रायपुर : राजधानी में ऑटो चालकों से राहगीर लगातार परेशान हो रहे है, इन पर कोई लगाम नहीं है। शहर में सवारी ऑटो और ई-रिक्शों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके चलते जगह-जगह अवैध ऑटो स्टैंड भी बन गए हैं। इससे लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है। नगर निगम द्वारा अस्थायी ऑटो स्टैंड बनाए गए हैं। इसके बावजूद सड़कों व चौक-चौराहों पर ही ऑटो को खड़ी कर रहे हैं। इससे यातायात व्यवस्था बिगड़ गई है। अचानक से वाहन अड़ाकर रोक देते है, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कुछ कहने पर गुंडागर्दी पर उतर आते है। कुछ गाड़ियाँ तो नशेड़ी नाबालिग भी चलाते है, और विवाद बढ़ने पर उनसे चाकूबाजी की आशंका भी होती है, जिसके कारण लोग उनसे विवाद करने से भी डरते है।
रेलवे स्टेशन, भाठागांव बस स्टैंड, जयस्तंभ चौक व शास्त्री चौक पर सुबह से देर रात तक सड़क पर सवारी ऑटो और ई-रिक्शा खड़ी करके रखते हैं। इससे दूसरे दोपहिया, चौपहिया चालक और राहगीरों का आवागमन प्रभावित होता है। सड़क हादसे की भी आशंका रहती है। कई बार वाहन टकराने पर गाली- गलौज और मारपीट पर भी उतर आते है। इनमें अधिकतर बाहरी लोग होते है जो कई बार किसी आपराधिक घटना को अंजाम देकर भाग निकलते है।
40 फीट की सड़क 20 फीट की हुई :
शहर में अधिकांश मार्गो में सवारी ऑटो और ई-रिक्शा की भरमार है। सड़क पर एक साथ घेरा बनाकर चलते हैं, जिससे 40 फीट की सड़क केवल 20 फीट की रह जाती है। इससे दूसरे वाहनों का गुजरना मुश्किल होता है। लोग जाम में फंस जाते हैं। कई बार घंटों जाम लगता है। खासकर जीई रोड, फाफाडीह मार्ग में। कई बार साइड मांगने पर ऑटो चालक अपने गुंडागर्दी पर उतारू हो जाते हैं। मारपीट करने लगते हैं। इससे शहर में एक तो हैवी ट्राफिक से आम आदमी परेशान रहता है, वहीँ इनकी गुंडागर्दी से त्रस्त रहता है।
भीड़-भाड़ में कट मारकर चलाते हैं :
ऑटो चालक भीड़ भाड़ में सवारी बैठाने-उतारने के नाम पर बीच सड़क में कहीं भी गाड़ी खड़ी कर देते हैं। कई बार आम वाहन चालकों को कट मारकर चलते हैं। ऑटो स्टॉप तय नहीं होने के कारण किसी भी स्थान पर अचानक गाड़ी खड़ी करके सवारी बैठाते हैं। इससे पीछे आने वाले वाहनों को भी रूकना पड़ता है। पंडरी मार्ग, जयस्तंभ से आमापारा तक, शास्त्री मार्केट से पचपेढ़ीनाका तक कई बार लंबा जाम लग जाता है। हर चौक चौराहे को घेरकर खड़े रहते है।
पहले आरटीओ ने इस समस्या से निपटने के लिए ग्रामीण और शहरी ऑटो का चयन किया था। इससे ग्रामीण ऑटो अपनी सीमा में चलते थे, लेकिन कुछ सालों में ऑटो और ई रिक्शा की संख्या बढ़ी है। इन्हें भी अलग-अलग भागों में बांटना होगा, ताकि लोगों को सुविधा मिले। वैसे यातायात पुलिस द्वारा रोजाना इस पर चालानी कार्यवाही की जा रही है।
गुरजीत सिंह, डीएसपी, ट्रैफिक