दुर्ग/भिलाई : रेल्वे स्टेशनों में अवैध वेंडरों की दादागिरी इस प्रकार है कि जांच करने आये अधिकारी के साथ ही मारपीट कर दी है, खबर है कि ट्रेनों में घूम-घूमकर अवैध रूप से व्यापार करने वाले कुछ अनाधिकृत वेंडरों ने मिलकर रेलवे के कमर्शियल इंस्पेक्टर (सीआई) से मारपीट कर दी है। सीआइ ने दुर्ग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर छह पर कुछ अनाधिकृत वेंडरों को देखकर उनसे पूछताछ की तो आरोपियों ने घेरकर उनकी ही पिटाई कर दी। अधिकारी ने जीआरपी में इसकी शिकायत की है। जिसके आधार पर जीआरपी ने तीन नामजद आरोपियों सहित कई अन्य आरोपियों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा, गाली गलौज, मारपीट, रास्ता रोकने, शासकीय सेवक से मारपीट और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं के तहत प्राथमिकी की है।
पुलिस ने बताया कि पंचशील चरोदा निवासी एल विद्यासागर रेलवे में सीआइ हैं। वे शनिवार को रायपुर से अंतागढ़ के बीच चलने वाली ट्रेन में अनाधिकृत वेंडरों की जांच करते हुए भिलाई से दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। दुर्ग रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर छह पर कुछ अनाधिकृत वेंडर यात्रियों को खाने पीने की चीजें बेच रहे थे। उन्हें देखकर सीआई एल विद्यासागर ने उनका अपने मोबाईल पर वीडियो बनाना शुरू किया ताकि, उसके आधार पर उनकी पहचान हो सके। उनमें से एक वेंडर ने सीआई को वीडियो बनाता देख लिया और उनका मोबाईल छीनने की कोशिश की। इस पर सीआइ ने आरोपियों से उनका आई कार्ड मांगा तो आरोपियों ने विवाद शुरू कर दिया।
एक वेंडर ने सीआई का मोबाईल भी छीन लिया। इसी दौरान आरपीएफ जवान हरे राम कुमार वहां पहुंचा। सीआई ने आरपीएफ जवान से कहा कि सभी वेंडरों को जीआरपी चौकी ले जाए, इस बात पर आरोपियों ने सीआई एल विद्यासागर को घेर लिया और मारपीट शुरू कर दी। वहां उपस्थित आरपीएफ जवान ने बीच बचाव किया तो सभी आरोपि मौके से भाग गए। आरोपियों में से तीन आरोपी राजन सोनकर, विशाल सोनकर और सूरज सोनकर की नामजद पहचान की गई है। बाकि आरोपियों की वीडियो के आधार पर पहचान की जा रही है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है।सीआई द्वारा घटना की शिकायत पर जीआरपी ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की है।
क्यूँ जरुरी है अवैध वेंडरों पर कार्यवाही :
अवैध वेंडर रेल्वे द्वारा अधिकृत नहीं होते है, जिनकी पहचान मुश्किल होती है, जिससे अपराध को अंजाम देने वालों का पता नहीं चल पाता, अवैध वेंडर कहीं भी चैन पुलिंग कर देते है जिससे घटना अथवा दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है, स्तरहीन खान-पान की सामग्री बेचते है जो की नुकसानदेह होती है।