धरसींवा: 5 साल की बालिका से दुष्कर्म और उसका समय पर इलाज नहीं हो पाने, रेफर के लिए एंबुलेंस नहीं मिलने आदि को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन और चक्काजाम किया। प्रदर्शन में भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष लक्ष्मी वर्मा के साथ अन्य भाजपा कार्यकर्ता शामिल हुए। करीब दो घंटे तक नेशनल हाइवे पर चक्काजाम किया। इस दौरान आरोपी को कड़ी सजा, पीड़ित परिवार को 50 लाख उचित मुआवजे आदि की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले में उचित जांच के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद प्रदर्शन खत्म हुआ। दूसरी ओर दुष्कर्म पीड़िता बच्ची की हालत गंभीर थी, जिसमें सुधार हुआ है।
ये था मामला :
गुरुवार की दोपहर 5 साल की नाबालिग से उसके पड़ोसी नाबालिग लड़के ने दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी होने पर करीब 2 बजे नाबालिग के माता-पिता घर पहुंचे और पुलिस भी मौके पर पहुंची। इसके बाद नाबालिग की हालत को देखकर उसके परिजन दोपहिया में बैठाकर उसे धरसींवा सरकारी अस्पताल ले गए। बालिका को वहां भर्ती कराया गया। इसके बाद उनके पिता थाने चले गए। वहां लिखित में शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने अपराध दर्ज कर दुष्कर्म करने वाले अपचारी बालक को पकड़ लिया। दूसरी ओर अस्पताल में बालिका का पूरा इलाज नहीं हो पाने से वह दर्द से परेशान रही।
पुलिस ने दिखाई संवेदनशीलता:
पीड़ित बालिका को धरसींवा अस्पताल में दोपहर करीब 3 बजे से भर्ती कराया गया था। उन्हें ब्लीडिंग हो रही थी। दर्द से भी बुरा हाल था। अस्पताल में सामान्य उपचार करके छोड़ दिया गया था, जबकि बच्ची को सर्जरी, सोनोग्राफी आदि की जरूरत थी। रात 8 बजे तक आगे का इलाज ही नहीं हो पाया। ग्रामीणों ने इसको लेकर हंगामा करना शुरू किया, तो उन्हें आंबेडकर अस्पताल भेज दिया गया, लेकिन इसके के लिए सुविधा नहीं मिली। अस्पताल का एंबुलेंस भी नहीं मिला और न ही सरकारी एंबुलेंस पहुंची। इसके बाद धरसींवा पुलिस की पेट्रोलिंग गाड़ी से पीड़िता और उनके पिता को अम्बेडकर अस्पताल भेजा गया। अम्बेडकर अस्पताल में देर रात नाबालिग की सर्जरी हुई। शुक्रवार को उसके हालत में सुधार देखा गया है। कभी काफी देर तक दर्द से कराहती रही।
ग्रामीणों का आरोप
अस्पताल में बालिका के इलाज में देरी होने और समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से ग्रामीण और परिजन काफी नाराज थे। गुरुवार रात से ही ग्रामीण थाना और अस्पताल में हंगामा करने लगे थे। इसके अलावा ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि थाने में भी शिकायत दर्ज करने में देरी हुई और पीड़िता के पिता को अनावश्यक रूप से रात 8 बजे तक बैठाकर रखा गया था। अस्पताल में जरूरी दस्तावेज नहीं भेजे गए। इससे रेफर का काम अटका रहा।
यह भी होता है :
दुष्कर्म पीड़िताओं के बेहतर इलाज की बात तो दूर, मुलाहिजा की सुविधा भी कई सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में नहीं है। धरसींवा, उरला, गुढ़ियारी जैसे इलाकों से भी बलात्कार पीड़िता को मुलाहिजा के लिए अम्बेडकर अस्पताल भेजा जाता है। इन क्षेत्रों में स्थित महिला डॉक्टरों की जिस दिन ड्यूटी रहती है, सिर्फ उसी दिन मुलाहिजा करते हैं। बाकी दिन अम्बेडकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। पीड़ित को त्वरित सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती।