राकेश डेंगवानी/रायपुर : छत्तीसगढ़ में होने वाले चुनाव को लेकर वर्ष भर से जनता में उत्सुकता थी, जैसे – जैसे नामों की घोषणा हुई वैसे ही चुनावी रणनीति और माहौल बदलने लगा है, प्रत्याशी अपने प्रचार पर निकला चुके है, सब खुद को समर्थन मिलने का दावा कर रहे है, जहाँ दक्षिण विधानसभा को लेकर बृजमोहन और महंत रामसुन्दर दास का सीधा मुकाबला है, वैसे पश्चिम में विकास उपाध्याय नहीं बल्कि कांग्रेस और राजेश मूणत आमने सामने है, यहाँ 50 – 50 का मुकाबला है, जबकी दक्षिण विधानसभा में बृजमोहन की जीत तय है, लेकिन यह बहुत ही कम वोटों से होगी, इसका कारण क्षेत्र में बृजमोहन की लोकप्रियता में कमी और बंटते वोट। ग्रामीण में कांग्रेस का कोई तोड़ ही नहीं है।
रायपुर उत्तर विधानसभा का जानते है गुणाभाग :
रायपुर विधानसभा बैठे बिठाये हाईप्रोफाईल बन गई है, जबकि यहाँ से ना तो कोई मंत्री है और ना कोई बड़ा नेता ही, फिर भी यह अधिकतर लोगों की निगाह में है, सभी का ध्यान इसके ऊपर ज्यादा केन्द्रित है। यहाँ 2013 में श्रीचंद सुन्दरानी की जीत मात्र 3500 वोटों से हुई थी वो भी पांच साल तक सच्चिदानंद उपासने की मेहनत पर जिसे काटकर सुन्दरानी को टिकट दिया गया था। 2018 में श्रीचंद सुन्दरानी की लोकप्रियता ने कमी के कारण उनकी टिकट कट रही थी लेकिन फिर सिन्धी समाज के दबाव के कारण मिल गई और अपनी गिरती हुई लोकप्रियता और महत्वाकांक्षा के चलते वे चुनाव हार गये, यह चुनाव उन्होंने लगभग 16,000 वोटों के अंतर से हारा था।
अब इस वर्ष क्या होगा आइये समझते है :
अब इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है, जहाँ कुलदीप जुनेजा यहाँ लगभग 16,000 वोटों से जीते थे, वहीँ पहले हम यहाँ का गणित समझते है, इस क्षेत्र में लगभग 2 लाख मतदाता है, जिनमें से पिछले चुनाव में सिर्फ 1 लाख 25 हजार वोट पड़े थे जिनमें 59,000 के लगभग कुलदीप जुनेजा को मिले थे, और श्रीचंद सुन्दरानी को 45,000 वोट, बाकी वोट काटने वाले ले गये। अब इस आधार पर पुराने हिसाब से देखा जाये तो इस बार कितने वोट पड़ेंगे, ये समय बतायेगा लेकिन उपरोक्त परिणाम के आधार पर जुनेजा 16,000 वोटों का गड्ढा पाटना भाजपा के लिये आसान नहीं होगा।
पुरंदर मिश्रा का अपना कोई जनाधार नहीं है वो सिर्फ भाजपा के नाम पर ही खड़े है, जबकि जुनेजा जमीनी तौर पर मजबूत है, दूसरी तरफ अजीत कुकरेजा जो समाज के बदौलत चुनाव लड़ रहे है, उनका भी सभी समाजों में काफी हद तक जनाधार तय है, लेकिन इनकी जीत दूर – दूर तक मुश्किल है, ये सिर्फ भाजपा और कांग्रेस के वोट काटकर बड़ा झटका देंगे, और आगे चलकर निर्दलीय पार्षद बन ही जायेंगे क्यूंकि पार्टी ने इनका 6 वर्ष का निलंबन कर दिया है, और जीत के बाद वापस कांग्रेस में आ जायेंगे। कुल मिलाकर इनका कोई नुकसान नहीं है। ये कुलदीप जुनेजा के कुछ हद तक मुस्लिम, क्रिश्चन और अन्य सामाजिक वोट काटेंगे, और साथ में भाजपा के 90% सिन्धी वोट भी ले जायेंगे।
जुनेजा की जीत तय है , क्यूंकि उनका पिछली बार की जीत का अंतर ज्यादा है, 200 करोड़ के घोटाले के दाग का भी उनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, उनको कांग्रेस के स्थाई मुस्लिम, क्रिश्चन वोट मिल ही जायेंगे, छत्तीसगढ़िया वोट भी उनकी झोली में इस बार गिरेंगे और सिक्ख वोट तो उनको मिलेंगे ही। जबकि भाजपा के लिये सावित्री जगत के कारण और अजीत कुकरेजा के कारण ओड़िया और सिन्धी वोट भाजपा की हार निश्चित कर चुके है। ओस विधानसभा में त्रिकोणीय मुकाबला है, जिसमें कांग्रेस से कुलदीप जुनेजा , भाजपा से पुरंदर मिश्रा और बड़ा झटका देने के लिये अजीत कुकरेजा। अजीत कुकरेजा 5000 से 7000 वोट झटक सकते है। बाकी अब परिणाम का इंतजार किजिये, समर्थन तो जनता सबको दे ही रही है।