सावधान आगे गड्ढा है : लगातार दुर्घटनाओं से त्रस्त राजधानी वासी, सर्विस रोड पर दुर्घटनाओं को आमंत्रण देते गेराज और खड़ी ट्रकें, खतरनाक हुआ रायपुर का ट्रैफिक।

रायपुर. लगातार दुर्घटनाओं से राजधानीवासियों की जान सांसत में है, शहर और आस – पास गड्ढों में राजधानी है या राजधानी में गड्ढे है, चौपहिया वाहनों के साथ दुपहिया सवार भी लगातार दुर्घटना के शिकार हो रहे है, प्रदेश में वाहन चालकों के लिए रायपुर जिला सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। पिछले 8 महीनों में रायपुर जिले में 1553 सड़क हादसे हुए हैं। इसमें 360 की मौत और 1009 लोग घायल हुए हैं। यह आंकड़ा वह है जो आप तक पहुँच रहा है, जबकि असली आंकड़ा इससे 5 गुना भी हो सकता है, जिले में रोजाना औसतन 6 सड़क हादसों में 4 घायल और 1 से 2 लोगों की मौत हो रही है। जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में सड़क हादसों का आंकड़ा 50 फीसदी से भी कम है। राज्य पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि ट्रैफिक नियमों का पालन नहीं करने के कारण सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। जबकि दूसरी तरफ राजधानी में चारो तरफ गड्ढे ही गड्ढे बने पड़े है। बढ़ता ट्रैफिक और वाहनों की रफ़्तार इसका प्रमुख कारण है।

नियम तोड़ने वालों की संख्या बढ़ी :

विभाग द्वारा सख्ती नहीं बरतने के कारण रोजाना ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। हेलमेट नहीं पहनने और आवागमन के लिए बनाए गए सड़कों पर भारी वाहनों को खड़े करने के कारण सर्वाधिक हादसे हो रहे हैं। इसके लिए शहर के अंदरूनी इलाकों से लेकर आउटर में सड़कों पर ट्रैफिक जाम करने वालों वाहन के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की जरूरत है। रिंग रोड और हाईवे पर सर्विस रोड के किनारे चल रहे गेराज और वाशिंग सेण्टर के कारण भी सड़कों पर कम जगह होने के कारण दुर्घटनायें लगातार बढ़ रही है।

साढ़े 9 करोड़ से ज्यादा का वसूला जुर्माना :

जानकारी मिली है कि प्रदेशभर में 8 महीनों में 2 लाख 55 हजार 232 वाहनों के खिलाफ चालानी कार्यवाही करते हुए 9 करोड़ 58 लाख 80 हजार 090 रुपए का जुर्माना वसूल किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा रायपुर जिले के 26 फीसदी से ज्यादा वाहन चालक शामिल हैं। फिर भी स्थिति नियंत्रण के बाहर है, इसका कारण कई जगह गलत तरीके के डिवाईडर और जल्दबाजी के कारण भी हादसे बढ़ रहे है।

सर्विस रोड में दुकानदारी ज्यादा खतरनाक :

रायपुर के दोनों प्रमुख रिंग रोड में वाहन चालकों की सुविधा के लिए सर्विस रोड बनाई गई है। लेकिन, रायपुरा, भाठागांव, पचपेड़ी नाका व तेलीबांधा चौक से लेकर भनपुरी, हीरापुर चौक में ठेले-खोमचे से लेकर सर्विसिंग सेंटर, फल सब्जी से लेकर होटल और पान की दुकानें खुल गई है। आस-पास गाड़ियों के लिये गेराज और वाशिंग सेंटर भी सड़कों को पर वाहनों को खड़ा करके गाड़ियाँ धोते है, जिसके कारण रोड संकरे हो रहे है।

जहां एक तरफ शहर में वाहन चलाने पर हादसे होने और दूसरी तरफ आउटर में मौत इंतजार करती है। इसके चलते वाहन चालकों के परिजन अनहोनी की आशंका के चलते वापस लौटने तक इंतजार करते हैं। बता दें कि शहर के अंदरूनी इलाकों में रोजाना 4 और आउटर में 2 सड़क हादसे होते हैं। इसकी मुख्य वजह शहर में आए दिन ट्रैफिक जाम और आउटर में तेज रफ्तार से वाहन चलाना है। इसे रोकने के लिए ट्रैफिक पुलिस को जांच का दायरा बढ़ाने के साथ ही रिंग रोड और सर्विस रोड में अभियान चलाए जाने की जरूरत है।

चालक की मौत के साथ वाहन के नुकसान भी :

राजधानी में शहर के अंदर अधिकतर डिवाईडर काफी समय पहले बनाये गये थे, जो सड़क के पुनर्निर्माण के कारण अपनी ऊंचाई से छोटे हो गये है, अथवा कई जगहों पर बेतरतीब और मनमाने ढंग से अनुचित डिवाईडरों का निर्माण हो चुका है, रात में जब वाहन चालक गाड़ी चलाता है तो उसे गाड़ी में बैठे ये छोटे डिवाईडर नहीं दिख पाते, जिसके कारण वो डिवाईडर से टकरा जाता है, इन डिवाईडरों के शुरू में रेडियम का बोर्ड लगाने का नियम है, जिससे रात के समय वाहन चालक सावधान हो जाये, लेकिन अधिकतर डिवाईडर जरुरी मापदंडों पर नहीं बनाये गये है, डिवाईडर से टकराने पर वाहन चालकों की ख़बरें ना मीडिया में आती है ना ही पुलिस में शिकायत होती है, और वाहन मालिक रात को गाड़ी वहीँ छोड़कर सुबह बनवाने चला जाता है, इसी तरीके के कई घटनायें राजधानी में सामने लगातार घटित हो रही है। गाड़ी के टकराने पर वाहन चालकों को नुकसान और वाहन बनवाने का खर्च भी 10,000 से 1 लाख रूपये तक लग रहा है।