रायपुर : आज शिक्षा जहाँ काफी महँगी हो गई है, वहीँ निजी स्कूलों की मनमानियों से परिजन परेशान है, यहाँ आम आदमी अपने बच्चों की फीस चुकाने के लिये जद्दोजहद कर रहे है, वहीँ बच्चों की पढाई के लिये किताबें, स्टेशनरी, स्कूल ड्रेस की पूर्ति करना उनके लिये मुश्किल हो रहा है, वहीँ स्कूलों द्वारा मोटी फीस देने के नाम लूट मचाकर रखी है, वहीँ सुविधाओं के नाम पर बच्चों को पीने का पानी तक नहीं मिल पा रहा है, स्कूल बुनियाद सुविधाओं की भी पूर्ति नहीं कर पा रहे है, समय – समय पर इन स्कूलों की मनमानी को लेकर लगातार मीडिया में ख़बरें भी आती है, परिजन और पालक संघ आन्दोलन करते है, शिकायतें भी लगातार होती है, लेकिन इन स्कूलों को कोई फर्क नहीं पड़ता।
सचदेवा इंटरनेशनल स्कूल की मनमानी :
सचदेवा इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के परिजनों से माचिस मिडिया को लगातार शिकायतें मिल रही थी, परिजनों ने बताया कि स्कूल द्वारा फीस के नाम पर मोटी रकम वसूल की जाती है, जिसे समय पर चुका पाने में कभी – कभी परिजनों को दिक्कत होती है, अभी स्कूल द्वारा अर्धवार्षिक परीक्षा में फीस के कारण बच्चों को पेपर देने से रोका गया, जिसको लेकर पालक आक्रोशित हो गये, उनका कहना था कि फीस तो हम चुकायेंगे ही, लेकिन बच्चों को फीस के नाम पर परीक्षा देने रोकना कहाँ तक उचित है? वहीँ क़ानूनी तौर पर फीस के नाम पर स्कूल बच्चों को परीक्षा देने से नहीं रोक सकता। जिसके कारण स्कूल प्रबन्धन ने दो घंटे तक बच्चों और उनके परिजनों को स्कूल के बाहर दो घंटे तक खड़ा करके रखा लेकिन परीक्षा देने नहीं दी।
इधर बच्चों ने बताया कि स्कूल द्वारा बुनियादी सुविधायें भी नही दी जा रही है, स्कूल के बाथरूम सही नहीं है, पंखे भी ख़राब रहते है, बिजली भी अधिकतर बंद रहती है, पीने के पानी की कमी के साथ साफ़ पानी भी नहीं मिल पाता, स्कूल की फीस ज्यादा है, स्कूल फीस समय पर ना पटाने के कारण बच्चों को स्कूल के बाहर खड़ा रखा गया, परीक्षा से भी वंचित किया गया, खेल के मैदान की टाइल्स टूटी है, साथ में पढाई के लिये पर्याप्त शिक्षक भी नहीं है।
स्कूल प्रबंधन ने दिया ये जवाब :
जब इन मुद्दों पर स्कूल प्रबंधन से बात की गई तो बताया गया कि कई पालकों ने 4 साल से फीस का भुगतान नहीं किया है, जिसके कारण स्कूल के संचालन की व्यवस्था में दिक्कत आ रही है, कई पालक अपने बच्चों की 12 वीं की मार्कशीट भी अब तक नहीं ले गये है, ना ही उन्होंने फीस का भुगतान किया है। प्रबंधन ने बताया कि शिक्षकों की फीस भी इसी कारण नहीं दी गई है, स्कूल को संचालित करने के आवश्यक भुगतान प्राप्त नहीं हो पा रहा है, पालकों द्वारा लाखों रूपये की फीस रुकी हुई है। उपरोक्त परेशानी और कारण बताते हुये व्यवस्था में चूक को प्रबंधन ने स्वीकार किया।