रायपुर : क्या आप भी रेल से यात्रा करने वाले है तो जान लीजिये ट्रेनों के ये बेतरतीब संचालन, अगर कहीं आप परिवार के साथ जायें तो मुश्किल में ना पड़ जायें। रेलवे के विकास और मालगाड़ियों के संचालन के नाम पर यात्री ट्रेनों के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है, अधिकतर ट्रेनें अपने तय समय से घन्टों देरी से चल रही है, अब कल ही की घटना है कि जगदलपुर में रेलवे ने पहले ट्रेनों को रद्द कर दिया और जब कई यात्री ये सुनकर अपने घर लौट गए तो ट्रेन को वापस दौड़ा दिया। रेलवे की ओर से पहला आदेश सुबह 11.36 बजे जगदलपुर-राउरकेला एक्सप्रेस को रद्द करने और जगदलपुर-भुवनेश्वर को कोरापुट-रायगढ़ा (केआर लाइन) की जगह परिवर्तित मार्ग कोरापुट-कोत्तावालसा (केके मार्ग) से चलाने का जारी किया गया। इन ट्रेनों में सफर करने यात्री स्टेशन पहुंचे तो गेट पर बताया गया कि ट्रेन रद्द हो गई है।
अचानक से बिना व्यवस्था किये गोंदिया बडोनी को गोंदिया से नैनपुर ट्रैक पर चला दिया जाता है, इधर यात्री रायपुर और दुर्ग स्टेशन पर इंतजार करते रह जाते है, ना ही रेलवे द्वारा यात्रियों को कोई सुचना दी जा रही है और ना ही टिकट का रिफंड वापस किया जा रहा है, रिफंड को लेकर भी रेलवे ने नियम बनाकर रख दिये है, जिससे रिफंड मिलना भी मुश्किल हो रहा है, अधिकतर यात्रियों का पैसा भी डूब रहा है।
शिवनाथ अभी तक नहीं पहुंची नागपुर :
खबर लिखे जाने तक शिवनाथ एक्सप्रेस जिसे गेवरा के बजाय कोरबा से चलाया गया था, यह ट्रेन कल 14 सितम्बर को कोरबा से शाम को 6 बजे का समय र्निधारित था, लेकिन यह ट्रेन अपने निर्धारित समय से 5 घंटे देर से चली, यही ट्रेन सुबह 6 बजे इतवारी (नागपुर) से इंटरसिटी बनकर सुबह 6 बजे निकलती है, लेकिन यह पहुंची ही नहीं और उधर से आने वाले यात्री इस ट्रेन के इंतजार में स्टेशन में बैठे रहे, जबकि जाने वाली ट्रेन ऑनलाइन स्टेटस में दोपहर 1 बजे कामटी में ख़त्म होना दिखाया , तो जो ट्रेन इतवारी पहुंची ही नहीं तो वो वहां से वापस कैसे आयेगी? जबकि वापसी में इसका ऑनलाइन स्टेटस चेक करने पर पता चला की इंटरसिटी इतवारी से सुबह निकल चुकी है, जबकि स्टेशन से पूछने पर पता चला ट्रेन अभी आई ही नहीं है, जिसकी आने की उम्मीद दोपहर में डेढ़ बजे (1:30 बजे) है, और स्टेशन में सैकड़ों यात्री सुबह 6 बजे से बैठे हुये है। जबकि वापसी का ऑनलाइन स्टेटस कामटी से बता रहा है।
G 20 को लेकर ट्रेनें हुई थी रद्द :
9 और 10 सितंबर को G-20 सम्मेलन का आयोजन था। इसके चलते उतर रेलवे ने 200 से ज्यादा ट्रेनों को रद्द कर दिया था। जबकि उत्तर मध्य रेलवे ने 12 ट्रेनों को रद्द किया था। उत्तर मध्य रेलवे ने 8 ट्रेनों के टर्मिनल बदले है। वहीं, उत्तर रेलवे ने काफी संख्या में ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट किया था, या फिर उस ट्रेन के रूट में बदलाव किया था।
ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान यात्री :
ट्रेनों को लेकर पहले ही यात्री परेशान चल रहे है, वो जिस जरुरी काम से यात्रा करना चाहते है, उसमें उनके परेशानी खड़ी हो जाती है। राखी के त्यौहार पर भी ट्रेने कैंसिल हुई। आपको बता दें कि ट्रेनों का संचालन क्यूँ गड़बड़ाया है, विभाग का कहना होता है, ट्रैक के अपडेशन के कारण ये दिक्कत हो रही है, जबकि दूसरी तरफ मालगाड़ियों की संख्या बढ़ा दी गई है, जिसके लिये यात्री ट्रेनों को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीँ दूसरी तरफ वन्दे भारत , तेजस, राजधानी और हमसफ़र जैसी महंगी ट्रेने अपने समय पर ही चल रही है।
क्या करना चाहिये यात्रियों को :
ट्रेन के निर्धारित समय पर पहुँच जायें भले ही ट्रेन रद्द हो, कई बार ट्रेनों को समय से पहले भी रवाना कर दिया जाता है, ऐसी ही घटना दो माह पूर्व नासिक में हुई थी, बाकी व्यवस्था अपनी जरूरत के अनुसार स्टेशन से प्राप्त जानकारी के अनुसार तय करें, छोटी दूरी के लिये तुरंत लोकल टिकट लेकर यात्रा करना बेहतर होगा, हालाँकि यह असुविधा पूर्ण होगा, लेकिन ट्रेन कभी आ ही नहीं रही है, कभी समय से पहले निकल जाती है, कभी रास्ता बदलकर निकला जाती है, कभी कैंसिल की सुचना देकर बाद में रवाना कर दी जाती है।
क्या कहते है रेलवे के जिम्मेदार :
अब अंत में आते है ट्रेनें देरी से क्यूँ चल रही है ? आमतौर पर ट्रेन के लेट होने का कारण इंजीनियरिंग से भी जुड़ा होता है, ट्रैक पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य, सिग्नल का काम या ओएचई यानी ओवर हेड वायर के काम की वजह से भी ट्रेन लेट होती है, वहीं 21 फ़ीसदी ट्रेनें एसेट्स फ्लेयर यानी रेलवे का कोई सिस्टम फेल हो जाने से लेट होती हैं। सालभर से यात्री परेशान है, इधर जिम्मेदार कहते है, रेल्वे लाइनों का सुधार , बदलाव और विकास कार्य (Updation) चल रहा है, इसलिये ट्रेनें देरी से चल रही है, तो पिछले वर्ष राखी के त्यौहार के समय इस कार्य को आगे – पीछे किया जा सकता था, जब बहुत साड़ी ट्रेनें रद्द कर दी गई थी। अब असली बात ये है की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वन्दे भारत ट्रेन को प्रमोट करने के ;लिये उसे भारत में तीव्र गति से चलाया जा रहा है और उसे समय पर पहुँचाने के लिये अन्य ट्रेनों को रोक दिया जाता है, दूसरा जैसे की मैंने पहले बताया सरकार घाटे का रोना रोटी है और उसे माल ढुलाई से ज्यादा कमाई है, इसलिये मालगाड़ी की आवाजाही बढ़ाने के लिये भी यात्री ट्रेनों को रोका जा रहा है।