पश्चिम बंगाल में करोड़ों का है दुर्गा पूजा का कारोबार, दुर्गा पूजा समितियों को मिलेंगे इस बार 70 हजार, फूटपाथ पर नहीं हो दुर्गा पूजा पंडाल की अनुमति अधिकारियों ने डाली कोर्ट में याचिका।

कोलकाता (प. बंगाल) : पश्चिम बंगाल के विश्व प्रसिद्ध दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारियां अभी से शुरू हो गई हैं। कई प्रमुख आयोजकों ने खूंटी पूजा कर ली है। मूर्तिकारों को लगातार ऑर्डर दिए जा रहे हैं। पंडाल सजाने वालों से सम्पर्क साधा जा रहा है। राज्य का सबसे बड़ा धार्मिक उत्सव सिर्फ पूजा पाठ तक सीमित नहीं है। दुर्गोत्सव के दौरान कम से कम 70 हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है। दुर्गा पूजा सम्पूर्ण भारत वर्ष में मुख्यतौर से पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है, यह का प्रमुख त्यौहार है, जिसको लेकर सम्पूर्ण भारत में सबसे बड़े वृहद स्तर पर मनाया जाता है, विगत कुछ वर्षों में मोहर्रम और दुर्गा पूजा साथ में आने के कारण इस पर कई विवाद भी खड़े हो चुके है, जिसको लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी की किरकिरी हो चुकी है।

दुर्गा पंडाल को सड़क किनारे सजाने से रोकने के लिये अधिकारियों की याचिका पर कोर्ट और विवाद :

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दुर्गा पूजा सबसे धर्मनिरपेक्ष त्योहारों में से एक है। इसे केवल धार्मिक पूजा के अर्थ तक सीमित नहीं किया जा सकता है। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य ने कोलकाता में अधिकारियों को शहर में खास सार्वजनिक मैदान पर दुर्गा पूजा समारोह की अनुमति देने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की। कोर्ट ने अधिकारियों की इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि सार्वजनिक पार्कों, सड़कों, फुटपाथों आदि पर पूजा करने का अधिकार नहीं है।

संस्कृतियों का मिश्रण :

कोर्ट ने कहा कि दुर्गा पूजा महोत्सव केवल नारी शक्ति के अवतार की पूजा या धार्मिक प्रसाद तक सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों का मिश्रण है। इसमें समारोह और सांस्कृतिक आयोजन का भी तत्व है। इस अर्थ में, दुर्गा पूजा महोत्सव की किसी विशेष समुदाय के शुद्ध धार्मिक प्रदर्शन की तुलना में कहीं अधिक धर्मनिरपेक्ष प्रकृति है। समस्त नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का बराबर अधिकार है।

पहले मिलते थे 60 हजार अब मिलेंगे 70 हजार :

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को राज्य सरकार की तरफ से पूजा समितियों को दी जाने वाली अनुदान राशि को 60 हजार से बढ़ाकर 70 हजार रुपए करने की घोषणा की है। साथ ही पूजा पंडालों की ओर से बिजली बिल का दो तिहाई का भुगतान करने की भी घोषणा की। अनुदान की घोषणा करने से पहले मुख्यमंत्री ने मजाकिया लहजे में कहा कि इस बार राज्य का कोष खाली है। तो क्या इस बार पूजा कमेटियों को दिया जाने वाला अनुदान आधा कर दिया जाए। फिर उन्होंने कहा कि इस बार 70 हजार रुपए अनुदान दे रही हूं। अगर हम पर संकट आएगा तो आप लोग हमारा साथ देंगे तो। यह वाक्य हिन्दुओं को लेकर कहा जाना माना जा रहा है, क्यूंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शासन में हिन्दुओं पर विशेष समुदाय द्वारा कई अत्याचार हो चुके है, इस बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव भी हार गई थी।

राज्य में लगभग 40 हजार सामुदायिक पूजा :

राज्य भर में लगभग 40 हजार सामुदायिक रूप से पूजा आयोजित की जाती हैं, जिनमें से लगभग 3 हजार कोलकाता में आयोजित की जाती हैं। इनके अलावा आवास परिसरों और व्यक्तिगत घरों में भी दुर्गा पूजा होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2018 में, ब्रिटिश काउंसिल, आईआईटी खडग़पुर और यूके के क्वीन मैरी विश्वविद्यालय की ओर से किए गए एक अध्ययन में बंगाल में दुर्गा पूजा से जुड़ा कारोबार 32,377 करोड़ रुपए का आंका गया था। अब यह बढक़र 60 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हो गया है। लोक कलाकारों सहित कई लोगों को रोजगार मिलता है। इस साल बहुत सारे विदेशी पर्यटकों के बंगाल में आने की भी उम्मीद है। जिसको लेकर राज्य सरकार भी पूरा सहयोग कर रही है।