कभी-भी लागु हो सकती है आचार संहिता, चुनावी तारीख का होने वाला है ऐलान।

रायपुर : विधानसभा चुनाव को लेकर छत्तीसगढ़ में चुनावी आचार संहिता कभी भी लागू हो सकती है। आचार संहिता के लागू होते ही चुनाव की तारीख भी घोषित हो जायेगी। इधर राजनीतिक पार्टियों ने भी चुनाव आचार संहिता के मद्देनजर रैलियों – सभाओं को तेज कर दिया है। राज्य सरकार ने एक के बाद एक लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। चुनाव आचार संहिता के लागू होते ही लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रमों पर रोक लग जाएगी। छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में चुनावी तारीखों की घोषणा केंद्रीय चुनाव आयोग के जरिए होगा। इसके बाद चुनावी प्रचार में तेजी आ जायेगी।

छत्तीसगढ़ की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय की सीईओ रीना बाबा साहेब कंगाले ने बताया कि केंद्रीय चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। चुनाव तारीखों की घोषणा से ही आचार संहिता स्वमेव लागू हो जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर हमने 90 विधानसभा में मतदान की पूर्व तैयारियां पूरी कर ली है। सभी जगह का मुआयना कर व्यवस्था बनाना शुरू कर दिया गया है।

प्रदेशभर में मतदाता जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव की बात करें तो निर्वाचन आयोग ने 6 अक्टूबर 2018 के दिन चुनाव का ऐलान किया था। दो चरणों में हुए चुनाव में पहला मतदान 12 नवंबर को 18 सीटों पर और दूसरा मतदान 20 नवंबर को 72 सीटों पर हुआ था। इस बार मतदान एक ही चरण में होने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ में हैं कुल 90 विधानसभा सीटें :

छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं, जहाँ चुनाव होता है। 2018 में विधानसभा चुनाव कांग्रेस ने 90 में से 68 सीटें जीतकर छत्तीसगढ़ में जबरदस्‍त वापसी की और भाजपा को राज्य की सत्ता बेदखल कर दिया था। वहीं भाजपा महज 15 सीटों पर सिमट गई। जबकि, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जोगी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन को सात सीटें मिलीं। छत्तीसगढ़ में कुल 33 जिलों में 90 विधानसभा सीटें है, जिसमें कुल 51 सीटें सामान्य, 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं। इन सभी में इस वर्ष पुनः चुनाव होना है।

नक्सलगढ़ में 143 नए मतदान केंद्र :

इस बार नक्सलगढ़ यानी बस्तर के लिए विधानसभा चुनाव कुछ अलग होगा। दरअसल, निर्वाचन कार्यालय ने यहां बस्तर संभाग में 143 नए मतदान केंद्र बनाए हैं। इसके पीछे मंशा यह है कि ग्रामीणों को मतदान के लिए कम से कम दूरी तय करनी पड़े, क्योंकि हर कदम पर यहां जिंदगी दांव पर होती है। यहाँ नक्सली मतदान का विरोध करते हैं, जिसको लेकर ग्रामीणों को जान का भय होता है। अब यहां मतदाताओं को 5 से 25 किमी. चलना नहीं होगा बल्कि अधिकतम दो किमी. की दूर तय करके मतदान केंद्र की सुविधा मिलेगी, जिससे यहाँ मतदान प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

रिकार्ड 2.03 करोड़ मतदाता :

चार अक्टूबर को निर्वाचन कार्यालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ में इस वर्ष रिकार्ड 2 करोड़ 3 लाख 60 हजार 240 मतदाता है। 2018 के विधानसभा चुनाव में 1.85 करोड़ मतदाताओं ने चुनावी महासमर में हिस्सा लिया था। निर्वाचन के आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष प्रदेश में सात लाख 19 हजार 825 मतदाताओं की संख्या में वृद्धि हुई है। मतदाता पुनरीक्षण में 2 लाख 90 हजार 874 नामों को फार्म-7 के आधार पर विलोपित भी किया गया है।

24109 बूथ, केंद्र की 150 कंपनियां :

छत्तीसगढ़ में इस विधानसभा चुनाव के लिए 24109 बूथ चिन्हित किए गए हैं, जबकि 2018 के विधानसभा चुनाव में 23 हजार 677 बूथ बनाए गए थे। मतदाताओं की संख्या में वृद्धि के बाद पोलिंग बूथों की संख्या में भी वृद्धि की गई है। छत्तीसगढ़ के डीजीपी अशोक जुनेजा ने बताया कि विधानसभा चुनाव में सेंट्रल आर्म्ड फोर्स की 150 कंपनियां मोर्चा संभालेगी। केंद्र और राज्य सुरक्षा बलों के जवान हर मोर्चे पर तैनात रहेंगे। पूरी सुरक्षा के बीच मतदान संपन्न होंगे।

उल्लेखनीय है कि दो महीने पहले केंद्रीय चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने छत्तीसगढ़ में तीन दिवसीय दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण बैठकें ली थी। चुनाव प्रक्रिया पर रणनीति दो महीने पहले ही तैयारी की जा चुकी है अब सिर्फ तारीखों की घोषणा बाकी है। जल्द ही चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया जायेगा।