेने जा रहे हैं तो आपको किरायानामा बनवाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। घर किराए पर लेने या देने के लिए किरायानामा बनवाने की जरूरत पड़ती है। अगर आप एग्रीमेंट नहीं बनवाते हैं तो आगे जाकर परेशानी में पड़ सकते हैं। इस किरायानामा में किरायेदार और मकान मालिक की शर्तें लिखी होती हैं, जो दोनों पार्टी को सहमति होने के बाद हस्ताक्षर करनी होती है। किरायानामा में किराया बढ़ाने, रिपेयर, सिक्योरिटी डिपॉजिट, मेंटेनेंस और अन्य भुगतान की जानकारी लिखी होती है। आइए जानते हैं किरायानामा बनवाने समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

गलत किरायेदार :

मकान या कोई संपत्ति को किराये पर देने से पहले किरायेदार के बारे में अच्छे से पड़ताल कर लें। गलत किरायेदार रखने से आगे आपको मुसीबत हो सकती है। अगर वह अपराधी निकलता है तो उसके द्वारा दिये गये अपराध में आप भी क़ानूनी पचड़े में फंस सकते है।

किराया और किरायानामा :

आपने अपने घर के मेंटेनेंस पर पैसा खर्च किया होगा। ऐसे में आपको ध्यान देना होगा कि किरायेदार भी इन चीजों को सही से रखें इनको नुकसान ना पहुंचाये। सामान और दी गई सुविधा के हिसाब से किराया तय करें। किरायानामा बनवाकर ही किरायेदार को अपनी प्रॉपर्टी सौंपे। वहीं, कानूनी तौर पर किदायेदारी 11 महीने की होती है। इसलिए सोच समझकर समय तय करना चाहिए।

टर्मिनेशन और नोटिस :

किरायेदार यदि एग्रीमेंट में दी गई शर्तों का पालन नहीं करता है तो मकान मालिक उसे संपत्ति खाली करने के लिए कह सकता है। वहीं, घर खाली कराने के लिए एक माह का समय नोटिस देना होता है। बाकी सहमति अथवा विवाद की स्थिति के अनुरूप घर खाली करवाया जा सकता है।

भुगतान :

किराया देने के लिए मकान मालिक को एक निर्धारित तारीख तय करनी होती है। उसी तिथि को किरायेदार को किराया देना होता है। तिथि तय करना आवश्यक है, जिससे प्रतिमाह का किराया समय पर भुगतान हो सके क्यूंकि यह किराया समय के आधार पर होता है ना की सामान के तरीके से।

किरायेदार आपके प्रोपर्टी पर क़ानूनी तौर पर कर सकता है कब्ज़ा :

लगातार 12 साल तक किसी प्रॉपर्टी पर रहने के बाद किरायेदार उस पर हक का दावा कर सकता है, हालांकि, इसकी शर्तें काफी कठिन है, लेकिन आपकी संपत्ति विवाद के घेरे में आ सकती है। प्रतिकूल कब्जे का कानून अंग्रेजों के जमाने का है, अगर इसे सरल शब्दों में समझें तो यह जमीन पर अवैध कब्जे का कानून है, हालांकि, उपरोक्त दी गई परिस्थिति में यह मान्य कर दिया जाता है। 12 साल वाला कानून सरकारी संपत्ति पर लागू नहीं होता है। काफी पुराने कानून के तहत किया जाता है, कई बार इसके चलते मालिकों को अपनी संपत्ति से हाथ धोना पड़ जाता है। इसका इस्तेमाल किराए पर काफी लंबे समय किया हो।

इससे बचने का तरीका है :

इसका सबसे बेहतर तरीका है कि किसी को भी मकान किराए पर देने से पहल किरायानामा बनवायें, ये 11 महीने का होता है और इसलिए हर 11 महीने पर उसे रिन्यू करवाना होगा, जिसे प्रॉपर्टी के लगातार कब्जे में रूकावट माना जाएगा, दूसरा आप समय-समय पर किरायेदार को बदल सकते हैं। अभी बीते कुछ केसों के आधार पर न्यायालय ऐसी परिस्थिति में मकान मालिक के पक्ष में ही फैसला दिया है, जिसको लेकर मकान मालिक आश्वस्त है।