रायपुर : ध्वनि प्रदूषण से लोगों में चिंता, बेचैनी, बातचीत करने में समस्या, बोलने में व्यवधान, सुनने में समस्या, उत्पादकता में कमी, सोने के समय व्यवधान, थकान, सिरदर्द, चिड़चिड़ापन, घबराहट, कमजोरी, ध्वनि की संवेदन शीलता में कमी जिसे हमारे शरीर की लय बनाए रखने के लिये हमारे कान महसूस करते हैं, चौराहों पर खड़े सिपाही को लगातार इनका दुष्प्रभाव पड़ता है। भय और चिड़चिड़ापन लोगों में काफी बढ़ गया है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में डीजे बजाने, लाउडस्पीकर और शोर मचाने को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। राजधानी में कोलाहल पर कार्यवाही होगी। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और सरकारी भवनों के बाहर डीजे बजाना, लाउडस्पीकर और शोर मचाना प्रतिबंधित किया गया है। रायपुर में ध्वनि प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित हुआ है। इसको लेकर कलेक्टर ने आदेश जारी किया, बता दें कि रायपुर जिले में चिन्हांकित क्षेत्रों के 100 मीटर की परिधि को ध्वनि प्रतिबंधित क्षेत्र अर्थात जोन ऑफ साइलेंस घोषित किया गया है। जारी निर्देश के मुताबिक, इसके तहत चिन्हित क्षेत्रों में सभी सरकारी और निजी अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, अदालतें, मंत्रालय, निदेशालय और सभी सरकारी कार्यालय शामिल होंगे। इसकी 100 मीटर की परिधि को शोर प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया है। इसका उल्लंघन करने पर कार्यवाही भी होगी। यदि इसकी सूचना आती है तो अमला तुरंत सक्रिय होगा।
शोर पर प्रतिबंध :
जिला दंडाधिकारी डॉ. सर्वेश्वर भुरे ने रायपुर जिले के चिन्हित क्षेत्रों के आसपास 100 मीटर की परिधि को जोन ऑफ साइलेंस के रूप में नामित किया है। इसमें सरकारी और गैर-सरकारी अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, जिला और सत्र अदालतें, अन्य अदालतें, मंत्रालय, निदेशालय और सभी सरकारी कार्यालय शामिल हैं। माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के एक अंतरिम आदेश के पालन में, ध्वनि नियम 1985 और शोर प्रदूषण नियम 2000 द्वारा दी गई शक्तियों के तहत शोर प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके अंतर्गत शोर करने वालों पर शिकंजा कसा जायेगा।
उच्च न्यायालय के आदेश का किया जा रहा है पालन :
इसमें भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार से संबद्ध अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और कार्यालय शामिल हैं। माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के एक अंतरिम आदेश का पालन करता हुए शैक्षणिक गतिविधियों, बुजुर्गों, दिव्यागों और बीमार व्यक्तियों के स्वास्थ्य, साथ ही सार्वजनिक शांति की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध कोलाहल नियम 1985 (Noise Rules 1985) और ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 (Noise Pollution Rules 2000) द्वारा प्रदत्त अधिकार के तहत लागू किया गया है। कलेक्टर ने सक्षम अधिकारियों को इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।