रायपुर : विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संदिग्ध बैंकों खाते में बड़ी राशि के लेन-देन पर बैंकों की नजर रहेगी। केंद्रीय चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के बाद बैंकों की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट के अधिकारी आयोग और निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों को रिपोर्ट देंगे। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव नवंबर महीने में होगा। ऐसे में बैंकों को अभी से सूचित कर दिया गया है। चुनाव में आयोग द्वारा खर्च की सीमा तय कर दी जाती है, लेकिन प्रत्याशी तय सीमा से ज्यादा खर्च करते है, जिसका खामियाजा चुनाव के बाद जनता को भुगतना पड़ता है, इसके तोड़ के लिये प्रत्याशी नये खाते खुलवाकर अथवा अपने परिचितों के खाते में पैसे डालकर अपने कार्यों को अंजाम देते है।
इस संबंध में केंद्रीय चुनाव आयोग के आला अधिकारियों के साथ आरबीआई, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी ) और प्रमुख बैंकों के अधिकारियों के साथ बैठकें हो चुकी है। काले धन को खपाने या संदिग्ध लेन-देन पर संबंधित फर्म या व्यक्तियों को नोटिस दी जायेगी। लेन-देन के गंभीर मामलों की जांच पुलिस को सौंपी जाएगी। सही जवाब ना मिलने और मामला संदिग्ध होने की दशा में अभियुक्त पर क़ानूनी कार्यवाही भी की जा सकती है।
सीधे बैंक खातों में लेन-देन के साथ ही ऑनलाईन ट्रांजेक्शन पर भी बैंकों की नजर रहेगी। निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक चुनाव में लुभावने वादों के साथ लोगों को धन बल से आकर्षित करने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में चुनाव आयोग हर दृष्टि से निगरानी की कोशिश कर रहा है। जिससे ऐसे कृत्यों को रोका जा सके और चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो जाये।
इन तीन महीनों में 1.08 लाख नए खाते :
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के मुताबिक छत्तीसगढ़ में मार्च-2023 के मुकाबले जून-2023 तक 1.08 लाख नए खाते खुले हैैं। मार्च-2023 में प्रदेश में डेबिट कार्ड की संख्या 1 करोड़ 80 लाख 40 हजार 383 थी, जो कि जून तक 1 करोड़ 81 लाख 48 हजार 878 हो चुकी है। राज्य की आबादी 3 करोड़ के करीब हैं। इससे जाहिर है कि बड़ी मात्रा में नये खाते खोले गये है।
बैंकिंग अधिकारियों के मुताबिक एक ही व्यक्ति के पास एक से अधिक बैंक खातों की वजह से एक से अधिक डेबिट कार्ड हो सकते हैं। श्रमिकों से लेकर ज्यादातर सरकारी कार्यों की राशि खाते में आ रही है। इसलिए भी संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है। यह सच है कि तीन महीने में 1 लाख से अधिक डेबिट कार्ड खाता धारकों को दिए गए हैं।
आचार संहिता इस माह से पहले हफ्ते में संभावित :
राज्य में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अक्टूबर महीने के पहले हफ्ते में ही आचार संहिता की संभावना जताई जा रही है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक संभवत: पांच से सात अक्टूबर के बीच आचार संहिता लागू हो सकती है। इसके मद्देनजर चुनाव आयोग ने व्यय प्रेक्षकों की नियुक्ति की तैयारी कर ली है। केंद्रीय चुनाव आयोग से गठित प्रेक्षकों की टीम अगले हफ्ते प्रदेश में निर्वाचन अधिकारियों की बैठक में नए नियमों को लेकर दिशा-निर्देश देंगे। उल्लेखनीय है कि अब विधानसभा चुनाव में खर्च की सीमा 28 लाख से बढ़ाकर 40 लाख रुपये किया गया है। चुनाव आयोग चुनाव को लेकर अपनी तैयारियां लगातार कर रहा है।
कई बड़े विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास :
जानकारी के मुताबिक आचार संहिता लगने के पहले एक सप्ताह में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा सकता है। राज्य सरकार ने विभागों को निर्देशित किया है कि वे सभी लंबित प्रोजेक्ट को पूरा करें साथ ही विकास कार्यों की निविदा में भी तत्परता बरतें। मालूम हो कि सितंबर महीने में ही राज्य सरकार ने 40 हजार करोड़ रुपये से कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया है। इनके लोकार्पण को लेकर भी आयोग मुस्तैद है।