संसद सत्र में भाजपा ने अपने सभी सांसदों को मौजूद रहने के दिये है निर्देश, जब ऐसा होता है तो देश में कुछ बड़ा होने वाला होता है।

नई दिल्ली : जब से मोदी जी की सरकार केंद्र में आई है, तबसे यह सरकार अप्रत्याशित फैसले ले लेती है, जिसे आम आदमी हैरत में पड़ जाता है, केंद्र की मोदी सरकार अक्सर चौंकाने वाले फैसले लेती रहती है। अभी हाल ही में संसद का मॉनसून सत्र समाप्त हुआ। लेकिन सरकार ने फिर से 18 सितंबर से संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इस दौरान सरकार कई ऐसे बिल ला सकती है। जिससे लोग हैरान रह जाए। सरकार के विशेष सत्र बुलाने के बाद भाजपा ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर संसद सत्र के दौरान मौजूद रहने का निर्देश दिया है। ज्ञात हो कि सरकार ने संसद सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में IPC के कानूनों में बदलाव करने वाला अहम बिल पेश किया था। इसके अलावा ये भी जानते है कि भाजपा ने किन-किन मौकों पर सांसदों को व्हिप जारी किया है

कुल 4 अहम बिल पेश कर सकती है सरकार :

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक सरकार इस विशेष सत्र के दौरान लोकसभा में पोस्ट ऑफिस बिल और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाले संशोधन बिल पेश करने वाली है। जिसमें कुल 4 बिल पेश किए जायेंगे, जिनमें चुनाव आयोग वाला विधेयक सबसे अहम है, जिसमें एक देश एक चुनाव। बता दें कि अगर चुनाव आयोग वाला विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास हो जायेगा तो उसके बाद चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में CJI का दखल खत्म हो जाएगा।

सदन में रहने और सरकार का समर्थन करने का निर्देश :

संसद के विशेष सत्र के लिए भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों को उपस्थित रहने का आदेश दिया है। तीन लाइन की व्हिप जारी करते हुए सरकार ने सांसदों से कहा कि सदन में कुछ अति महत्वपूर्ण विधायी कार्य पर चर्चा और उन्हें पारित कराने के लिए उपस्थित रहें। पार्टी की ओर से जारी व्हिप में कहा गया कि सभी सांसद अनिवार्य रूप से सदन में रहें और सरकार के पक्ष का समर्थन करें। इसमें सभी सांसदों को उपस्थित रहना अनिवार्य है।

CEC की नियुक्ति में CJI का दखल खत्म करना चाहती है सरकार :

इस संशोधन विधेयक के जरिए सरकार चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट का दखल खत्म करना चाहती है। नई व्यवस्था के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति वाले पैनल में चीफ जस्टिस नहीं रहेंगे। चुनाव आयुक्त की नियुक्ति वाले बिल के सेक्शन 7 में कहा गया है कि इसके लिए एक समिति गठित होगी। इस समिति में पीएम, उनके द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता होंगे। इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि अब चीफ जस्टिस को इस समिति से बाहर रखा जाएगा। इसके अलावा कहा जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री और पीएम मिलकर किसी भी नियुक्ति को मंजूर कर लेंगे। इसी को लेकर विपक्षी अपना विरोध भी कर रहे है।

राज्यसभा में पेश हो चुका है बिल :

विपक्ष के नेता की राय को नजरअंदाज करने का विकल्प भी उनके पास रहेगा। इसके चलते विपक्ष भी चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। पिछले सेशन में ही इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया गया था। बता दें कि स्पेशल सेशन के पहले दिन यानी 18 सितंबर को सरकार ने संसद के 75 सालों के इतिहास पर चर्चा करने का प्रस्ताव रखा है।वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि सरकार विशेष सत्र के दौरान UCC को लेकर कोई कानून ला सकती है। वहीं,19 सितंबर से नए भवन में संसद लगनी शुरू होगी। नए संसद भवन का शुभारंभ गणेश चतुर्थी वाले दिन यानी कि 18 सितंबर से ही होने वाला है। जिसमें पहला सत्र पुराने संसद भवन में होगा और दूसरा नये भवन में।

पहले भी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर चुकी है BJP :

यह कोई पहला मौका नहीं है, जब भाजपा ने अपने सांसदों के लिए इस तरह का कोई व्हिप जारी किया है। इस पहले भी भाजपा ने 5 अगस्त 2019 को कश्मीर से धारा 370 को हटाते समय, तीन तलाक के पास होते समय, GST कानून के पास होते समय, CAA के पास होने के समय और हाल ही में दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे पर व्हिप जारी किया था। जिसमें भाजपा के सभी सांसद उपस्थित हुये थे।

अब मुख्यतौर पर जो मुद्दा हमें समझ आया वो POK को भारत में लाने का प्रयास शायद इस बार पूर्ण हो जाये।