विदेशी नस्ल के कुत्तों के दीवाने लोगों के लिये खास खबर, भारतीय श्वान जया का बना पासपोर्ट, जायेगी नीदरलैंड।

वाराणसी (उ.प्र) : जहाँ भारतीय लोग विदेशी नस्ल के कुत्तों के दीवाने होते है और देसी श्वान पालना नहीं चाहते, वहीँ देशी श्वान की वफादारी भी कम नहीं होती, देशी श्वानों के कई ऐसे किस्से आये है, जहाँ उनका ख्याल करने वाले लोगों के लिये उन्होंने जान भी दी है, जबकि विदेशी नस्ल के कुत्ते सिर्फ चोरों से बचाव और शौकिया पालने के काम ही आते है। अभी तक आपने सुना होगा कि किसी सड़क पर आवारा कुत्ते ने किसी पर हमला कर दिया। कुत्तों के झुंड ने किसी इंसान को काट लिया और उसकी मौत हो गई। या फिर आपने इंसानों और कुत्तों के प्यार के बारे में भी सुना होगा। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा सुना कि किसी दूर देश से आए नागरिक को एक आवारा कुत्ता पसंद आ गया हो और वह उसे अपने साथ ले जा रहा हो। शायद आपने ऐसा ना सुना हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ऐसा ही हुआ है।

बनारस की गलियों में घूमते-घूमते मिली जया :

दरअसल, नीदरलैंड से भारत में घूमने आई एक महिला को वाराणसी की सड़कों पर आवारा घूमने वाली ‘जया’ इतनी पसंद आ गई कि वह उसे अपने साथ ले जा रही है। इतना ही नहीं उसने जया के लिए बाकायदा पासपोर्ट और वीजा भी बनवा लिया है। हालांकि किसी एक देश से दूसरे देश किसी जानवर को ले जाने के लिए एक लंबी प्रक्रिया है और महिला उसी तय प्रक्रिया से जया को नीदरलैंड ले जाना चाहती है। जानकारी के अनुसार, नीदरलैंड की इस महिला का नाम मेराल बोंटेनबेल है। इस प्रकिया को पूरा करने के लिये मेराल भारत में रहकर लगातार छः माह तक प्रक्रिया पूरी की, उन्होंने कहा भारतीय मै भारत के लोगों क प्रेम से तो प्रभावित हूँ ही, लेकिन यहाँ जया की प्यार भरी भावनाओं ने भी दिल जीत लिया।

नीदरलैंड के एम्स्टर्डम की रहने वाली है मेराल बोंटेनबेल :

मेराल ने बताया कि वह नीदरलैंड के एम्स्टर्डम की रहने वाली है। वह यहां यात्रा करने और शहर में घूमने आई थी। इस दौरान जब वह बनारस की गलियों में घूम रही  थी तब जया उसके पास आई। वह हमसे घुलना-मिलना चाहती थी। इसके बाद वह हमारे साथ चलने लगी। तभी एक कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। तब एक गार्ड ने उसे बचाया। मेराल कहती है कि पहले जया को गोद लेने का कोई इरादा नहीं था। मैं बस यही चाहती थी कि वह सड़कों पर आवारा न फिरे। हालांकि अब वह उसे पालना चाहती है और इसी मकसद से वह जया को नीदरलैंड ले जाना चाहती है।

भारत में लगभग 6 करोड़ श्वान है :

विदेशों में कुत्तों के रहने खाने की व्यवस्था बेहद ही अच्छे स्तर पर होती है, जबकि भारत में श्वानों के प्रति जागरूकता नहीं है, लोग इन्हें नफरत भरी दृष्टि से देखते है, जबकि 140 करोड़ की आबादी वाले देश में इनके लिये बेहतर व्यवस्था हो सकती है, वहीँ अब भारतीय श्वान भारतीय सेना में विदेशी नस्ल के कुत्तों की जगह पाला जाना शुरू किया गया है।