टिकट से वंचित दावेदारों की बगावत ने लिया है तूफ़ान का रूप, सभी पार्टियों के लिये खड़ी करेंगे मुसीबत।

रायपुर : दल बदलुओं को जब पार्टी टिकट दे देती है, अपने दम पर माहौल बनाने वाले को टिकट मिल जाती है, निर्दलीय जीते प्रत्याशियों को पार्टियाँ हाथों – हाथ ले लेती है, वो भी प्रत्याशी तब निर्दलीय लड़ने का साहस करते है जब पार्टी से बगावत के कारण 6 साल निलंबित हो जाते है, और जीतने के बाद पार्टी उन्हें वापस ले लेती है और भरपूर सम्मान देती है। इसका मुख्य कारण है बढ़ती उम्र और 5 साल में एक बार चुनाव, इसे ऐसे समझें जैसे एक अनार सौ बीमार , जहाँ इतने लोग है तो सबका नंबर कब आयेगा? बस यही सोचकर दावेदार अब निर्दलीय लड़ेंगे, ऐसे बेहिसाब नाम खड़े हो गये है। कोई नई और छोटी पार्टियों से खड़ा हो रहा है तो कोई निर्दलीय।

टिकट से वंचित दावेदारों की नाराजगी और बगावती तेवर से सत्ताधारी दल कांग्रेस व प्रमुख विपक्षी भाजपा के रणनीतिकारों की परेशानी बढ़ने लगी है। प्रबंधन की सारें कोशिशें व कवायद का प्रभावी असर अब तक देखने में नहीं आया है। नाराज दावेदारों के घर कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी है। कार्यकर्ताओं का दबाव नाराजगी को और हवा देने का काम करने लगा है। सभी कार्यकर्ता अपने – अपने नेताओं के साथ खड़े होते नजर आ रहे है।

अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की ओर से बगावत खुलकर सामने आ गया है। पूर्व सांसद कमला पाटले की बेटी व मस्तूरी जनपद पंचायत की पूर्व अध्यक्ष चांदनी भारद्वाज ने भाजपा से इस्तीफा देकर जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ की सदस्यता ग्रहण कर ली है। जकांछ में शामिल होने के साथ ही मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ते भी दिखाई देंगी। लगभग इसी तरह के हालात सभी सीटों पर बन गये है।

विपक्षी दल भाजपा के साथ ही सत्ताधारी पार्टी के रणनीतिकार भी नाराजगी और बगावत से आहत नजर आ रहे हैं। बिल्हा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेसी रणनीतिकारों को दोतरफा नाराजगी झेलनी पड़ रही है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में बिल्हा सीट से पराजित प्रत्याशी राजेंद्र शुक्ला की जगह जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ से कांग्रेस में आने वाले पूर्व विधायक सियाराम कौशिक को प्रत्याशी बनाया है। राजेंद्र की नाराजगी भी अब सार्वजनिक होने लगी है। बीते दिनों कार्यकर्ताओं की बैठक में उनका दर्द भी बाहर आया था। इन सब मुद्दों को सुलझाने में रणनीतिकारों के पसीने छूट रहे है।

राजेंद्र के साथ ही एक और प्रबल दावेदार छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल की सदस्य,मुंगेली जिला प्रचायत की सभापति अंबालिका साहू ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अंबालिका ने कांग्रेस पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज को समर्थकों के हस्ताक्षर के साथ इस्तीफा भेज दिया है। बिल्हा विधानसभा सीट से दो नेताओं की नाराजगी उभरकर सामने आ गई है। कमोबेश कुछ इसी तरह की स्थिति मुंगेली जिले की लोरमी सीट पर भी नजर आ रही है। यही हालात राजधानी रायपुर की चारों विधानसभा सीटों पर भी है।

लोरमी में कांग्रेस ने थानेश्वर साहू को उम्मीदवार बनाया है। मुंगेली जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सागर सिंह बैस की नाराजगी भी खुलकर सामने आ गई है। चर्चा तो इस बात की भी हो रही है कि जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी से उनकी मुलाकात हुई है। मुलाकात के दौरान क्या चर्चा हुई और आगे उनकी क्या रणनीति रहेगी यह बात सामने नहीं आया है। समर्थकों की मानें तो सागर चुनाव मैदान में ताल ठोंकते नजर आएंगे। कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष रुपलाल कोसरे ने भी पार्टी छोड़ दी है।

त्रिलोक समर्थकों की नाराजगी आने लगी सामने :

बेलतरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के दावेदार त्रिलोक श्रीवास समर्थकों की नाराजगी भी अब खुलकर सामने आने लगी है। सोमवार को उनके निवास में समर्थक कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी। कार्यकर्ताओं का दोटूक कहना था कि इस तरह की उपेक्षा अब बर्दाश्त नहीं करेंगे। समर्थक कार्यकर्ता त्रिलोक पर जल्द निर्णय लेने और विकल्प चुनने का दबाव बना रहे हैं। कार्यकर्ताओं की माने तो जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ के दिग्गज पदाधिकारी लगातार संपर्क कर रहे हैं। बसपा के दिग्गज पदाधिकारी भी संपर्क साध रहे हैं।

रायपुर में भी चारों सीटों पर मचा है घमासान :

रायपुर उत्तर में कांग्रेस से ही कई दावेदार थे , जिसमें एजाज़ ढेबर , अजित कुकरेजा जैसे नाम है, वहीँ दक्षिण से कन्हैया अग्रवाल और अन्य कई लोग, सभी सीटों पर इसी प्रकार से दावेदारी कर रहे है, एक तरफ जहाँ हारे हुये प्रत्याशी श्रीचंद सुन्दरानी को टिकट नहीं देने से सिन्धी समाज नाराज है, वहीँ हारे हुये राजेश मूणत को टिकट मिलने से समाज की नाराजगी चरम पर है। आप पार्टी से भी विजय गुरुबक्षानी चुनाव लड़ने के लिये खड़े हो चूके है।