ब्रांडेड कंपनी के नाम पर बिक रहे नकली सामान, ऑनलाइन साइट भी बेच रहे, छापे में पकड़ाये ये सब व्यापारी….।

रायपुर : मार्केट में प्राईस वॉर और कॉम्पिटिशन को लेकर व्यापार में ज्यादा मुनाफे की लालच में व्यापारी लगातार नकली माल बेच रहे है, जिन पर लगातार ताबड़तोड़ कार्यवाही हो रही है, छत्तीसगढ़ की राजधानी समेत प्रदेशभर में में ब्रांडेड कंपनी के नाम पर नकली सामान खपाने का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। अकेले रायपुर में ही हर महीने करीब 50 लाख रुपये के इलेक्ट्रानिक्स उपकरण, कास्मेटिक, खाद्य सामग्री, कपड़े समेत अन्य सामान खपाया जा रहा है। दरअसल नामी कंपनियों के ट्रेडमार्क, स्टीकर का इस्तेमाल कर कारोबारी नकली सामान बेचने का गोरखधंधा चला रहे हैं। आठ माह में रायपुर में लगभग 20 केस कॉपीराइट एक्ट के तहत दर्ज किए गए हैं। हाल ही में देवेंद्र नगर और गोलबाजार थाना क्षेत्र में कार्यवाही की गई है। इसमें ब्रांडेड की आड़ में नकली कपड़े बेचे जा रहे थे। अधिकतर सामान बाजार में नकली बिक रहे है।

ऑनलाइन साइट भी दे रही धोखा :

नकली सामान बेचने के गोरखधंधे में अब ऑनलाइन शापिंग साईट भी शामिल हो गई है। ऑनलाइन खरीदारी करने वालों को कहना है कि कई बार ब्रांडेड के नाम से हूबहू दिखने वाले सामान को लोग खरीद लेते हैं। ऑनलाइन खरीदारी में सबसे अधिक इलेक्ट्रानिक्स, कास्मेटिक, स्पोर्ट्स का सामान, कपड़े आदि नकली सप्लाई की जा रही है। ऑनलाइन में भी धोखाधड़ी कम नहीं है,लेकिन सामान लौटाने का मौका जरुर मिल जाता है, लेकिन यदि सामान नहीं लौटाया तो कुछ दिन के बाद सामान ख़राब होने पर कोई सुनवाई नहीं होती।

पहचान करना मुश्किल है, ऐसे करें पहचान

ब्रांडेड कंपनियों के मिलते-जुलते नाम से अनेक नकली प्रोडक्ट बाजार में बिक रहे हैं। पहली नजर में असली-नकली प्रोडेक्ट को पहचानना बड़ा ही मुश्किल होता है। यदि गौर से प्रोडक्ट पर नजर डालेंगे तो आप असली-नकली की पहचान कर सकते हैं। नकली और असली प्रोडक्ट में कुछ न कुछ ऐसा जरूर फर्क होता है, जिससे वह पहचान में आ जाता है। जैसे-प्रोडक्ट के नाम और स्पेलिंग में फर्क, बाक्स पर जानकारी का अभाव, व्याकरण या मात्राओं की त्रुटि ही नहीं, उसकी डिजाइनिंग भी इस तरह से करते हैं कि पहली नजर में अच्छे-अच्छे धोखा खा जाते हैं, मैन्युफेक्चर डिटेल में बदलाव। ग्राहक कोई भी उत्पाद खरीदते समय यदि होशियारी से सभी बातों पर ध्यान दें तो वे नकली सामान खरीदने से बच सकते हैं। लेकिन अधिकतर लोग सामान खरीद के चले जाते है, प्रयोग करने के बाद ही समझ में आता है।

स्कूल बैग सहित बेचा जा रहा था अन्य सामान :

गोलबाजार क्षेत्रांतर्गत नयापारा स्थित पूजा ट्रेडर्स के संचालक संजय देवानी द्वारा डिजनी इंटरप्राइजेस आइएनसी और मार्वल कैरेक्टर्स आइएनसी कंपनी का नकली समान बिक्री किया जा रहा था। जिस पर गोलबाजार पुलिस का संबंधित कंपनी की टीम ने दुकान में जाकर कार्यवाही की। कंपनी के सामग्रियों को चेक करने पर सामग्रियां नकली होना पाया गया। जिस पर पूजा ट्रेडर्स शाप के संचालक संजय देवानी के कब्जे से नकली उत्पाद बच्चों के विभिन्न स्कूल बैग, कंपास, पेंसिल, टायस, डायरी, पानी बाटल जब्त किया गया। कॉपीराइट एक्ट के तहत कार्यवाही की गई। पहले भी गोलबाजार में कार्यवाही हो चुकी है।

असली की जगह पहना रहे थे नकली जींस :

देवेंद्रनगर क्षेत्र के तीन कपड़ा व्यापारियों के यहां छापे की कार्यवाही की गई थी। पुलिस ने आरएस जींस स्क्वेयर, वाहेगुरु इंटरप्राइजेस और स्टाईल चेक पंडरी के संचालकों के खिलाफ कॉपीराइट के तहत अपराध कायम किया गया। पुलिस ने पंडरी के केलीन कपड़ा व्यवसायी के दुकान पर छापे की कार्यवाही की। इसमें आरएस जास स्क्वेयर पंडरी के संचालक गोविंद झमनानी, वाहेगुरु इंटर प्राइजेश के अमर सचदेव और स्टाइल चेक कपड़ा दुकान के संचालक दिनेश बलानी के दुकान में कंपनी का नकली सामान बेचते पाए गए। पुलिस ने आरएस से 181 जींस, वाहेगुरु इंटर प्राइजेश से 341 टी-शर्ट और 244 जींस, वहीं स्टाइल चेक से 134 जींस जब्त किए। लाखों रुपये का नकली सामान पकड़ाया गया।

रायपुर एसएसपी प्रशांत अग्रवाल का कहना है कि अलग-अलग कंपनी की विशेष टीम जांच करती रहती है। पुलिस को सूचना मिलने के बाद संबंधित थाने की टीम जाकर कार्यवाही करती है। नकली सामान भी जब्त किया जाता है। आरोपियों पर कॉपीराईट एक्ट के तहत कार्यवाही की जाती है।